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Kanchanjunga Express Accident: ईद भूल यात्रियों को बचाने में जुट गए गांव वाले, बताया हादसे के बाद का दर्दनाक मंजर

Kanchanjunga Express Accident: ट्रेन हादसे में अभी तक नौ लोगों की मौत की खबर है। हादसे के तुरंत बाद पास के गांव वालों ने घायल यात्रियों की मदद की।
Written by: स्वीटी कुमारी
कोलकाता | June 18, 2024 09:58 IST
kanchanjunga express accident  ईद भूल यात्रियों को बचाने में जुट गए गांव वाले  बताया हादसे के बाद का दर्दनाक मंजर
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने की घायल यात्रियों की मदद (PTI)
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पश्चिम बंगाल में सोमवार सुबह हुए कंचनजंगा ट्रेन हादसे में नौ लोगों को जान गंवानी पड़ी। कंचनजंगा ट्रेन हादसा दार्जिलिंग के निर्मल जोट गांव के पास पास हुआ। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय गांव के लोग ईद मनाने की तैयारियां कर रहे थे, हालांकि हादसे के तुरंत बाद गांव के लोग सबकुछ छोड़कर ट्रेन में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने में जुट गए।

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निर्मल जोट गांव के निवासी मोहम्मद मोमिरुल (32) बताते हैं कि उन्होंने नमाज अदा करने के बाद अपना दिन शुरू ही किया था कि खबर आई कि एक मालगाड़ी ने सियालदह जा रही कांचनजंगा एक्सप्रेस को टक्कर मार दी।

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उन्होंने बताया, "मैं नमाज़ अदा करके वापस आया था और हम सभी घर में सेलिब्रेशन में व्यस्त थे, तभी अचानक हमने अचानक एक तेज़ आवाज सुनी। मैंने अपने घर के पास रेलवे ट्रैक्स की ओर दौड़ा और पटरी से उतरे हुए डिब्बों को देखा। मैंने मालगाड़ी के लोको पायलट को ट्रेन की पहियों के पड़े देखा। जब तक मैं ड्राइवर के पास पहुंचा, तब तक वह मर चुका था।"

गांव के करीब 150 लोगों ने की ट्रेन यात्रियों की मदद

हादसे के बाद निर्मल जोट गांव के करीब 150 लोग त्योहार भूल लोगों को बचाने में जुट गए। शुरुआत में एंबुलेंस और रेस्क्यू टीम न होने पर ग्रामीणन घायल यात्रियों को अपने वाहनों के जरिए पास के अस्पताल तक लेकर गए। ट्रेन हादसे के बाद कई गांव वाले यात्रियों को अपने घर लेकर गए और उनके आराम की व्यवस्था की।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो NDRF और आपदा मैनेजमेंट टीम हादसे के करीब एक घंटे बाद ट्रेन एक्सिडेंट वाली जगह पर पहुंच सकीं। निर्मल जोट गांव में रहने वाले एक अन्य व्यक्ति मोहम्मद नजरुल ने बताया कि उन्होंने हादसे वाली जगह पर छह शव देखे। उन्होंने बताया कि उन्होंने ट्रेन से करीब 35 यात्रियों को रेस्क्यू किया।

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तस्लीमा खातून नाम की एक लोकल महिला बताती हैं कि वो सुबह के समय ईद के लिए तैयार हो रही थीं लेकिन जैसे ही उन्होंने हादसे के बारे में सुना तो वो घटना स्थल पर पहुंच गईं। वहां एक बुजुर्ग महिला थी, जो घायल थी और खड़ी नहीं हो पा रही थी। तस्लीमा खातून बताती हैं, "मैंने उन्हें पानी के लिए रोते हुए देखा, वो असहाय नजर आ रही थीं। मैंने उसे सांत्वना दी और बाद में उनके रिश्तेदार सिलीगुड़ी से आए और उन्हें वापस ले गए।" तस्लीमा कहती हैं कि उन्होंने पिछले साल टीवी पर बालासोर हादसे की खबर देखी थी लेकिन कभी नहीं सोचा था कि वो अपनी आंखों से ऐसा कुछ देखेंगी।

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