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राजपाट: कांग्रेस आलाकमान की चुप्पी से पार्टी को नुकसान

हिमाचल प्रदेश में सरकार अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। पर, आलाकमान बेफिक्र लगता है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: March 23, 2024 11:31 IST
राजपाट  कांग्रेस आलाकमान की चुप्पी से पार्टी को नुकसान
मल्लिकार्जुन खरगे। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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कांग्रेस आलाकमान की चुप्पी पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है। अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे नाराज और असंतुष्ट पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर पाने में नाकाम हैं। नतीजतन एक तरफ तो नेताओं के इस्तीफे देने का सिलसिला तेज हुआ है, दूसरी तरफ नेताओं की गैर जरूरी बयानबाजी से पार्टी में अनुशासनहीनता का जनता के बीच संदेश जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश में सरकार अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। पर, आलाकमान बेफिक्र लगता है। और तो और पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह सार्वजनिक तौर पर बयान दे रही हैं कि वे मंडी से अगला लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने इसकी वजह जमीनी स्थिति ठीक न होना और कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता बताई है। हिमाचल में हालांकि चुनाव एक जून को होना है और इस नाते तब तक प्रतिभा सिंह की नाराजगी दूर भी हो सकती है। पर उनके बयान से विपक्षी भाजपा को तो तंज कसने का मौका मिल ही गया।

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आम जनता के बीच गलत संदेश अलग चला गया। ऐसी ही जग हंसाई गुजरात की अहमदाबाद सीट से लोकसभा उम्मीदवार बनाए गए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने चुनाव न लड़ने का एलान करके करा दी। अब तो एक बड़े नेता पर आरोप लगाते हुए पार्टी से ही इस्तीफा दे दिया रोहन ने। जाहिर है कि उन्हें उम्मीदवार बनाने से पहले पार्टी ने ठोक बजाकर उनकी सहमति नहीं ली होगी।

भाजपा के पुराने और वफादार नेताओं के बागी तेवर

हरियाणा और कर्नाटक में इन दिनों भाजपा के पुराने और वफादार नेताओं के बागी तेवर खूब दिख रहे हैं। कर्नाटक में तो कई बड़े नेता भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। देवगौड़ा के जनतादल (एस) के साथ गठबंधन को मजबूर हुई है पिछले चुनाव में सूबे की 28 में से 25 सीटें जीतने वाली पार्टी इस बार। मनोहर लाल की जगह नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर अनिल विज की नाराजगी साफ दिखी।

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विज चुनावी नजरिए से इस समय सूबे में भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेता ठहरे। छठी बार विधायक हैं। उनके समर्थकों को भी उनकी उपेक्षा से गुस्सा है। नाराज राव इंद्रजीत और कुलदीप विश्नोई भी कम नहीं हैं। विज मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने से इस कदर खफा हो गए थे कि नायब सिंह सैनी के नाम का प्रस्ताव पेश करने से तो साफ इनकार कर ही दिया था, उनके शपथ समारोह से भी नदारद रहे।

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अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पंजाब और दिल्ली कांग्रेस में अलग-अलग सुर

आबकारी घोटाले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पंजाब और दिल्ली में अलग-अलग सुर हैं। जहां कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लेकर दिल्ली के नेता इस गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी के साथ खड़े नजर आए हैं, वहीं पंजाब में कांग्रेस नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने आम आदमी पार्टी को घेरते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता स्वराज और जन लोकपाल देने के लिए सत्ता में आए थे।

अब तक पंजाब सरकार विभिन्न भ्रष्टाचार के मामलों में तीन सौ लोगों की गिरफ्तारी का दावा कर रही है। इस आंकड़े को बढ़ाकर 301 कर देना चाहिए। इसमें अरविंद केजरीवाल का नाम शामिल करना चाहिए और पंजाब की जनता को इसकी जानकारी प्रचार माध्यम से देनी चाहिए।

शिबू सोरेन की दो बहुओं की जंग सड़क पर

झारखंड मुक्ति मोर्चा के शिखर पुरुष शिबू सोरेन की दो बहुओं की जंग सामने है। शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने पिछले हफ्ते झामुमो से इस्तीफा दे दिया। विधानसभा की सदस्यता भी छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गई। उनके पति दुर्गा सोरेन का 2009 में निधन हो गया था। सूबे के मुख्यमंत्री रहे और अब धन शोधन मामले में जेल में बंद हेमंत सोरेन उनके देवर हैं।

हेमंत की पत्नी कल्पना सोरेन उच्च शिक्षित हैं। जब से सीता सोरेन ने झामुमो छोड़ी है, तभी से जेठानी और देवरानी में जुबानी जंग चल रही है। कल्पना सोरेन ने लिखा कि उनके पति हेमंत का अपने बड़े भाई दुर्गा से बड़ा प्रेम था। पिता की तरह सम्मान करते थे हेमंत अपने भाई दुर्गा का। पर दुर्गा और शिबू सोरेन ने जिन ताकतों से लड़ाई लड़ी, सीता सोरेन उन्हीं का साथ दे रही हैं।

इससे दुर्गा सोरेन की आत्मा को बहुत ठेस पहुंची होगी। कल्पना की इस टिप्पणी पर सीता ने पलटवार करने में देर नहीं लगाई और फरमाया कि उन्हें किसी के घड़ियाली आंसुओं की जरूरत नहीं। परिवार ने पति के निधन के बाद उनकी और उनकी तीनों बेटियों की उपेक्षा की। सीता सोरेन वही हैं, जिनका मामला पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की संविधान पीठ में आया था। वे सीबीआइ की तरफ से भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी हैं और संविधान पीठ के आदेश के बाद अब उन पर मुकदमा चलेगा। लेकिन भाजपा को उनके दागी होने से कोई दिक्कत नहीं। पार्टी को तो उनका इस्तेमाल उनकी देवरानी के खिलाफ करना है।

भाजपा के कुनबे में भी परिवारवादी नेताओं की कमी नहीं

भाजपा राजनीति में परिवारवाद की खूब आलोचना करती है। लेकिन भाजपा के कुनबे में भी परिवारवादी नेताओं की कमी नहीं है। आंध्र प्रदेश में तो इस बार नया कीर्तिमान बना है। सूबे के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वाइएसआर रेड्डी के बेटे वाइएस जगनमोहन रेड्डी अभी मुख्यमंत्री हैं, सो वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे ही। वह भी अपने पिता की विधानसभा सीट से ही।

तेलगुदेशम के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा से गठबंधन किया है। उनके बेटे नारा लोकेश दूसरी बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। वे पिछला विधानसभा चुनाव हार गए थे। उनके नाना एनटी रामाराव भी आंध्र के मुख्यमंत्री रहे। एनटी रामाराव के बेटे एन बालकृष्ण भी हिंदूपुर की अपनी सीट से फिर चुनाव लड़ेंगे और हैट्रिक लगाने की कोशिश करेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री एन भास्कर राव के बेटे और जन सेना के नेता एन मनोहर तेनाली सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एन जनार्दन रेड्डी के बेटे एन रामकुमार रेड्डी को वाइएसआर कांगे्रस ने वेंकटगिरी से उम्मीदवार बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री के विजय भास्कर रेड्डी के बेटे के सूर्यप्रकाश रेड्डी को तेलगुदेशम ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

संकलन : मृणाल वल्लरी

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