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पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: अर्थव्यवस्था का शोर

नीतगत ढांचे के बारे में सरकार की समझ भारतीय रिजर्व बैंक से मेल नहीं खाती है। आरबीआइ मुद्रास्फीति को दो से चार फीसद तक नीचे लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, जबकि सरकार चार से छह फीसद की ऊपरी सहनशीलता सीमा का परीक्षण कर रही है।
Written by: पी. चिदंबरम | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 11, 2024 08:06 IST
पी  चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर  अर्थव्यवस्था का शोर
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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अच्छा अर्थशास्त्र खामोश रहता है और अच्छे अर्थशास्त्री अपनी नीतियों के नतीजों के पीछे खड़े रहते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण, नए साल में संसद के पहले सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति का अभिभाषण और वित्तमंत्री का बजट (या अंतरिम बजट) भाषण, सरकारी नीति के सबसे महत्त्वपूर्ण वक्तव्य होते हैं। उनसे सरकार के इरादे साफ और स्पष्ट होते हैं।

एनडीए सरकार को बड़बोलापन पसंद है। इस साल 2024-25 के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए माननीय वित्तमंत्री ने ‘बुलहार्न’ (तेज ध्वनि वाला भोंपू) शब्द का इस्तेमाल करना बेहतर समझा। मीडिया ने आज्ञाकारी ढंग से उनकी आवाज को और ऊंचा किया। मगर वित्तमंत्री को इससे बड़ी निराशा हुई होगी कि, अगला दिन खत्म होते न होते, बजट बिना अपनी कोई छाप छोड़े, गायब हो गया।

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थका और ऊबा हुआ

मुझे लगता है कि पिछले दस वर्षों में सरकार के बार-बार किए गए दावों से लोग थक- और ऊब- गए हैं। उन्हें याद है कि हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया गया था; हमारे पास मौजूदा सरकारी रिक्तियों को भरने के लिए कुछ हजार नियुक्ति-पत्र सौंपने के तथ्य उपलब्ध हैं, जबकि तकनीकी कंपनियों ने बताया कि उन्होंने 2023 में दो लाख साठ हजार नौकरियां खत्म कर दी थीं।

लोगों को वह वादा भी याद है कि हर व्यक्ति के बैंक खाते में पंद्रह लाख रुपए आएंगे। उसे ‘भारत और विदेशों में जमा बेहिसाब धन को वापस लाने’ के बाद जमा किया जाना था। वे जानते हैं कि जिन कथित घोटालेबाजों को देश छोड़ने की अनुमति दी गई, वे शरणदाता देशों में स्वस्थ और प्रसन्न हैं और पिछले दस वर्षों में उनमें से किसी को भी भारत प्रत्यर्पित नहीं किया गया है। उन्हें किसानों की आय दोगुनी करने, 2022 तक हर परिवार के लिए घर और 2023-24 तक पांच लाख करोड़ अमेरिकी डालर वाली अर्थव्यवस्था बनाने का वादा भी याद है। इसलिए, लोग वित्तमंत्री के दावों से हैरान थे।

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कुछ उदाहरण

वित्तमंत्री: इनसे और बुनियादी आवश्यकताओं के प्रावधान के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक आय में वृद्धि हुई है। तथ्य: पीएलएफएस डेटा और ‘स्टेट आफ वर्किंग इंडिया रपट’ (अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी) के अनुसार तीन प्रकार के श्रमिकों (नियमित, अनियमित/ दिहाड़ी और स्व-रोजगार) की वास्तविक मजदूरी 2017-18 और 2022-23 में ठहर गई है। वित्तमंत्री: …सरकार ने 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से मुक्ति दिलाई है।

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तथ्य: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के अनुसार, गरीबी से बाहर निकले लोगों की संख्या 27.5 करोड़ (यूपीए) और 14.0 करोड़ (एनडीए) थी। वित्तमंत्री: हर साल, पीएम-किसान सम्मान योजना के तहत, सीमांत और छोटे किसानों सहित 11.8 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

तथ्य: 15 नवंबर, 2023 तक लाभार्थी किसानों की संख्या घटकर 8.12 करोड़ रह गई। जमींदारों (जिनके पास जमीन है) को लाभ मिलता है, जबकि बंटाईदार किसानों (जो जमीन पर खेती करते हैं) को बाहर रखा गया है। वित्तमंत्री: बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा के नए संस्थान, यानी 7 आइआइटी, 16 आइआइआइटी, 15 एम्स और 390 विश्वविद्यालय स्थापित किए गए हैं।

