scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

आबादी असंतुलित होने से बिगड़ रहा सामाजिक ताना-बाना

विकसित देशों में प्रजनन दर लगातार कम हो रही है, जिससे युवाओं की तादाद कम और बुजुर्गों की बढ़ रही है। यानी जन्म और मृत्यु दर में असंतुलन पैदा हो गया है। अध्ययन के मुताबिक 2030 तक स्पेन, दक्षिण कोरिया, रूस, सिंगापुर और जर्मनी की आबादी घटनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा, भारत, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमा की आबादी की रफ्तार भी थम सकती है।
Written by: अखिलेश आर्येंदु | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 02, 2024 09:14 IST
आबादी असंतुलित होने से बिगड़ रहा सामाजिक ताना बाना
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
Advertisement

आज तमाम विकासशील देश बढ़ती आबादी और संसाधनों की कमी की वजह से परेशान हैं। दूसरी तरफ, विकसित देशों में घटती जन्मदर, खासकर नौजवानों की घटती आबादी से आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहे असर से कई तरह की समस्याएं पैदा हो गई हैं। 2022 के संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक पिछले दस वर्षों में एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले आठ देशों की आबादी कम हो गई, जिनमें ज्यादातर देश यूरोप के हैं। जापान में पिछले कई वर्षों से जनसंख्या में कमी और बुजुर्गों की बढ़ती आबादी की वजह से सामाजिक और आर्थिक हालात पर असर पड़ा है। इससे कई तरह के असंतुलन पैदा हो गए हैं।

‘द लैंसेट’ में 20 मार्च, 2024 को प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक भारत में आबादी का असंतुलन लगातार बढ़ रहा है। लड़कियों की जन्मदर घटने के कारण सामाजिक ताने-बाने पर बुरा असर पड़ रहा है। भारत में जीवन शैली में बदलाव की वजह से युवा शादियां विलंब से करने लगे हैं, जिससे संतान होने में देर हो रही है, जिसका असर बच्चों के पालन-पोषण, उनकी शिक्षा और सेहत पर पड़ता है।

Advertisement

इससे सामाजिक ताना-बाना बिगड़ रहा है। रपट के मुताबिक 1950 यानी चौहत्तर वर्ष पहले तक भारत की प्रजनन दर 6.2 फीसद थी, जो 2021 आते-आते घट कर दो फीसद से भी कम रह गई। अनुमान के मुताबिक 2050 तक प्रजनन दर घट कर 1.29 फीसद और 2100 में घटते-घटते 1.04 तक पहुंच सकती है। इसे भारत के लिए किसी भी नजरिए से अच्छा नहीं कहा जा सकता है।

गौरतलब है कि प्रजनन दर 2.1 को ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ कहा जाता है। यानी इस दर पर आबादी स्थिर रहती है और इससे कम होने पर घटने लगती है। युवाओं की आबादी घटने का मतलब है, वृद्धों की आबादी में वृद्धि। वृद्धों की आबादी बढ़ने का मतलब है, श्रमशक्ति में कमी आना। यह किसी भी देश के लिए जोखिम की स्थिति हो सकती है। भारत को भी एक या दो दशक बाद श्रमशक्ति में कमी से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Advertisement

विकसित देशों में प्रजनन दर लगातार कम हो रही है, जिससे युवाओं की तादाद कम और बुजुर्गों की बढ़ रही है। यानी जन्म और मृत्यु दर में असंतुलन पैदा हो गया है। अध्ययन के मुताबिक 2030 तक स्पेन, दक्षिण कोरिया, रूस, सिंगापुर और जर्मनी की आबादी घटनी शुरू हो जाएगी। इसके अलावा, भारत, नेपाल, श्रीलंका और म्यांमा की आबादी की रफ्तार भी थम सकती है। अभी कई विकसित देशों में बच्चों की जन्मदर बहुत तेजी से घट रही है। इसमें सिंगापुर और जापान प्रमुख हैं। सिंगापुर में जन्मदर 0.97 फीसद है, जापान में 0.6 फीसद और कोरिया में 0.72 फीसद है।

Advertisement

गौरतलब है कि जापान ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए युवाओं को इनाम दे रहा है। इसके बावजूद, शादी करने वाले युवाओं की संख्या लगातार कम हो रही है। आंकड़े बताते हैं कि जापान में शादी न करने वाले युवाओं की संख्या लगातार घट रही है। वर्ष 2023 में महज चार लाख युवाओं ने शादियां की। इसी तरह सिंगापुर में 2023 में 26,500 युवाओं ने ही शादियां की।

