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सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर: जुगलबंदी अपनी अपनी

एक बहस में विपक्ष के हमदर्द विश्लेषक ने चेताया कि प्रधानमंत्री पर जितना ‘हमला’ करते हैं, वे उसे अपने फायदे में ‘इस्तेमाल’ कर लेते हैं! सच! ‘मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम..!’
Written by: सुधीश पचौरी | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: March 10, 2024 09:32 IST
सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर  जुगलबंदी अपनी अपनी
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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एक दिन एक दक्षिणी राज्य की विधानसभा में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ हो गया। कई दिनों तक कहा जाता रहा कि ऐसा नहीं हुआ। फिर जब माने तो कहने लगे कि हो गया सो हो गया! इन दिनों हर एक के पास अपनी-अपनी निर्लज्जता का बचाव है। आपका कम है कि निर्लज्जता को उतने ही निर्लज्ज बनकर नापते रहें।

फिर एक दिन इसी राज्य से एक रेस्तरां में एक ‘विस्फोट’ की खबर आती है। कई घायल होते हैं। सीसी टीवी के टुकड़े दिखाते चैनल चर्चा कराते हैं कि ‘आइईडी’ विस्फोट को करने वाला ‘संदिग्ध’ व्यक्ति चेहरे पर मास्क, सिर पर टोपी लगाए सड़क, बस में आ/जा रहा है। कई चैनलों में चर्चा रही कि उक्त राज्य में एक के बाद एक ऐसा क्यों हो रहा है। बहरहाल, जांच जारी है।

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‘सूचियों’ का सीजन है। भाजपा 195 उम्मीदवारों की पहली सूची दे देती है। भाजपा प्रवक्ता ‘यशस्वी प्रधनमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में सबका साथ सबका विकास मंत्र’ के साथ बनाई गई सूची को सभी जातियों/समूहों का प्रतिनिधत्वि करने वाला बताते हैं। वे भाजपा को 370 और राजग को ‘चार सौ पार’ करने वाला बताते हैं।

बाल की खाल निकालता एक चर्चक कहता है कि अगर भाजपा 370 पर लड़ेगी, तो बाकी तीस में किस-किस मित्र दल को कितना देगी? वे तो बहुत सारी सीटें मांग रहे हैं! इस पर भाजपा प्रवक्ता आश्वस्त करता है कि बातचीत जारी है, सब निपट जाएगा… कि झटका लगता है। सूची में नामित पवन सिंह चुनाव लड़ने से मना कर देते हैं। एक चैनल बताता है कि स्त्रियों को लेकर भोजपुरी गायक पवन सिंह के विचार ही उनके दुश्मन बने। इसे देख ‘संदेशखाली’ के आरोपितों की पार्टी तुरंत हमलावर हो कह उठती है कि ‘ये है बंगाल की ताकत!’

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एक विपक्षी प्रवक्ता का कटाक्ष आता है कि पवन व उपेंद्र राउत, दोनों के वीडियो ने इनको ‘एक्सपोज’ किया… एक दिन गुजरात के एक बडे कांग्रेसी नेता पार्टी की ‘मंदिर विमुखता’ और ‘जनता विमुखता’ को लेकर इस्तीफा दे देते हैं। फिर खबर आती है कि तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक ने भी इस्तीफा दिया! इस ‘टूट-फूट’ के चलते ‘आप’ का दिल्ली की महिलाओं को एक हजार रुपए महीने का एलान तक चर्चा का विषय नहीं बनता!

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बहरहाल, सप्ताह का सबसे चर्चित नारा रहा ‘मोदी मेरा परिवार’ का नारा! पटना रैली में लालू ने जैसे ही मोदी पर निशाना साधा कि इनका परिवार नहीं, बच्चे नहीं, ये हिंदू भी नहीं आदि। फिर एक बड़े विपक्षी नेता का कहना कि मोदी का परिवार अडाणी है। यों ही मोदी ने जवाबी हमला किया कि वे कहते हैं कि मेरा परिवार नहीं है। मेरा परिवार देश की एक सौ चालीस करोड़ जनता है… भारत है..!

देखते-देखते भाजपा के सभी नेताओं ने अपने ‘एक्स’ खाते पर अपना ‘बायो’ बदलकर लिखना शुरू कर दिया: ‘मोदी मेरा परिवार…’ और इसे ही एंकरों ने लपक लिया। वे बताते रहे कि एक विपक्षी नेता ने पहले कहा कि ‘चायवाला’ तो मोदी ने उसे ही अपना हथियार बनाकर चला दिया और यूपीए को ढेर कर दिया। एक बहस में विपक्ष के हमदर्द विश्लेषक ने चेताया कि प्रधानमंत्री पर जितना ‘हमला’ करते हैं, वे उसे अपने फायदे में ‘इस्तेमाल’ कर लेते हैं!

सच! ‘मूरख हृदय न चेत जो गुरु मिलहिं बिरंचि सम..!’ फिर भी, एक विपक्षी नेता युवाओं को कुछ इस तरह प्रबोधते दिखे कि मोदी चाहते हैं कि तुम मोबाइल चलाते रहो। मोदी चाहते हैं कि राम नाम जपते रहो और भूखे मर जाओ। ऐसी ही एक ‘जुगलबंदी’ में विपक्षी दल के एक नेता दूर की कौड़ी लाए कि शुरू में अयोध्या के राममंदिर में हर दिन लाखों दर्शनार्थी आए, लेकिन अब दो चार हजार ही आते हैं तो एक अंग्रेजी एंकर ने तथ्य देकर उनको निरुत्तर किया कि मंदिर रिकार्ड के अनुसार एक महीने में 60 लाख दर्शनार्थी आए। प्रतिदिन दो लाख आए और 25 करोड़ का चंदा आया है। बाकी आनलाइन चंदा अलग है।

फिर एक दिन खबर आई कि तमिलनाडु सरकार के मंत्री उदयनिधि के ‘सनातन…डेंगू मलेरिया’ वाले बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा है कि आप कोई मामूली आदमी नहीं, मंत्री हैं। क्या आप ऐस कथनों का परिणाम नहीं जानते? इतने पर भी एक अन्य दाक्षिणात्य नेता ने फिर एक ‘हेट स्पीच’ दी कि आपका जय श्रीराम ‘बकवास’ है… आप हमें राम के दुश्मन कहो… तमिलनाडु राम को स्वीकार नहीं करेगा!

इस पर जब एक एंकर ने चेताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे वक्तव्यों को लेकर फटकार लगाई है… तो भी कहीं कोई अफसोस नहीं दिखा। उल्टे एक ‘इंडी’ नेता बोलते दिखे कि राम मंदिर अपवित्र है, किसी को भी राम मंदिर नहीं जाना चाहिए। एक अन्य दक्षिणी नेता ने भी कह दिया इंडिया एक राष्ट्र नहीं,राज्यों का संघ है।

आखिर रिपब्लिक टीआरपी का मुकदमा जीता। अर्णव ने उचित ही अदालत, वकीलों और अपनी टीम को जम के बधाई दी, लेकिन अफसोस कि बाकी चैनल चुप ही लगाए रहे। चलते चलते: सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष के एक बड़े नेता को (शायद उनके ‘पनौती उवाच’ पर) चेताया कि संभल कर बोलें..!

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