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सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर: कभी अर्श पर कभी फर्श पर

फिर एक दिन एक बड़ी विपक्षी पार्टी के नेताओं के संवाददाता सम्मेलन में ‘शिकायत’ कि ऐन चुनावों के बीच आयकर विभाग ने हमारी पार्टी के खाते ‘फ्रीज’ किए हैं। यह लोकतंत्र पर हमला है... ट्रेन तक के पैसे नहीं हैं..!
Written by: सुधीश पचौरी | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: March 24, 2024 12:19 IST
सुधीश पचौरी का कॉलम बाखबर  कभी अर्श पर कभी फर्श पर
राजीव कुमार। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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एक दिन चुनाव आयुक्त ने संवाददाता सम्मेलन के शुरू में ही ‘ईवीएम’ के निंदकों को एक शेर से नवाजा कि ‘अधूरी हसरतों का इल्जाम हम पर लगाना ठीक नहीं…’ और फिर कुल सात चरणों में लोकसभा चुनाव कराने की घोषणा करके बहुत से दलों के दिलों को तोड़ दिया… हाय, चुनाव बयालीस दिनों तक क्यों फैलाया? एक चर्चक बोले कि तीन दिन में कर सकते थे, दूसरे कहे कि हमारे प्यारे राज्य में तो एक दिन में ही हो जाता… और फिर वही आरोप कि ये चुनाव आयोग भी सरकार के इशारों पर काम कर रहा लगता है… कि लोकतंत्र खतरे में है! इस सप्ताह हर दिन लोकतंत्र खतरे में आता रहा!

एक चैनल के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का संबोधन और लगभग हर वाक्य पर ताली और कई बार नारे लगे! मैं आपके अगले कार्यक्रम में भी आऊंगा… और ताली पर ताली। फिर चैनल के एक शो को लेकर मोदी का अचानक कह उठना कि ये ही ‘मूड आफ नेशन’ है… और ताली… मैं 2024 के लिए लगा हुआ हूं… और ताली…!

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इसी बीच विपक्ष के एक बड़े नेता ने अपने मौलिक अंदाज में कह डाला कि हिंदू धर्म में एक शब्द ‘शक्ति’ है… हम उस शक्ति से लड़ रहे हैं। उनके इस मौलिक विमर्श पर जब मार पड़ी तो पैरोकार कहने लगे कि उनका मतलब ‘मोदी की शक्ति’ से था। ऐसी ढीली गेंद को प्रधानमंत्री कहां छोड़ने वाले थे। इसलिए तुरंत दक्षिण की एक जनसभा में उन्होंने जवाब दिया, मैं भारतमाता का पुजारी हूं।

जिन्होंने कल शक्ति को खत्म करने की बात की है, मैं चुनौती कबूल करता हूं। शक्ति की पूजा के लिए मैं जीवन खपा दूंगा। हिंदुस्तान शक्ति की आराधना करता है। फिर जनता से कहा कि क्या आप शक्ति के विनाश का मौका देंगे! एक ओर शक्ति के विनाश करने वाले लोग हैं, दूसरी ओर शक्ति के पुजारी हैं, इसका मुकाबला चार जून को हो जाएगा। यहां हर वाक्य पर ताली थी और नारे थे।

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इसके आगे की चर्चा और भी मनोरंजक थी। कुछ प्रवक्ता ‘कच्चे शक्ति विमर्श’ को अर्थाए जाते थे कि उनका मतलब ये नहीं था, वो नहीं था। अरे भाई अगर किसी बात को बार-बार अर्थाना पड़े तो वैसा बोला क्यों? एक अन्य चर्चक ने कहा कि भाषा के मामले में उनका हाथ तंग लगता है। फिर एक हमदर्द पत्रकार ने कहा कि यह उनके ‘आ बैल मुझे मार’ वाला मामला है। भाजपा तो इसे लपकती ही। उनका भाषण लिखने वालों को पहले सोचना चाहिए कि उनको क्या बोलना है, क्या नहीं। एक चैनल ने तो यहां तक लिखा कि यह ‘इंडी’ का ‘पैथोलाजिकल नजरिया’ है। एक चर्चक बोला कि यह इनकी ‘हताशा’ है।

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फिर एक शाम अन्य अंग्रेजी चैनल का कार्यक्रम और प्रधानमंत्री का फिर एक संबोधन कि पिछली बार आपके कार्यक्रम से निकला था तो बालाकोट में ‘एअर स्ट्राइक’ की थी। एक वह दिन था और एक आज का दिन है। सबने ‘राइजिंग भारत’ का अनुभव किया है। एक सुरक्षित राष्ट्र ही विकसित राष्ट्र का आधार होता है। यही ‘राइजिंग भारत’ है… चुनाव का मौसम है..।

विरोधी नए कीर्तिमान बना रहे हैं। इसके बावजूद दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव जारी है। आज भारत का आत्मविश्वास ऊंचा है, जिसे हर भारतीय महसूस करता है। हमने पच्चीस करोड़ लोग गरीबी से निकाले हैं। ये ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीयत है। नीयत सही तो काम सही। जिसे किसी ने नहीं पूछा, उसे मोदी ने पूजा। जिसकी कोई गारंटी नहीं, उसकी गारंटी मोदी लेता है। अभी और आगे जाना है।… हर वाक्य पर ताली पर ताली।

फिर एक दिन एक बड़ी विपक्षी पार्टी के नेताओं के संवाददाता सम्मेलन में ‘शिकायत’ कि ऐन चुनावों के बीच आयकर विभाग ने हमारी पार्टी के खाते ‘फ्रीज’ किए हैं। यह लोकतंत्र पर हमला है… ट्रेन तक के पैसे नहीं हैं..! ऐसी कुघड़ी में भी सत्ता प्रवक्ताओं को दया न आई। वे कोंचते रहे कि वक्त से आयकर नहीं दोगे तो यही होगा। जब भी ऐसा होता है, तभी ये कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है।

गुरुवार की शाम केजरीवाल के लिए आफत आई। हाई कोर्ट ने राहत न दी। अवसर देख ‘ईडी’ ने पुलिस बल के साथ उनके आवास को घेरा। उनके कुछ दस्तावेज और कंप्यूटर जब्त कर रात के नौ बजे उनको गिरफ्तार करके दफ्तर ले गई। आप प्रवक्ता विरोध करते रहे कि यह लोकतंत्र का गला घोंटना है, कि मोदी को सबसे बड़ी चुनौती केजरीवाल से थी।

केजरीवाल व्यक्ति नहीं एक विचार हैं। विचार को कभी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। करोगे तो सैकड़ों केजरीवाल पैदा होंगे। यह मन को समझाना था। एक भाजपा नेता ने सीधे चोट की: जैसा करोगे वैसा भरोगे। केजरीवाल के तेज ‘उत्थान पतन’ को देख ये पंक्तियांं याद आती रहीं: कभी अर्श पर कभी फर्श…गमे-आशिकी तेरा शुक्रिया मैं कहां-कहां से गुजर गया…!

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