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चिंता: ‘माइग्रेन’ व ‘अल्जाइमर’ से पीड़ितों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान पाया कि उच्च तापमान या लू की वजह से अस्पतालों में मस्तिष्काघात से पीड़ित मरीजों, उनकी अक्षमता और मौत के मामले की संख्या बढ़ी हैं। अध्ययन के दौरान इस बात की भी समीक्षा की गई कि जलवायु परिवर्तन ने कैसे चिंता, अवसाद और ‘सिजोफ्रेनिया’ (भ्रम की स्थिति) सहित कई गंभीर लेकिन सामान्य मानसिक विकारों से पीड़ित लोगों को प्रभावित किया है।
Written by: एजंसी | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 19, 2024 13:50 IST
चिंता  ‘माइग्रेन’ व ‘अल्जाइमर’ से पीड़ितों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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तापमान के बदलने से ‘माइग्रेन’ और ‘अल्जाइमर’ जैसे मस्तिष्क संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। तापमान में अत्यधिक बदलाव के कारण मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के और जटिल होने का खतरा है। ‘द लांसेट न्यूरोलाजी’ पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध में यह दावा किया गया है।

ब्रिटेन स्थित ‘यूनिवर्सिटी आफ कालेज लंदन’ में ‘इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोलाजी’ की ओर से किए गए इस अध्ययन में कहा गया है कि मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती है। इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता संजय सिसोदिया के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव का मस्तिष्क संबंधी रोगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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खासकर ‘माइग्रेन’ और ‘अल्जाइमर’ जैसी समस्याओं से पीड़ित लोगों का स्वास्थ्य और ज्यादा बिगड़ सकता है। ‘माइग्रेन’ से पीड़ित व्यक्ति को आधे सिर में पीड़ा की शिकायत होती है, जबकि ‘अल्जाइमर’ से पीड़ित व्यक्ति की सोचने की क्षमता प्रभावित होती है और उसकी याददाश्त कमजोर हो जाती है। अध्ययन के मुताबिक, रात का तापमान विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि रात के दौरान अधिक तापमान नींद में बाधा उत्पन्न होने की वजह बन सकता है। खराब नींद मस्तिष्क संबंधी कई समस्याओं को बढ़ाती है।

अध्ययन के दौरान दुनियाभर में वर्ष 1968 और 2023 के बीच प्रकाशित 332 पत्रों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही मस्तिष्काघात, ‘माइग्रेन’, ‘अल्जाइमर’, दिमागी बुखार, मिर्गी और ‘मल्टीपल स्केलेरोसिस’ सहित तंत्रिका तंत्र संबंधी 19 विभिन्न रोगों का अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान पाया कि उच्च तापमान या लू की वजह से अस्पतालों में मस्तिष्काघात से पीड़ित मरीजों, उनकी अक्षमता और मौत के मामले की संख्या बढ़ी हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि ‘डिमेंशिया’ (याद रखने, सोचने या निर्णय लेने की क्षमता का कम हो जाना) से पीड़ित मरीज अत्यधिक तापमान और खराब मौसम से जुड़ी बाढ़ और जंगल की आग जैसी घटनाओं से बहुत प्रभावित होते हैं।

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अध्ययन के दौरान इस बात की भी समीक्षा की गई कि जलवायु परिवर्तन ने कैसे चिंता, अवसाद और ‘सिजोफ्रेनिया’ (भ्रम की स्थिति) सहित कई गंभीर लेकिन सामान्य मानसिक विकारों से पीड़ित लोगों को प्रभावित किया है। इन सब में तापमान में अत्यधिक बदलाव और चरम मौसमी घटनाओं का मानिसक रोगियों की सेहत पर प्रतिकूल असर देखा गया है।

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