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यूक्रेन को इस साल रूस के हाथों हार का करना पड़ सकता है सामना

पिछले साल यूक्रेन का जवाबी हमला रूसियों को उनके कब्जे वाली जमीन से उखाड़ फेंकने में विफल रहा था। अब रूस गर्मियों में हमले की तैयारी कर रहा है। यह हमला कैसा नजर आएगा और इसके संभावित रणनीतिक उद्देश्य क्या है ये आने वाला वक्त बताएगा।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: April 16, 2024 14:09 IST
यूक्रेन को इस साल रूस के हाथों हार का करना पड़ सकता है सामना
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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ब्रिटेन के एक पूर्व कमांडर ने कहा है कि यूक्रेन को इस साल रूस के हाथों हार का सामना करना पड़ सकता है। जनरल सर रिचर्ड बैरंस ने कहा कि इस साल यूक्रेन के युद्ध हारने का गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि यूक्रेन को यह लग सकता है कि वह जीत नहीं सकता है। हालांकि यूक्रेन अभी उस बिंदु पर नहीं पहुंचा है, लेकिन उसकी सेनाओं के पास गोला-बारूद, सैनिकों और हवाई सुरक्षा की बेहद कमी है। पिछले साल यूक्रेन का जवाबी हमला रूसियों को उनके कब्जे वाली जमीन से उखाड़ फेंकने में विफल रहा था। अब रूस गर्मियों में हमले की तैयारी कर रहा है। यह हमला कैसा नजर आएगा और इसके संभावित रणनीतिक उद्देश्य क्या हैं?

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जनरल बैरंस कहते हैं, रूसी हमले का जो स्वरूप होने वाला है, वह बिल्कुल साफ है। वे कहते हैं, हम देख रहे हैं कि रूस अग्रिम पंक्ति पर लड़ रहा है। तोपखाने और गोला-बारूद के मामले में उसे पांच के बदले एक का फायदा है। वह नए हथियारों से लड़ने के लिए अतिरिक्त लड़ाकों का इस्तेमाल कर रहा है। इनमें एफएबी ग्लाइड बम भी शामिल है। यह सोवियत युग का बम है, इसे गूंगा बम भी कहा जाता है।

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इसमें पंख, जीपीएस और 1,500 किलोग्राम विस्फोटक लगा होता है। यह बम यूक्रेनी सुरक्षाबलों पर कहर बरपा रहा है। जनरल बैरंस कहते हैं, इस साल गर्मी के मौसम में किसी समय हम एक बड़ा रूसी हमला देख सकते हैं। उसका इरादा छोटे-छोटे फायदे के साथ आगे बढ़ने की जगह अधिक बड़ा हमला कर यूक्रेनी रक्षा पंक्ति को तोड़ने की कोशिश करना है। पूर्व कमांडर का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो रूसी सेना यूक्रेन के उन इलाकों में घुसने का जोखिम उठाएगी, जहां यूक्रेनी सशस्त्र बल उन्हें रोक नहीं सकते हैं।

पिछले साल रूस को इस बात का ठीक-ठीक अंदाजा था कि यूक्रेन पर कहां-कहां हमला करने की संभावना है। डाक्टर जैक वाटलिंग वाइट हाल थिंकटैंक द रायल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट में जमीनी युद्ध के शोधकर्ता हैं। वे कहते हैं, यूक्रेनियों के सामने एक चुनौती यह है कि रूसी यह चुन सकते हैं कि उन्हें अपनी सेना तैनात कहां करनी है। वे कहते हैं कि यह एक बहुत लंबी अग्रिम पंक्ति है। यूक्रेन को इसकी रक्षा करने में सक्षम होने की जरूरत है, लेकिन वे निश्चित तौर पर ऐसा नहीं कर सकते।

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वाटलिंग कहते हैं कि यूक्रेन की सेना अपनी जमीन खो देगी, लेकिन सवाल यह है कि इससे कहां की और कितनी जनसंख्या प्रभावित होने वाली है। यह बहुत संभव है कि रूस के जनरल स्टाफ ने अभी यह तय न किया हो कि उन्हें किस दिशा को अपनी कोशिशों के लिए मुख्य रूप में चुनना है, लेकिन मोटे तौर पर उनके सामने मौजूद अलग-अलग विकल्पों को तीन जगहों में बांटा जा सकता है। पहला खारकीएव, दूसरा डोनबास और तीसरा जापोरिजिया।

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