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Electoral Bonds: जिस सुरंग में फंसे थे मजदूर, उसे बना रही कंपनी ने BJP को दिया 55 करोड़ का चंदा, 2018 में पड़ी थी IT रेड

Electoral Bond Data: नवयुग पिछले साल उत्तरकाशी में ढही सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी है। इलेक्टोराल बॉन्ड से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक इस कंपनी ने बीजेपी को 55 करोड़ का चंदा दिया है। 
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: March 23, 2024 09:34 IST
electoral bonds  जिस सुरंग में फंसे थे मजदूर  उसे बना रही कंपनी ने bjp को दिया 55 करोड़ का चंदा  2018 में पड़ी थी it रेड
चुनाव आयोग ने डाटा साझा कर दिया है। (फोटो : पीटीआई)
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इलेक्टोराल बॉन्ड मामले से जुड़ी कई जानकारियां सामने आ रही हैं। चुनाव आयोग ने इसका सारा डेटा जारी कर दिया है। एक खुलासा नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा भी हुआ है। नवयुग पिछले साल उत्तरकाशी में ढही सुरंग का निर्माण करने वाली कंपनी है। इलेक्टोराल बॉन्ड से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक इस कंपनी ने बीजेपी को 55 करोड़ का चंदा दिया है।

कब-कब क्या और कैसे हुआ? 

जानकारी के मुताबिक नवयुग  इंजीनियरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने 19 अप्रैल, 2019 और 10 अक्टूबर, 2022 के बीच 1-1 करोड़ रुपये के 55 चुनावी बांड खरीदे।

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The Quint ने रिपोर्ट किया है कि 2018 में कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने  कंपनी के अलग-अलग परिसरों पर छापेमारी की थी। वहीं अक्टूबर 2018 में इनकम टेक्स डिपार्टमेंट नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी के हैदराबाद परिसर पर छापा मारा था। कंपनी की वेबसाइट मौजूद जानकारी के मुताबिक नवयुग इंजीनियरिंग, नवयुग समूह की प्रमुख कंपनी है और एक इंजीनियरिंग और कोर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है। इस ही कंपनी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर देश का सबसे लंबा नदी पुल ढोला-सदिया पुल बनाया है, जो कुल 9.15 किमी लंबा है।

नवयुग इंजीनियरिंग की वेबसाइट के मुताबिक यह कंपनी कई परियोजनाओं में शामिल रही हैं। जिसमें गंगा पर पुल और कई अन्य पुल शामिल हैं। नवयुग इंजीनियरिंग को भेजी गई क्वेरी का कोई जवाब नहीं मिला।

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चुनावी बांड योजना की घोषणा तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के अपने बजट भाषण में की थी, और इसे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले नकद दान के विकल्प के रूप में पेश किया था।योजना के तहत दानकर्ता का नाम केवल बैंकों को ही पता होता है। चुनावी बांड को किसी पात्र राजनीतिक दल द्वारा केवल अधिकृत बैंक के बैंक खाते के माध्यम से भुनाया जाता है। हालांकि, फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक को राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बांड के विवरण का खुलासा करने का निर्देश दिया था।

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