इसलिए जापान और सिंगापुर में जन्मदर में लगातार गिरावट आ रही है। सिंगापुर इस समय दोहरे संकट से जूझ रहा है। एक तरफ जन्मदर में बेतहाशा कमी आ रही है, तो दूसरी तरफ देश की बहुत बड़ी आबादी बूढ़ी हो गई है। जन्मदर में यह कमी जापान और सिंगापुर की अर्थव्यवस्था पर सीधे असर डाल रही है।

आबादी के मामले में चीन दुनिया का सबसे बड़ा देश है, उसकी आबादी 2100 तक आज के स्तर से आधी यानी 1.4 अरब से घट कर 77.1 करोड़ रह सकती है। मगर दुनिया के तमाम अविकसित देशों में आबादी घटने के बजाय लगातार बढ़ रही है। इनमें अफ्रीकी देशों के अलावा मुसलिम देश भी शामिल हैं। दुनिया के जिन देशों में जन्मदर बहुत अधिक है, उनको संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

हालात ऐसे हो गए हैं कि जनसंख्या का घनत्व लगातार बढ़ने के कारण कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। उन समस्याओं में पीने के पानी, पोषण युक्त खाद्यान्न के अलावा दवाओं और रोजगार की कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं। भारत भी ऐसी समस्याओं का सामना वर्षों से कर रहा है, लेकिन पिछले दस वर्षों में पानी, खाद्यान्न और रोजगार पर गौर करने के कारण इनमें कमी देखी जा रही है।

फिर भी जनसंख्या घनत्व अधिक होने और जीवन-शैली में बदलाव की वजह से बच्चों के जन्मदर में कमी देखी जा रही है। मगर बूढ़े हो रहे लोगों की संख्या जापान की तरह भारत में भी बढ़ रही है, इस पर तुरंत गौर करने की जरूरत है। वहीं, भारत के पड़ोसी देशों, खासकर बांग्लादेश, म्यांमा से पलायन कर भारत में चोरी-छिपे रह रहे लाखों लोगों की वजह से भी जनसंख्या घनत्व पर असर पड़ा है।

भारत में स्थिर जनसंख्या वृद्धि का लक्ष्य हासिल करना बहुत बड़ी चुनौती है। इसलिए प्रजनन दर में कमी लाने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है। बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में बच्चों की जन्मदर काफी अधिक है। इसलिए इन राज्यों को परिवार नियोजन पर अधिक ध्यान देना होगा। इसी के साथ भारत में युवाओं की बहुत बड़ी आबादी बेरोजगार है। इससे जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा देश के विकास में बाधा बना रहता है। इसलिए रोजगार की समस्या को प्राथमिकता के स्तर पर हल करने की जरूरत है।

यों तो बढ़ती आबादी पर रोक लगाने और बेरोजगारी की समस्या हल करने के मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकारों ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन आज भी करोड़ों की तादाद में भारत के युवा बेरोजगार हैं। इसलिए गैरबराबरी की समस्या भारतीय समाज में तेजी से बढ़ी है। भारत एक विकसित देश बने, इसके लिए जरूरी है कि बढ़ती आबादी पर रोक लगाई जाए और सबको शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं समान रूप से हासिल हों। गांवों से शहरों की तरफ पलायन को रोकना भी जरूरी है। क्योंकि पलायन से कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं और जनसंख्या असंतुलन लगातार बढ़ता है।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार जनसंख्या समस्या का सबसे बेहतर समाधान है कि सेहत और शिक्षा संबंधी सुविधाओं का लगातार प्रसार किया जाए और गुणवत्ता में तेजी लाई जाए। आज जरूरत है स्त्री-पुरुष जनसंख्या संतुलन को बनाए रखने में आ रही बाधाओं को खत्म करने की। इसके लिए सरकार की नीतियों और योजनाओं को आम आदमी का भरपूर समर्थन मिले, ताकि जनसंख्या का असंतुलन न हो और बढ़ती गैरबराबरी की समस्या में कमी लाई जा सके। उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत अपनी बेहतर नीतियों और योजनाओं से इस समस्या से कुछ वर्षों में पार पा लेगा।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो