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बेपरवाही, लापरवाही और गलत टाइमिंग... कंचनजंगा ट्रेन हादसा हो गया पूरी तरह डीकोड

दुर्घटना स्थल पर मौजूद रेलवे के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मालगाड़ी से पहले कम से कम चार ट्रेनें सिग्नल से गुज़री थीं।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: June 17, 2024 22:19 IST
बेपरवाही  लापरवाही और गलत टाइमिंग    कंचनजंगा ट्रेन हादसा हो गया पूरी तरह डीकोड
कंचनजंगा एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का शिकार हो गई।
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बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में हुए कंचनजंगा ट्रेन हादसे में 9 लोगों की जान चली गई। यह घटना मालगाड़ी के लोको पायलट की लापरवाही के कारण हो सकती है। इंडियन एक्सप्रेस को प्राप्त दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि लाइन पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम बंद था और रंगपानी स्टेशन प्रबंधक द्वारा ट्रेनों को पार करने के लिए ‘पेपर लाइन क्लीयरेंस’ दिया गया था।

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रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष जया वर्मा सिन्हा ने पत्रकारों से कहा, "प्रथम दृष्टया यह मानवीय भूल प्रतीत होती है, लेकिन जांच के बाद हमें और जानकारी मिलेगी। दुर्भाग्य से (मालगाड़ी का) चालक भी दुर्घटना में मारा गया। इसलिए हमारे पास यह जानने का कोई प्रामाणिक तरीका नहीं है कि वास्तव में क्या हुआ। हम स्थिति से जो भी समझ पाए हैं, उससे ऐसा लगता है कि सिग्नल की अनदेखी की गई थी।"

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दुर्घटना स्थल पर मौजूद रेलवे के एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि मालगाड़ी से पहले कम से कम चार ट्रेनें सिग्नल से गुज़री थीं। अधिकारी ने कहा, "ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम के लिए प्रोटोकॉल यह है कि अगर लाल बत्ती होती है, तो लोको पायलट को ट्रेन को एक मिनट के लिए रोकना होता है और फिर हॉर्न बजाते हुए धीमी गति से आगे बढ़ना होता है। इस मामले में, ऐसा लगता है कि पायलट ने सिग्नल पर अपनी गति धीमी नहीं की थी।"

सूत्र ने यह भी दावा किया कि लोको पायलट उत्तर प्रदेश में अपने मुख्यालय में आराम कर रहा था। उसने सुबह 6:30 बजे साइन इन किया और दुर्घटना सुबह 8.55 बजे हुई।निश्चित रूप से, घटना की व्यापक जांच अभी होनी बाकी है और ये रेलवे अधिकारियों द्वारा प्रथम दृष्टया निष्कर्ष हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि कवच (भारत में निर्मित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली जो दो ट्रेनों के एक ही लाइन पर चलने पर दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करती है) इस विशेष लाइन पर उपलब्ध नहीं थी।

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इस बीच लोको पायलटों के एक संघ ने रेलवे अधिकारियों द्वारा किए जा रहे दावों पर आपत्ति जताई है। भारतीय रेलवे लोको रनिंग मेन संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय पांधी ने कहा, "जब लोको पायलट की मौत हो चुकी है और सीआरएस जांच लंबित है, तो उसे जिम्मेदार घोषित करना बेहद आपत्तिजनक है।"

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