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भारत में कोविशील्ड वैक्सीन लेने वालों को आखिर क्यों नहीं घबराना चाहिए? एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के क्या थे नतीजे

लैंसेट ग्लोबल हेल्थ द्वारा 2022 में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि एस्ट्राजेनेका ने पहली डोज लेने वाले लोगों में प्रति मिलियन 8.1 टीटीएस मामले सामने आए। वहीं दूसरी डोज लेने वालों में यह दर कर होकर प्रति मिलियन 2.3 रह गई।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Kuldeep Singh
नई दिल्ली | Updated: May 01, 2024 09:35 IST
भारत में कोविशील्ड वैक्सीन लेने वालों को आखिर क्यों नहीं घबराना चाहिए  एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के क्या थे नतीजे
एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन से टीटीएस के मामले सामने आए हैं।
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वैक्सीन बनाने वाली ग्लोबल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने यह स्वीकार किया है कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित उसकी कोविड-19 वैक्सीन से खून के थक्के जमने और कम प्लेटलेट काउंट जैसी दुर्लभ बीमारी सामने आई है। इस वैक्सीन को भारत में कोविशील्ड के नाम से बेचा गया है। भारत में इस वैक्सीन का निर्माण पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया। भारत में इस वैक्सीन की करीब 175 करोड़ डोज लोगों को लगाई गई हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में इस वैक्सीन को लेने वाले लोगों को चिंता करने की जरूरत है?

द डेली टेलीग्राफ के मुताबिक एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस) के साथ साइड इफेक्ट की बात स्वीकार की है। दरअसल कंपनी पर टीके लगने के बाद इसके गंभीर नुकसान और मौतों का आरोप लगाने को लेकर केस कर्ज किया गया है। कंपनी ने पहली बार कोर्ट में इसकी बात स्वीकार की है। यूरोप में जब टीटीएस का पहला मामला सामने आया तो कुछ देशों ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के उपयोग को रोक दिया।

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लैंसेट ग्लोबल हेल्थ द्वारा 2022 में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि एस्ट्राजेनेका ने पहली डोज लेने वाले लोगों में प्रति मिलियन 8.1 टीटीएस मामले सामने आए। वहीं दूसरी डोज लेने वालों में यह आंकड़ा प्रति मिलियन 2.3 रह गया। सर्वे से पता चलता है कि टीटीएस के मामले अलग-अलग देशों में अलग थे। सबसे अधिक मामले नॉर्डिक देशों (17.6 प्रति मिलियन खुराक) से और सबसे कम एशियाई देशों (0.2 प्रति मिलियन खुराक) से आए थे।

भारत में लोगों को चिंता करने की जरूरत क्यों नहीं?

भारत में कोरोना वैक्सीन लेने के बाद लोगों में इसके दुष्प्रभाव को लेकर एक सरकारी समिति गठित की गई थी। इस समिति ने टीटीएस से जुड़े कम से कम 37 मामलों की जांच की। इसमें से 18 मामले 2021 से पहले वैक्सीन लेने वाले लोगों से जुड़े थे। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय देशों में महामारी की शुरुआत में ही टीटीएस की सूचना मिली थी लेकिन भारत में यह बहुत दुर्लभ था। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी जो टीकाकरण अभियान पर चर्चा का हिस्सा थे, का कहना है कि टीटीएस एक बहुत ही दुर्लभ दुष्प्रभाव है। यह यूरोपीय लोगों की तुलना में भारतीयों और दक्षिण एशियाई लोगों में अभी भी दुर्लभ है। इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि वैक्सीन ने लोगों की जिंदगियां बचाई हैं। इसे में इसके लाभ टीटीएस के मामलों से कहीं अधिक हैं।

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वैक्सीन लेने के बाद अगले कुछ सप्ताह अहम

अधिकारी के मुताबिक टीटीएस से जुड़े मामले पहली डोज के कुछ सप्ताह में ही अधिक सामने आते हैं। अधिकांश भारतीयों को पहले ही तीन शॉट लग चुके हैं और काफी समय हो गया है। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में ग्लोबल हेल्थ डायरेक्टर और कोविड-19 टीकों के लिए डब्ल्यूएचओ की सुरक्षा सलाहकार समिति सदस्य डॉ. गगनदीप कांग ने कहा कि लोगों को आश्वस्त करना सबसे जरूरी है कि टीकाकरण के तुरंत बाद टीटीएस का खतरा होता है। भारत में सभी का टीकाकरण बहुत पहले ही हो चुका है।

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Story by Anonna Dutta

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