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'हम चुनाव को कंट्रोल नहीं कर सकते…', सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, EC ने दूर किया वीवीपैट को लेकर कंफ्यूजन

सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम और वीवीपैट को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं में कहा कि हम सिर्फ संदेह के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से याचिका दाखिल की गई थी।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: April 24, 2024 16:25 IST
 हम चुनाव को कंट्रोल नहीं कर सकते…   सुप्रीम कोर्ट की दो टूक  ec ने दूर किया वीवीपैट को लेकर कंफ्यूजन
सुप्रीम कोर्ट। (फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम में डाले गए वोट का पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) के साथ मिलान करने को लेकर दाखिल याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में चुनाव आयोग के कामकाम को निर्देशित नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग देश में चुनाव कराने के लिए कंट्रोलिंग अथॉरिटी है। संवैधानिक प्राधिकरण के कामकाज में सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

संदेह के आधार पर नहीं दे सकते फैसला- कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि हम संदेह के आधार पर कोई फैसला नहीं दे सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा था कि उसे कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि ईवीएम को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से जो उत्तर दिए गए हैं उनमें कुछ भ्रम है। सुनवाई के दौरान पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एश्वर्या भाटी से कहा, “हम गलत साबित नहीं होना चाहते, बल्कि अपने निष्कर्षों को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहते हैं और इसलिए हमने स्पष्टीकरण मांगने का सोचा।”

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कोर्ट ने क्या सवाल उठाए?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान वीवीपैट को लेकर कई सवाल उठाए गए। जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता की बेंच ने सवाल किए हैं कि क्या वीवीपैट की कंट्रोलिंग यूनिट में माइक्रोकंट्रोलर लगा हुआ है। क्या किसी प्रोग्राम को माइक्रोकंट्रोलर में केवल एक बार ही फीड किया जा सकता है? आयोग के पास कितने सिंबल लोडिंग इकाइयां मौजूद हैं? चुनाव याचिका दायर करने की सीमा अवधि आपके अनुसार 30 दिन है और स्टोरेज और रिकॉर्ड 45 दिनों तक बनाए रखा जाता है। लेकिन लिमिटेशन डे 45 दिन है, आपको इसे सही करना होगा।

याचिका में क्या दिया गया दावा

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की गई कि ईवीएम में डाले जाने वाले वोट का सौ फीसदी वीवीपैट मशीन के साथ क्रॉस वेरिफिकेशन कराया जाए, ताकि मतदाता को पता चल सके कि उसने सही वोट दिया है। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि दो सरकारी कंपनियों भारत इलेक्ट्रोनिक लिमिटेड और इलेक्ट्रोनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के निदेशक भाजपा से जुड़े हुए हैं। एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि 2019 के आम चुनाव के बाद एक संसदीय समिति ने ईवीएम में गड़बड़ी पाई थी, लेकिन चुनाव आयोग ने अभी तक उसे लेकर कोई जवाब नहीं दिया है।

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