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मोबाइल फोन के पुर्जों पर आयात शुल्क 15 से घटाकर 10 फीसद किया

वित्त मंत्रालय ने सेल्युलर मोबाइल फोन के लिए स्क्रू, सिम साकेट या धातु की अन्य यांत्रिक वस्तुओं सहित कलपुर्जों के आयात पर शुल्क में कटौती संबंधी अधिसूचना 30 जनवरी को जारी की।
Written by: भाषा | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: February 01, 2024 07:09 IST
मोबाइल फोन के पुर्जों पर आयात शुल्क 15 से घटाकर 10 फीसद किया
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो- (इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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भारत ने मोबाइल फोन विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले बैटरी कवर, लेंस और सिम साकेट जैसे कलपुर्जों पर आयात शुल्क 15 फीसद से घटाकर 10 फीसद कर दिया है। इस कदम का मकसद स्थानीय उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना के साथ ही स्थानीय बाजारों में उत्पाद की कीमतें कम करना है।

वित्त मंत्रालय ने सेल्युलर मोबाइल फोन के लिए स्क्रू, सिम साकेट या धातु की अन्य यांत्रिक वस्तुओं सहित कलपुर्जों के आयात पर शुल्क में कटौती संबंधी अधिसूचना 30 जनवरी को जारी की। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि शुल्क को सुसंगत बनाने से से मोबाइल फोन विनिर्माण परिवेश मजबूत होगा।

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वैष्णव ने कहा कि सीमा शुल्क को तर्कसंगत बनाना उद्योग में बेहद आवश्यक निश्चितता और स्पष्टता लाता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआइ) के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि शुल्क में कटौती का भारत में निर्मित मोबाइल फोन की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि निर्यात के लिए मोबाइल फोन बनाने में उपयोग किए जाने वाले सभी कलपुर्जों तथा घटकों को पहले से ही विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), एडवांस आथराइजेशन जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत शून्य शुल्क पर आयात किया जा सकता है। एप्पल जैसी कंपनियां इन योजनाओं का लाभ लेती हैं।

श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार को इस बात पर गौर करना चाहिए कि शुल्क में कटौती का लाभ कीमतों में कटौती के जरिये घरेलू मोबाइल फोन खरीदारों को दिया जाता है या नहीं। इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रानिक्स एसोसिएशन (आइसीईए) के चेयरमैन पंकज महेंद्रू ने कहा कि यह भारत में मोबाइल विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण नीतिगत हस्तक्षेप है। महेंद्रू ने कहा कि इलेक्ट्रानिक 2024 में भारत का 5वां सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया है, जो कुछ साल पहले 9वें स्थान पर था।

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रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को 29 फरवरी के बाद सेवाएं देने से रोका

मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को किसी भी ग्राहक खाते, प्रीपेड साधन, वालेट एवं फास्टैग में 29 फरवरी, 2024 के बाद जमा या टाप-अप स्वीकार न करने का बुधवार को निर्देश दिया। हालांकि, पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (पीपीबीएल) के ग्राहकों को किसी भी ब्याज, कैशबैक या रिफंड को किसी भी समय जमा किया जा सकता है।

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आरबीआइ ने एक बयान में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम व्यापक प्रणाली आडिट रिपोर्ट और बाहरी आडिटरों की अनुपालन सत्यापन रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। इन रिपोर्टों से भुगतान बैंक में लगातार नियमों के गैर-अनुपालन और सामग्री पर्यवेक्षण से जुड़ी चिंताएं सामने आर्इं। आरबीआइ ने इसके पहले 11 मार्च, 2022 को पीपीबीएल को तत्काल प्रभाव से नए ग्राहकों को जोड़ने से रोक दिया था।

जनवरी में जीएसटी संग्रह पहुंचा 1.72 लाख करोड़ रुपए

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि जनवरी में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में जनवरी में 10.4 फीसद की बढ़ोतरी के बाद यह आंकड़ा 1.72 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। यह अब तक का दूसरा सबसे बड़ा मासिक संग्रह है और चालू वित्तीय वर्ष में यह तीसरा महीना है जब 1.70 लाख करोड़ रुपए या उससे अधिक का जीएसटी संग्रह हुआ है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक जनवरी (31 जनवरी, शाम 5:00 बजे तक) में एकत्रित सकल जीएसटी राजस्व 1,72,129 करोड़ रुपए है जो पिछले साल इसी अवधि की तुलना में संग्रहित 1,55,922 करोड़ रुपए के राजस्व पर 10.4 फीसद की सालाना वृद्धि दर्शाता है। अप्रैल 2023-जनवरी 2024 की अवधि के दौरान, संचयी सकल जीएसटी संग्रह में साल-दर-साल 11.6 फीसद की वृद्धि दर्ज हुई है।

अप्रैल 2022-जनवरी 2023 के दौरान संग्रहित 14.96 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले 16.69 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
पिछले साल अप्रैल में अब तक का सर्वाधिक मासिक जीएसटी संग्रह 1.87 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया था।

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