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पश्चिम बंगाल में ममता सरकार को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के शिक्षक भर्ती रद्द करने वाले फैसले पर लगाई रोक

चीफ जस्टिस डी.वाई., चंद्रचूड़,जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सीबीआई को अपनी जांच जारी रखने और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों की भी जांच करने की अनुमति दी है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: May 07, 2024 20:05 IST
पश्चिम बंगाल में ममता सरकार को राहत  सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के शिक्षक भर्ती रद्द करने वाले फैसले पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट। (इमेज- फाइल फोटो)
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) द्वारा की गई 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य कर दिया गया था।

चीफ जस्टिस डी.वाई., चंद्रचूड़,जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने सीबीआई को अपनी जांच जारी रखने और राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों की भी जांच करने की अनुमति दी है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने CBI से कहा कि वह जांच के दौरान किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करने जैसी कोई जल्दबाजी भरी कार्रवाई न करे।

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'अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है कि रिकॉर्ड संभाल कर रखें'

सुप्रीम कोर्ट ने कथित भर्ती घोटाले को व्यवस्थागत धोखाधड़ी करार देते हुए कहा कि अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे 25,753 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड संभाल कर रखते। सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट के 22 अप्रैल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों व गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्ति को अमान्य घोषित कर दिया था।

चीफ जस्टिस ने क्या कहा?

चीफ जस्टिस डी.वाई., चंद्रचूड़ ने राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों से कहा, “सरकारी नौकरियां बहुत कम हैं… अगर जनता का विश्वास उठ गया तो कुछ भी नहीं बचेगा। यह व्यवस्थागत धोखाधड़ी है। सरकारी नौकरियां आज बहुत कम हैं और उन्हें सामाजिक विकास के रूप में देखा जाता है। अगर नियुक्तियों पर भी सवाल उठने लगें, तो व्यवस्था में क्या बचेगा? लोगों का विश्वास खत्म हो जाएगा, आप इसे कैसे स्वीकार कर सकते हैं?”

पीठ ने कहा कि राज्य सरकार के पास यह दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है कि उसके अधिकारियों ने डेटा संभाल कर रखा। पीठ ने डेटा की उपलब्धता के बारे में भी पूछा। पीठ ने राज्य सरकार के वकीलों से कहा, “या तो आपके पास डेटा है या नहीं है। डिजिटल रूप में दस्तावेज संभाल कर रखना आपकी जिम्मेदारी थी। अब यह जाहिर हो चुका है कि डेटा नहीं है। आपको यह बात पता ही नहीं है कि आपके सेवा प्रदाता ने किसी अन्य एजेंसी की सेवा ली है। आपको उसके ऊपर निगरानी रखनी चाहिए थी।”

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इससे पहले, राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि अदालत ने “मनमाने तरीके से” नियुक्तियां रद्द कर दीं।

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