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TMC में होगा नेतृत्व परिवर्तन? अभिषेक बनर्जी के लिए तैयार हो रही सियासी पिच ने ममता की बढ़ाई टेंशन

Mamata vs Abhishek: टीएमसी नेता घोष ने कहा कि प्रवक्ता का काम पार्टी के गलत फैसले को भी सही बताकर उसका बचाव करना है, लेकिन अगर एक ही गलती बार-बार दोहराई जाए तो ये मुश्किल हो जाता है।
Written by: शांतनु चौधरी
Updated: November 26, 2023 21:12 IST
tmc में होगा नेतृत्व परिवर्तन  अभिषेक बनर्जी के लिए तैयार हो रही सियासी पिच ने ममता की बढ़ाई टेंशन
Mamata vs Abhishek: टीएमसी में भी अब नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कलह सामने आने लगी है। (एक्सप्रेस फाइल)
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Mamata vs Abhishek: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में पुराने नेताओं और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। जिसे सत्ता संघर्ष और नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने शुक्रवार से एक दिन पहले नेताजी इंडोर स्टेडियम में पार्टी की बैठक में टीएमसी के नंबर दो अभिषेक बनर्जी की तस्वीर नहीं लगाए जाने पर बात की।

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टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष, जो ममता के भतीजे अभिषेक के करीबी सहयोगी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह "पुराने और नए" के बीच की लड़ाई नहीं थी। उन्होंने कहा, “मैं यह बिल्कुल स्पष्ट कर दूं कि यह पुराने और नए के बीच कोई लड़ाई नहीं है। यह ममता बनर्जी बनाम अभिषेक बनर्जी के बारे में नहीं है, क्योंकि वे एक टीम हैं। पार्टी को इन दोनों की जरूरत है।

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हालांकि, मुझे लगता है कि टीएमसी का कोई भी बड़ा कार्यक्रम अभिषेक बनर्जी के बिना नहीं हो सकता। चूंकि वह अपने स्वास्थ्य के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके, इसलिए उनकी तस्वीर को वहां पर रखा जाना चाहिए था।

घोष ने कहा, 'अभिषेक बनर्जी की मौजूदगी या उनकी तस्वीर के बिना मंच अधूरा था। उन्होंने पार्टी के लिए बहुत त्याग किया है और खुद को उस मुकाम पर पहुंचाया है जहां अब उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वह पार्टी के लिए जरूरी हैं।'

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को नेताजी इंडोर स्टेडियम की बैठक में कहा था कि पार्टी के वरिष्ठों को उचित महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आपको सभी को अपने साथ लेकर चलना होगा। चाहे वे पुराने लोग हों, नए लोग हों या वे लोग भी हों जो हमसे जुड़ना चाहते हैं। यदि उनकी अच्छी इमेज है को आपको उन्हें शामिल करने पर विचार करना चाहिए।'

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'वरिष्ठों के तय करना है कि वो संन्यास कब लेंगे'

ममता बनर्जी के बयान का जिक्र करते हुए घोष ने कहा, 'हमारी पार्टी सुप्रीमो ने जो कहा वह सही है। सीनियर को पर्याप्त सम्मान देना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पदों पर बने रहेंगे और जूनियर वर्षों तक संघर्ष करते रहेंगे। यह वरिष्ठों को तय करना है कि वे कब संन्यास लेंगे।

उन्होंने कहा कि जो सांसद बुजुर्ग हैं या उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं हैं। उन्हें सांसद और विधायक बनने के बजाय पार्टी कार्यालय में बैठकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने के बारे में सोचना चाहिए।'

टीएमसी प्रवक्ता ने भाजपा को रैली आयोजित करने से रोकने के लिए अपनी ही सरकार पर कटाक्ष किया, जिससे विपक्षी पार्टी को काफी प्रचार मिल रहा है। घोष ने कहा कि कुछ नेताओं का अति आत्मविश्वास पार्टी की सार्वजनिक छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

