scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

'इसे रेप की श्रेणी में नहीं रख सकते...', पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंधों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

शख्स ने अपनी पत्नी की शिकायत पर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: May 04, 2024 17:24 IST
 इसे रेप की श्रेणी में नहीं रख सकते      पत्नी के साथ अप्राकृतिक संबंधों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
अननेचुरल सेक्स को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है।
Advertisement

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि बिना सहमति के बावजूद पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध को बलात्कार नहीं कहा जा सकता। एक व्यक्ति के खिलाफ उसकी पत्नी द्वारा अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई गई थी। हाई कोर्ट ने यह कहते हुए एफआईआर रद्द कर दिया कि अप्राकृतिक सेक्स आईपीसी के तहत अपराध नहीं है।

कोर्ट ने की अहम टिप्पणी

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एक सदस्यीय पीठ ने आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत पत्नी द्वारा अपने पति के खिलाफ की गई एफआईआर को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

Advertisement

1 मई को जारी आदेश में हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट और देश भर के हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए कई निर्णयों का हवाला दिया। इसमें आईपीसी की धारा 375 के अनुसार बलात्कार की परिभाषा का जिक्र किया गया था। न्यायाधीश ने फैसला सुनाया कि पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध तब तक बलात्कार नहीं माना जाएगा (भले ही यह बिना सहमति के हुआ हो) जब तक कि पत्नी 15 वर्ष से अधिक की हो।

जानें न्यायधीश ने क्या कहा

न्यायमूर्ति अहलूवालिया ने बुधवार को कहा, "इस अदालत की राय है कि इस निष्कर्ष पर पहुंचने के बाद कि एक पति द्वारा कानूनी रूप से विवाहित पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध नहीं है। इस पर आगे विचार-विमर्श की आवश्यकता नहीं है कि क्या एफआईआर आरोपों के आधार पर दर्ज किया गया है या नहीं।''

Advertisement

हाई कोर्ट के आदेश में आगे कहा गया, "Marital rape को अब तक मान्यता नहीं दी गई है। पुलिस स्टेशन कोतवाली (जबलपुर) में दर्ज अपराध संख्या 377/2022 में एफआईआर और आवेदक (पति) के खिलाफ आपराधिक मुकदमा रद्द किया जाता है।"

Advertisement

क्या था पूरा मामला?

बता दें कि शख्स ने अपनी पत्नी की शिकायत पर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका के मुताबिक दोनों की शादी 2019 में हुई थी, लेकिन पत्नी फरवरी 2020 से अपने मायके में रह रही है। पत्नी ने 2020 में अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। 2022 में पति के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंध की एफआईआर दर्ज की गई थी।"

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 चुनाव tlbr_img2 Shorts tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो