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Haryana Politics: जाट बहुल हरियाणा में OBC पर दांव! बीजेपी ने धनखड़ की जगह नायब सैनी को क्यों बनाया प्रदेश अध्यक्ष?

Haryana Politics: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाले 53 साल के सैनी कुरूक्षेत्र से पहली बार सांसद बने हैं। वो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाते हैं।
Written by: Sukhbir Siwach
October 28, 2023 16:09 IST
haryana politics  जाट बहुल हरियाणा में obc पर दांव  बीजेपी ने धनखड़ की जगह नायब सैनी को क्यों बनाया प्रदेश अध्यक्ष
Haryana Politics: नायब सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं, वो कुरूक्षेत्र से सांसद हैं। (एक्स)
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Lok Sabha Elections: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सभी राज्यों की लोकसभा सीटों पर नजर है। यही वजह है कि पार्टी राज्य की स्थिति के हिसाब से समीकरण बैठाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच बीजेपी हाईकमान ने शुक्रवार को ओम प्रकाश धनखड़ की जगह लोकसभा सांसद नायब सिंह सैनी को हरियाणा इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया, क्योंकि पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही है। धनखड़ को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है।

मनोहर लाल खट्टर के करीबी हैं सैनी

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाले 53 साल के सैनी कुरूक्षेत्र से पहली बार सांसद बने हैं। वो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी माने जाते हैं। उनकी नियुक्ति को हरियाणा की जाति-केंद्रित राजनीति में गैर-जाट मतदाताओं विशेष रूप से पिछड़े समुदायों को एकजुट करने के भाजपा की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जहां जाट समर्थन बड़े पैमाने पर कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी और इंडियन नेशनल लोक दल के बीच विभाजित है।

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भाजपा पहले से ही जेजेपी के साथ गठबंधन में है, जिसके नेता दुष्यंत चौटाला राज्य के उपमुख्यमंत्री हैं। जुलाई 2020 में राज्य पार्टी प्रमुख नियुक्त किए गए ओमप्रकाश धनखड़ पहले ही तीन साल का अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। हालांकि, सैनी की नियुक्ति खट्टर की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद हुई है। सैनी की नियुक्ति को सीएम द्वारा लोकसभा चुनाव और उसके बाद अक्टूबर 2024 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य पार्टी मामलों पर पकड़ मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।

राजस्थान में चुनाव प्रचार कर रहे सैनी पिछली खट्टर सरकार में भी मंत्री थे। वह विधायक थे जब उन्होंने 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा था, जिस वर्ष भाजपा ने हरियाणा में सभी 10 सीटें जीती थीं।

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नई जिम्मेदारी के लिए सैनी को शुभकामनाएं देते हुए खट्टर ने कहा, "मुझे यकीन है कि संगठन को उनके लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव से लाभ होगा और भाजपा आगामी चुनावों में नया इतिहास बनाएगी।"

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सैनी की नियुक्ति की वजह ओबीसी पर पकड़ बनाना

जब ओमप्रकाश धनखड़ (एक जाट) को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था, तो इसे भगवा पार्टी की ओर से एक संतुलनकारी कार्य के रूप में देखा गया था, क्योंकि एक खट्टर (पंजाबी) पहले से ही सीएम पद पर थे। इससे पहले भी इसी सिद्धांत को चुना गया था जब सुभाष बराला, जो एक जाट नेता थे। बराला ने पांच साल से अधिक समय तक राज्य पार्टी अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था, जबकि खट्टर सीएम की कुर्सी पर थे। कांग्रेस और आईएनएलडी ने भी राज्य में सत्ता में रहने के दौरान सीएम और राज्य पार्टी प्रमुख का कार्यभार सौंपते समय जाटों और गैर-जाटों के बीच जिम्मेदारियों को साझा करने की समान रूप से पालन किया। सैनी की नियुक्ति के साथ भाजपा अपने मतदाताओं के मुख्य समूह पिछड़े समुदायों पर पकड़ मजबूत करना चाह रही है।

सैनी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बीजेपी और जेजेपी दोनों मिलकर चुनाव लड़ने पर अड़े हुए हैं। हाल के महीनों में दोनों ने कहा है कि वे स्वतंत्र रूप से सभी 10 लोकसभा और 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इस परिदृश्य में सैनी के सामने 2024 में दो महत्वपूर्ण चुनावों से पहले अपनी पार्टी को और मजबूत करने का काम है।

नायब सैनी का राजनीति करियर-

कानून में स्नातक सैनी 2014 में नारायणगढ़ से राज्य विधानसभा के लिए चुने गए थे। 2016 में उन्हें राज्य मंत्री (एमओएस) के रूप में राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। बाद में पार्टी ने उन्हें 2019 में कुरुक्षेत्र से लोकसभा चुनाव के लिए मैदान में उतारा। सैनी ने पार्टी संगठन में अंबाला जिला भाजपा युवा मोर्चा अध्यक्ष से लेकर अंबाला जिला पार्टी अध्यक्ष और राज्य पार्टी महासचिव तक कई जिम्मेदारियां संभाली हैं।

इस बीच, आलोचकों का मानना है कि हरियाणा भाजपा प्रमुख के रूप में उनकी नियुक्ति से पड़ोसी राजस्थान में पार्टी की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है, जहां जाट समुदाय की अच्छी खासी मौजूदगी है। राजथान में 25 नवंबर को मतदान होना है।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सैनी की नियुक्ति की घोषणा से कुछ समय पहले धनखड़ से चंडीगढ़ में पत्रकारों ने पूछा था कि राज्य इकाई प्रमुख के रूप में उनका कार्यकाल जुलाई में समाप्त हो गया था और क्या कोई बदलाव की उम्मीद कर सकता है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए धनखड़ ने कहा कि राष्ट्रीय पार्टी में बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने पार्टी की पंजाब और चंडीगढ़ इकाई की हालिया नियुक्तियों का हवाला दिया। धनखड़, जो हरियाणा के पूर्व मंत्री भी हैं, उन्होंने कहा, “यहां कोई भी स्थायी नहीं है। यह कोई पारिवारिक पार्टी नहीं है। यह एक राष्ट्रीय पार्टी है, जिसमें बूथ इकाई प्रभारी से राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बदलाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।' खट्टर ने धनखड़ को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनके संगठनात्मक अनुभव से "देश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं को फायदा होगा"।

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