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पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान भगदड़, एक की मौत-कई घायल, पुलिस ने काबू किए हालात

पिछले 53 साल से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा एक दिन की होती थी, लेकिन इस बार 2 दिन की हो रही है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: July 07, 2024 23:11 IST
पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दौरान भगदड़  एक की मौत कई घायल  पुलिस ने काबू किए हालात
जगन्नाथ रथ यात्रा में भगदड़ (फोटो सोर्स: पीटीआई फोटो)
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ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो चुकी है। हालांकि इस दौरान एक बुरी खबर आई कि इसमें भगदड़ मच गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि कई लोग घायल हैं। हालांकि पुलिस ने हालात को तुरंत नियंत्रण में ले लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह हादसा भगवान बलभद्र के रथ तालध्वज को खींचने के दौरान हुआ।

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ओडिशा का नहीं है मृतक व्यक्ति

कई मामूली रूप से घायलों को प्राथमिक इलाज के बाद छोड़ दिया गया जबकि करीब 6 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज जारी है। वहीं जिस व्यक्ति की मौत हुई है, उसकी पहचान अभी तक उजागर नहीं हुई है। लेकिन बताया जा रहा है कि वह ओडिशा के बाहर का है।

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बता दें कि पिछले 53 साल से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा एक दिन की होती थी, लेकिन इस बार 2 दिन की हो रही है। इससे पहले 1971 में रथयात्रा 2 दिन की हुई थी। लाखों की संख्या में भक्त इस रथ यात्रा में शामिल हो रहे हैं।

भगवान होते हैं बीमार

भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ दो दिन में मौसी के घर पहुंचेंगे। मान्यता है कि यहां भगवान कई तरह के पकवान खाते हैं और इससे उनकी तबीयत खराब हो जाती है। वहीं इस रथ यात्रा में शामिल होने से 100 यज्ञ कराने के बराबर पुण्य मिलता है। इसीलिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में हिस्सा लेते हैं।

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क्या है मान्यता?

ऐसी मान्यता है की पूर्णिमा पर स्नान के बाद भगवान बीमार हो जाते हैं। रविवार दोपहर 2:30 बजे भगवान अपने रथ में सवार हुए। भगवान को आम दिनों से 2 घंटे पहले जगाया गया और तड़के 2 बजे आरती हुई। आमतौर पर भगवान की सुबह 4 बजे मंगला आरती होती है लेकिन इस बार 2 बजे ही हुई। सुबह 7 बजे भगवान को खिचड़ी भोग प्रसाद लगाया गया था।

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जगन्नाथ जी का कैसा होता है रथ?

भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष कहा जाता है। साथ ही इस रथ पर लहरा रहे ध्वज का नाम त्रिलोक्यमोहिनी नाम से जाता जाता है। वहीं इस रथ में 16 पहिए होते हैं। साथ ही यह रथ 13.5 मीटर ऊंचा होता है। वहीं इस रथ में खासकर पीले रंग के कपड़े का प्रयोग किया जाता है। विष्णु का वाहक गरूड़ इसकी रक्षा करता है।

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