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टाइगर जिंदा है! बंगाल के बक्सा रिजर्व से आई गुड न्यूज, कैमरे में दिखी सुखद तस्वीर

टाइगर जिंदा है... जी हां नए साल में पश्चिम बंगाल के बक्सा नेशनल पार्क से खुशखबरी है। नेशनल पार्क में लगे सीसीटीवी में एक बाघ को नदी के पास देखा गया। पढ़िए Ravik Bhattacharya की पूरी रिपोर्ट।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
कोलकाता | Updated: January 04, 2024 10:54 IST
टाइगर जिंदा है  बंगाल के बक्सा रिजर्व से आई गुड न्यूज  कैमरे में दिखी सुखद तस्वीर
नेशनल पार्क में दिखा गायब हुआ टाइगर। (Express)
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टाइगर जिंदा है… जी हां नए साल में पश्चिम बंगाल के बक्सा नेशनल पार्क से खुशखबरी है। दरअसल, 28 दिसंबर को वनअधिकारियों को एक तोहफा मिला है। नेशनल पार्क में लगे सीसीटीवी कैमरे में एक बाघ को नदी के पास देखा गया। असल में यह बाघ 12 दिसंबर, 2021 को 23 साल टाइगर अचानक कहीं गायब हो गया था। जिससे वन अधिकारी निराश हो गए थे। हालांकि टाइगर को अब दोबारा देखा गया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि अब यह हमेशा के लिए पार्क में लौट आया है। अब इसे दोबारा से रिलोकेट किया जा सकता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, बक्सा टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क 760 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह उत्तरी बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में है। इसकी उत्तरी सीमा भूटान की सीमा के साथ जुड़ी हुई है। नेशनल पार्क संरक्षण प्राधिकरण के अनुसार, रिज़र्व की उत्तर में भूटान के जंगलों के साथ सीमा की दूसरी तरफ कनेक्टिविटी है। यह पूर्व में कोचुगांव के जंगलों और मानस टाइगर रिजर्व के साथ जुड़ा हुआ है। इसके अलावा यह पार्क पश्चिम में जलदापारा राष्ट्रीय उद्यान के साथ कनेक्टेड है।

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पहले सीसीटीवी फुटेज से लगा कि कोई बड़ी बिल्ली है

रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी में फुटेज देखने पर पहले लगा कि नदी के पास कोई बड़ी बिल्ली है। हालांकि क्लोजअप करने के बाद समझ आ गया कि यह वही टाइगर है जो दो 2021 में कहीं गायब हो गया था।

टाइगर के मिलने पर बक्सा टाइगर रिजर्व के फील्ड निदेशक अपूर्बा सेन ने कहा "यह सच में एक सकारात्मक विकास है। कुछ दिनों पहले ही हम लोगों के हस्तक्षेप को कम करने, घास के मैदान को बढ़ाने और साथ-साथ शिकार के आधार को बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। हम यहां बाघों के लिए एक आदर्श आवास बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” सेन ने आगे कहा कि हम इसकी जांच कर रहे हैं कि क्या वाकई में यह वही टाइगर है जो 2021 में गायब हो गया था।

विशेषज्ञों के अनुसार, बक्सा एक "कम घनत्व" रिजर्व है जो एक बड़े टाइगर एरिया का हिस्सा है। यह भूटान तक फैला हुआ है। "पिछले साल हम 200 चीतल (चित्तीदार हिरण लेकर आए थे। पिछले तीन-चार सालों में ऐसे 900 हिरणों को शिकार के लिए लाया गया। हम हर साल लगभग 70 हेक्टेयर घास के मैदान को बढ़ाने और पानी के गड्ढे बनाने में कामयाब हुए हैं।"

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वहीं उत्तर बंगाल के अतिरिक्त मुख्य वन संरक्षक, उज्जल घोष ने कहा कि हम जंगल के मुख्य क्षेत्र से कुछ गावों को स्थानांतरित करने की प्लानिंग कर रहे हैं। ताकि नेशनल पार्क में लोगों का हस्तक्षेप कम हो।

9 बाघों को लाने की है योजना

भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक के रमेश ने बताया कि टाइगर हमेशा नए आवास क्षेत्र की खोज करते हैं। भूटान और बक्सा के बीच कनेक्टिविटी है। एक बार बक्सा में लोगों का काफी हस्क्षेप था। लोग अवैध शिकार करने जंगलों में आते थे। हालांकि अब यह काफी हद तक कम हो गया है। उम्मीद है कि बक्सा में अब अधिक टाइगर आएंगे। हो सकता है कि वे इस एरिया को अपना घर बना लें। उन्होंने आगे कहा कि बाहर ने 9 बाघों को लाने की भी प्लानिंग है। फिलहाल यह सभी के लिए खुशखबरी है कि गुम हुआ टाइगर दोबारा लौट आया है।

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