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पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: मोदी की स्वीकारोक्ति

कांग्रेस का घोषणापत्र 5 अप्रैल को जारी हुआ था, जिसे ‘न्याय पत्र’ नाम दिया गया। इस दस्तावेज के छियालीस पृष्ठों को जो एक सूत्र पिरोता है, वह है ‘न्याय’, जिससे लोगों के एक बड़े वर्ग को वंचित कर दिया गया था। ‘न्याय’ शब्द में सामाजिक न्याय, युवाओं के लिए न्याय, महिलाओं के लिए न्याय, किसानों के लिए न्याय और श्रमिकों के लिए न्याय शामिल हैं।
Written by: पी. चिदंबरम | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 05, 2024 07:47 IST
पी  चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर  मोदी की स्वीकारोक्ति
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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इस लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का घोषणापत्र 2019 से ही तैयार हो रहा था। राहुल गांधी ने प्रत्यक्ष रूप से यह देखने और जानने-समझने के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की ऐतिहासिक पदयात्रा की थी कि आम लोग कैसे और किन परिस्थितियों में रह रहे हैं और उनकी आकांक्षाएं क्या हैं। उदयपुर सम्मेलन एक ऐसा अवसर बना था, जिसमें कांग्रेस पार्टी के नेताओं को तीन दिनों तक एक साथ रहने और देश के सामने आने वाली चुनौतियों और उन पर संभावित प्रतिक्रियाओं को लेकर विचार-विमर्श करने का मौका मिला था। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआइसीसी) के रायपुर सम्मेलन के बाद पार्टी नीतियों का एक ऐसा व्यापक और विश्वसनीय मंच तैयार करने में सक्षम हुई थी, जो राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय चुनावों में भी भाजपा को चुनौती दे सकता है।

नव संकल्प आर्थिक नीति की रचना उदयपुर में की गई थी। ‘केंद्र में गरीब’ विषय पर रायपुर में विचार-विमर्श किया और उसे अपनाया गया था। कांग्रेस का घोषणापत्र 5 अप्रैल को जारी हुआ था, जिसे ‘न्याय पत्र’ नाम दिया गया। इस दस्तावेज के छियालीस पृष्ठों को जो एक सूत्र पिरोता है, वह है ‘न्याय’, जिससे लोगों के एक बड़े वर्ग को वंचित कर दिया गया था। ‘न्याय’ शब्द में सामाजिक न्याय, युवाओं के लिए न्याय, महिलाओं के लिए न्याय, किसानों के लिए न्याय और श्रमिकों के लिए न्याय शामिल हैं।

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लोगों के बड़े वर्ग के साथ भेदभाव किया गया और उन्हें देश की तेज या धीमी विकास गाथा में भागीदारी के उचित अवसर से वंचित किया गया। कांग्रेस का घोषणापत्र ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे पर से पर्दा हटाने और देश के शासकों को आईना दिखाने वाला है। इसने समता और न्याय के साथ वृद्धि और विकास का एक वैकल्पिक दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कांग्रेस के घोषणापत्र को 2024 के चुनावों का ‘हीरो’ बताया।

शुरू में, मोदी जी और भाजपा ने कांग्रेस के घोषणापत्र को नजरअंदाज करने का फैसला किया। मीडिया ने भी इस दस्तावेज पर बहुत कम ध्यान दिया। मगर जैसे-जैसे इसके अनूदित संस्करण राज्यों तक पहुंचे, और उम्मीदवारों और प्रचारकों ने गांवों और कस्बों में इसके मुख्य संदेश पहुंचाए, कांग्रेस का घोषणापत्र लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। (पढ़ें : कांग्रेस के घोषणापत्र का पुनर्लेखन, जनसत्ता, 28 अप्रैल, 2024) पांच अप्रैल के नौ दिन बाद भाजपा ने अपना घोषणापत्र जारी किया। इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

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इस मोदी-पूजक दस्तावेज के गुणों की प्रशंसा खुद मोदी जी ने भी नहीं की, जिसका शीर्षक है ‘मोदी की गारंटी’। सात दिन बाद, 21 अप्रैल को 102 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। उसकी ‘खुफिया जानकारी’ जाहिर तौर पर भाजपा के लिए बुरी खबर थी। यह स्पष्ट हो गया कि मतदाताओं ने घोषणापत्र में किए गए ‘वादों’ के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगियों को वोट दिया है, जैसे कर्नाटक और तेलंगाना में ‘गारंटी’ के लिए वोट किया था। इससे मोदी को एक रास्ता मिल गया और 21 अप्रैल को उन्होंने अपनी रणनीति बदल ली।

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