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किस वजह से हुआ श्याम रंगीला का नॉमिनेशन खारिज और क्या अब भी बचा है मौका? जानिए कानून क्या कहता है

Shyam Rangeela Nomination: नियम के मुताबिक आरओ को नामांकन पत्र प्राप्त होने पर यह जांचना होगा कि फॉर्म के सभी कॉलम भरे हुए हैं या नहीं।
Written by: ईएनएस | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: May 16, 2024 20:40 IST
किस वजह से हुआ श्याम रंगीला का नॉमिनेशन खारिज और क्या अब भी बचा है मौका  जानिए कानून क्या कहता है
श्याम रंगीला का पर्चा खारिज (PhotoTwitter)
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कॉमेडियन श्याम रंगीला का वाराणसी लोकसभा से नॉमिनेशन खारिज हो गया है। यह मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर उनका नॉमिनेशन क्यों खारिज हुआ? जानकारी यह आई कि वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया कि यह "अधूरा" था।

नामांकन खारिज होने के बाद श्याम रंगीला ने आरोप लगाया कि नागरिकों से चुनाव लड़ने का अधिकार छीन लिया गया है। इससे पहले उन्हें नामांकन करने में भी काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा था।

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क्यों खारिज हुआ श्याम रंगीला का पर्चा?

श्याम रंगीला ने दावा किया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन मंगलवार को दोपहर 3 बजे की समय सीमा से पहले उनका नामांकन स्वीकार कर लिया था। हालांकि, बुधवार को नामांकन की जांच के दौरान उन्हें बताया गया कि उनका नामांकन खारिज कर दिया गया है। क्योंकि उन्होंने शपथ नहीं ली है, जैसा कि संविधान द्वारा शपथ लेना अनिवार्य होता है।

श्याम रंगीला के सोशल साइट एक्स पर किए गए एक पोस्ट का जवाब देते हुए वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट और रिटर्निंग ऑफिसर एस राजलिंगम ने कहा कि रंगीला की मौजूदगी में नामांकन पत्रों की जांच की गई थी और बाद में उन्हें उनके फॉर्म में मौजूद गलतियों के बारे में बताया गया था।

डीएम ने कहा, "आपका नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया है क्योंकि आपके द्वारा पेश किया गया शपथ पत्र अधूरा था और आपने शपथ/प्रतिज्ञा नहीं ली थी, जिसके आदेश की एक प्रति भी आपको उपलब्ध करा दी गई है।"

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शपथ क्यों है जरूरी, नियम क्या कहते हैं?

संविधान के अनुच्छेद 84 के मुताबिक जो नागरिक चुनाव लड़ना चाहता है, उसे चुनाव आयोग द्वारा अधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति में कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और निष्ठा, भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने की शपथ लेनी होती है।

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आमतौर पर शपथ के लिए रिटर्निंग ऑफिसर या उनके सहायक अधिकृत होते हैं। चुनाव आयोग की हैंडबुक में मौजूद नियमों में कहा गया है कि नामांकन की जांच के लिए चुनाव आयोग द्वारा तय की गई तारीख से पहले शपथ या प्रतिज्ञान किया जाना चाहिए और सदस्यता ली जानी चाहिए। वाराणसी के मामले में इसका मतलब है कि शपथ बुधवार से पहले ली जानी चाहिए थी।

रूल यह है कि शपथ उम्मीदवार द्वारा उसके नामांकन पत्र जमा होने के दौरान ली जाती है और नामांकन पत्र जांच की तारीख पर ऐसा नहीं किया जा सकता है।

इसलिए, आरओ को उम्मीदवार को सलाह देनी चाहिए कि वे अपना नामांकन पत्र पेश करने के तुरंत बाद शपथ लें। हैंडबुक में कहा गया है कि नामांकन पत्र की जांच के लिए अधिसूचित तिथि से एक दिन पहले किसी भी समय ली गई शपथ को समय के भीतर माना जाना चाहिए।

चुनाव आयोग के नियम यह भी कहते हैं कि उम्मीदवार को अधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति में उस फॉर्म पर हस्ताक्षर करना होगा जिस पर शपथ लिखी गई है लेकिन यही काफी नहीं बल्कि उम्मीदवार को अधिकृत व्यक्ति के सामने शपथ भी लेनी होगी।

यह आरओ की ज़िम्मेदारी है कि वह आवेदन करने वाले शख्स को तेज़ आवाज़ में शपथ लेने के लिए कहे। जिसके बाद उसे प्रमाण पत्र दिया जाएगा कि उसने शपथ ली है।

श्याम रंगीला ने क्या आपत्ति जताई?

श्याम रंगीला के मुताबिक जब उन्होंने और अन्य उम्मीदवारों ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल करने की कोशिश की तो उन्हें जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।

नियमों के अनुसार एक समय में केवल एक उम्मीदवार को, जिसके साथ अधिकतम चार लोग हों, नामांकन दाखिल करने की अनुमति है।

चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक नामांकन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्वीकार किए जाते हैं। रंगीला का कहना है कि उनका नामांकन दोपहर 2.58 बजे स्वीकार कर लिया गया था।

उनका कहना है कि तब आरओ ने उन्हें बताया कि एक जरूरी हलफनामा गायब है तब उन्होंने दस्तावेज बनवा लिया और मंगलवार को बाद में जमा कर दिया। श्याम ने कहा कि नामांकन खारिज होने तक आरओ ने उन्हें शपथ की आवश्यकता के बारे में कभी नहीं बताया

नियम के मुताबिक आरओ को नामांकन पत्र प्राप्त होने पर यह जांचना होगा कि फॉर्म के सभी कॉलम भरे हुए हैं या नहीं। यदि उम्मीदवार द्वारा कोई कॉलम खाली छोड़ दिया जाता है, तो रिटर्निंग ऑफिसर उसे चेकलिस्ट में डालेगा रसीद के साथ उम्मीदवार को सौंप देगा। ऐसे मामलों में उम्मीदवार के पास जांच शुरू होने के लिए निर्धारित समय तक सभी प्रकार से पूर्ण नया हलफनामा दाखिल करने का अवसर होगा।

अब श्याम रंगीला के पास क्या ऑप्शन है?

रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन की जांच एक कुछ हद तक एक न्यायिक प्रोसेस ही होता है। इसलिए रिटर्निंग ऑफिसर को पूरी तरह से न्यायिक मर्यादाओं का ख्याल रखना होता है। रिटर्निंग ऑफिसर हैंडबुक में कहा गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर को किसी भी व्यक्तिगत या राजनीतिक पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए। हालांकि यदि कोई उम्मीदवार सोचता है कि आरओ ने अनुचित व्यवहार किया है, तो वह नामांकन की अस्वीकृति को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर कर सकता है।

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