तथ्य: 22 मार्च, 2023 तक ‘रिक्त पद’ थे: आइआइटी (9,625), आइआइआइटी (1,212) और केंद्रीय विश्वविद्यालय (22,106)। 15 मार्च, 2022 तक, एम्स, दिल्ली में ‘फैकल्टी’ और ‘रेजीडेंट्स’ पदों पर रिक्तियां 1,256 थीं। अन्य 19 एम्स में रिक्तियां 3,871 थीं। वित्तमंत्री: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत हमारे युवाओं की उद्यमशील आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए 22.5 लाख करोड़ रुपए के 43 करोड़ ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

तथ्य: औसत ऋण आकार 52,325 रुपए है। अगर हम इन ऋणों को शिशु (83 फीसद), किशोर (15 फीसद) और तरुण (2 फीसद) में वर्गीकृत करते हैं, तो यह स्पष्ट है कि अधिकांश ऋण शिशु हैं। प्रकाशित आंकड़ों पर आधारित सरल अंकगणित से पता चलता है कि 35.69 करोड़ शिशु कर्जदारों को 9 लाख करोड़ रुपए मिले। इसका मतलब है कि औसत ऋण आकार 25,217 रुपए है। पच्चीस हजार रुपए के ऋण से कौन-सा व्यवसाय शुरू किया और चलाया जा सकता है?

वित्तमंत्री: वस्तु एवं सेवा कर की वजह से ‘एक राष्ट्र, एक बाजार, एक कर’ के सिद्धांत को बढ़ावा मिला है। तथ्य: अगर इकलौता कोई कर है, जिसके विरोध में सभी व्यवसायी एकजुट हैं, तो वह है जीएसटी। जीएसटी कानून अत्यंत त्रुटिपूर्ण हैं और ये उत्पीड़न तथा शोषण का साधन बन गए हैं।

वित्तमंत्री: गतिशील मुद्रास्फीति प्रबंधन की वजह से मुद्रास्फीति को नीतिगत ढांचे के भीतर रखने में मदद मिली है। तथ्य: जाहिर है, नीतिगत ढांचे के बारे में सरकार की समझ भारतीय रिजर्व बैंक से मेल नहीं खाती है। आरबीआइ मुद्रास्फीति को दो से चार फीसद तक नीचे लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, जबकि सरकार चार से छह फीसद की ऊपरी सहनशीलता सीमा का परीक्षण कर रही है। 2019-2024 की पांच साल की अवधि में औसत सीपीआइ मुद्रास्फीति 5.6 फीसद रही है। खाद्य मुद्रास्फीति 8.7 फीसद है; दूध 5.07 फीसद;फल 11.4 फीसद; और सब्जियां 27.64 फीसद।

वित्तमंत्री: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को विकसित करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए समय पर पर्याप्त वित्त, प्रासंगिक प्रौद्योगिकियां और उचित प्रशिक्षण सुनिश्चित करना हमारी सरकार की एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकता रही है। तथ्य: सरकारी समर्थन के अभाव में हजारों एमएसएमई ने महामारी के दौरान अपना कारोबार बंद कर दिया।

सरकार ने बैंक ऋणों के जरिए तीन लाख करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई की गारंटी को तोड़-मरोड़ और बहुत कम करके मात्र तीन लाख करोड़ रुपए के बैंक ऋणों में परिवर्तित कर दिया। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया गया है कि लगभग दो लाख करोड़ रुपए वितरित किए गए।

वित्तमंत्री: 2013-14 में समुद्री खाद्य निर्यात दोगुना हो गया है। तथ्य: नौ वर्षों में दोगुना (30,627 करोड़ रुपए से 64,902 करोड़ रुपए) मौजूदा रुपए की कीमतों के अनुसार हुआ है। अमेरिकी डालर में, केवल 60 फीसद की वृद्धि 501.6 करोड़ से 807.8 करोड़ अमेरिकी डालर, जो 5.4 फीसद की मामूली सीएजीआर है। गैर-वैधानिक चेतावनी: ‘बुलहार्न’ का उपयोग लोगों को बहरा बना सकता है।

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