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तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, जानें संसद से बने कानून का पालन करने के लिए क्यों कहा

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी के पास मनी लॉड्रिंग के तहत रेत खनन की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: February 27, 2024 11:57 IST
तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नाराज  जानें संसद से बने कानून का पालन करने के लिए क्यों कहा
केंद्रीय जांच एजेंसी ने अवैध रेत खनन मामले की जांच के सिलसिले में वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली, करूर, तंजावुर और अरियालुर के जिला कलेक्टरों को तलब किया था। (Express file photo)
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मनी लॉड्रिंग केस में जिला कलेक्टरों को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करने के सवाल पर तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दिया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि राज्य को संसद द्वारा बनाए गए कानून का पालन करना होगा। अदालत ने कहा, "आपके अधिकारियों को यह पता लगाने में ईडी की मदद करनी चाहिए कि क्या मामले में कोई अपराध है।"

राज्य सरकार ने कहा- अपराध साबित होने पर ही एजेंसी जांच करे

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मदनलाल चौधरी के फैसले सहित विभिन्न फैसलों में कहा गया है कि अपराध स्थापित होने पर ही केंद्रीय जांच एजेंसी देश में कहीं भी किसी भी आरोपी के खिलाफ मामले की जांच कर सकती है। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस पंकज मिथल की पीठ के सामने कपिल सिब्बल ने कहा, "हमने कोई अपराध नहीं किया है। यह ईडी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है कि वह अधिकारी से अमुक के मामलों की जानकारी मांगें। यह कहने का कोई कानूनी आधार नहीं है कि राज्य सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर नहीं कर सकता है।"

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कपिल सिब्बल ने पूछा- क्या कलेक्टर राज्य का हिस्सा नहीं है

सिब्बल ने यह भी कहा कि कलेक्टर व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि उसके प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहे हैं। "क्या एक जिला कलेक्टर राज्य का हिस्सा नहीं है? निजी रूप में कलेक्टरों से जानकारी नहीं मांगी गई थी। राज्य सरकार ईडी के एक आदेश से आहत है जिसमें राज्य के एक प्राधिकारी से जानकारी मांगी गई है। एजेंसी ने चार जिलों के चार कलेक्टरों से कहा है कि जो भी जानकारी मांगी गई है, उसे उपलब्ध कराएं। सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, "एजेंसी ने हमसे जो भी जानकारी मांगी गई है उसे देने के लिए कहा है। इसलिए हम आहत हैं और इस तरह हम निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं।"

उन्होंने दृढ़ता से कहा कि ईडी के पास मनी लॉड्रिंग के तहत रेत खनन की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। सिब्बल की दलीलों का विरोध करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने शीर्ष अदालत से कहा कि जांच एजेंसी जांच करने की हकदार है। उन्होंने कहा कि राज्य जांच को रोक रहा है और आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने पर तमिलनाडु सरकार से सवाल किया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अवैध रेत खनन मामले की जांच के सिलसिले में वेल्लोर, तिरुचिरापल्ली, करूर, तंजावुर और अरियालुर के जिला कलेक्टरों को तलब किया था।

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राज्य सरकार ने अधिकारियों के साथ मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी समन पर रोक लगा दी थी। एजेंसी ने आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “राज्य यह रिट याचिका कैसे दायर कर सकता है? किस कानून के तहत? आप हमें इस बात पर संतुष्ट करें कि राज्य की इसमें क्या रुचि है और वह प्रवर्तन निदेशालय के खिलाफ यह रिट याचिका कैसे दायर कर सकता है।''

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