बता दें, कलकत्ता हाई कोर्ट ने भाजपा को 29 नवंबर को उस स्थान पर रैली आयोजित करने की अनुमति दी है, जहां टीएमसी 21 जुलाई को अपनी वार्षिक शहीद दिवस रैली आयोजित करती है।

घोष ने कहा, 'अगर वही गलती दोबारा दोहराई जाती है, तो पार्टी प्रवक्ता के रूप में उनके लिए ऐसे कदमों को उचित ठहराना असंभव हो जाता है। टीएमसी नेता ने कहा कि प्रवक्ता का काम पार्टी के गलत फैसले को भी सही बताकर उसका बचाव करना है, लेकिन अगर एक ही गलती बार-बार दोहराई जाए तो ये मुश्किल हो जाता है। मैं उस स्थान पर रैलियां आयोजित करने के अपनी पार्टी के अधिकार में विश्वास करता हूं, लेकिन अन्य राजनीतिक दलों के भी ऐसा करने का अधिकार मानता हूं।'

पार्टी में तनाव की पिछली वजह-

अभिषेक के नेतृत्व वाली टीएमसी की नई पीढ़ी और पुराने समय के लोगों के बीच तनाव है। जिनमें से अधिकांश ममता बनर्जी के पुराने लेफ्टिनेंट हैं। जब से पार्टी 2021 में बंगाल में सत्ता में वापस आई है। उस चुनाव ने अभिषेक के उदय को चिह्नित किया और अंदर ही अंदर तनाव पैदा कर दिया।

निकाय चुनावों से पहले उम्मीदवारों की सूची को लेकर दरार बढ़ गई। दो उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद यह झगड़ा सामने आया। 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के भाजपा से हारने के बाद अभिषेक के समर्थन से I-PAC टीएमसी की चुनावी रणनीति में शामिल हो गई। यह भी कहा जाता है कि कथित स्कूल नौकरियों घोटाले में गिरफ्तारी के नौ दिनों के भीतर वरिष्ठ नेता और तत्कालीन मंत्री पार्थ चटर्जी को राज्य मंत्रिमंडल से हटाने और पार्टी के पदों से वंचित करने के पार्टी के त्वरित कदम के पीछे अभिषेक का ही हाथ था।

इस साल की शुरुआत में कोलकाता के मेयर और राज्य मंत्री फिरहाद हकीम को ममता के भतीजे अभिषेक के हस्तक्षेप के बाद शहर में पार्किंग शुल्क बढ़ाने के फैसले को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा था। माना जाता है कि हकीम के अभिषेक के साथ तनावपूर्ण संबंध थे।

सत्ता संघर्ष?

साथी टीएमसी प्रवक्ता समीर चट्टोपाध्याय ने घोष की टिप्पणी पर कहा, 'कुणाल घोष ने पार्टी के खिलाफ नहीं बोला है। उन्होंने इस पर अपनी राय दी है कि क्या किया जा सकता था। यह उनकी निजी राय है। टीएमसी में ममता बनर्जी ही सबकुछ हैं। अभिषेक बनर्जी उनके भरोसेमंद लेफ्टिनेंट हैं।

टीएमसी नेता की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा, “लड़ाई से यह स्पष्ट है कि टीएमसी खुद टीएमसी को नीचे लाएगी। बाहर देखें तो उन जिलों में भी अंदरूनी कलह है, जहां टीएमसी खुद टीएमसी को खत्म कर रही है। टीएमसी के भीतर कलह हर दिन खुलकर सामने आ रही है।

कांग्रेस नेता मनोज चक्रवर्ती ने कहा, ''उन्हें सीपीआई (एम) के बारे में सोचने की ज़रूरत नहीं है. सीपीआई (एम) की स्थिति बेहतर है। उनकी (घोष) पार्टी अव्यवस्थित है। सत्ता संघर्ष चल रहा है। कुणाल घोष को अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए।

वरिष्ठ सीपीआई (एम) नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि घोष ने सही बात कही है। पूर्व सांसद ने कहा, “टीएमसी के भीतर स्पष्ट रूप से सत्ता संघर्ष है, जो अब जनता के सामने आ रहा है।”

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