scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

सेहत: तपती धूप और लू के थपेड़ों से रहें सावधान

गर्मी के मौसम में जब तापमान उच्च स्तर की ओर बढ़ता है और गर्म हवा के थपेड़ों के साथ लू चलनी शुरू होती है तो वह शरीर में उथल-पुथल मचा देने का अहम कारक बन जाती है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 12, 2024 13:31 IST
सेहत  तपती धूप और लू के थपेड़ों से रहें सावधान
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
Advertisement

इस वर्ष मौसम से संबंधित तमाम अनुमानों में गर्मी के जिस स्तर की आशंका जताई जा रही है, उसमें इस बात की सख्त जरूरत है कि हम अपनी सेहत को लेकर सजग और सावधान रहें। जो लोग बेफिक्र रहते हैं, उन्हें कई बार यह पता भी नहीं चल पाता कि अगर वे थोड़ी देर पहले बिल्कुल ठीक महसूस कर रहे थे, लेकिन अब अचानक ही उन्हें मितली, उल्टी क्यों होने लगी! कुछ इधर-उधर का खाया नहीं, मगर दस्त का सिलसिलता क्यों चल पड़ा!

भीतर उथल-पुथल

दरअसल, किसी तरह तबीयत खराब हो जाने पर एक प्रचलित धारणा के तहत हम सोचने लगते हैं कि उल्टी या दस्त भी खराब जीवनशैली या सही खानपान का नतीजा हो सकता है। निश्चित तौर पर यह एक बड़ा कारण है, लेकिन गर्मी के मौसम में जब तापमान उच्च स्तर की ओर बढ़ता है और गर्म हवा के थपेड़ों के साथ लू चलनी शुरू होती है तो वह शरीर में उथल-पुथल मचा देने का अहम कारक बन जाती है।

Advertisement

तेज गर्मी और उच्च तापमान शरीर में पानी की मात्रा को असंतुलित करता है और इसका सीधा असर पेट की सामान्य अवस्था पर पड़ता है। ऐसे में खाने-पीने के मामले में कुछ अवांछित तत्त्व पेट में चला जाता है तो उसकी वजह से पैदा हुए विषैले तत्त्व तेजी से उथल-पुथल मचाते हैं और इसके साथ ही उल्टी और दस्त जब शरीर से पानी निकलने का जरिया बनता है तब व्यक्ति बेहद कमजोर और कई तरह की बीमारियों से घिर जाने के साथ-साथ जानलेवा जोखिम से भी गुजर सकता है।

बचाव ही बेहतर

ऐसे में शरीर को तापमान के उतार-चढ़ाव के बीच संतुलित और स्वस्थ स्थिति में रखने के लिए बचाव ही सबसे बेहतर जरिया है। घर और काम की जगहों को ठंडा और हवादार रखा जाए। दोपहर में तापमान काफी ऊंचा होता है, इसलिए कमरे की खिड़कियां और दरवाजों को बंद करके रखना वक्त की जरूरत है। तेज धूप में घर से बाहर निकलने से बचने के अलावा, जरूरत हो तो दो बार नहाया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीने को लेकर सबसे ज्यादा सजग रहने की जरूरत है, क्योंकि अकेला यह उपाय गर्म हवा के थपेड़ों या लू से बचाव का सबसे कारगर हथियार होता है।

Advertisement

अपना खयाल, अपने हाथ

हकीकत यह भी है कि हमें कई बार रोजमर्रा के ऐसे काम भी निपटाने पड़ते हैं, जिन्हें टालना मुमकिन नहीं होता। ऐसे में अगर किन्हीं हालात में अगर लू की चपेट में आ ही गए और उल्टी और दस्त की मुश्किल से घिर ही गए तो उसके बाद उसके निवारण को लेकर सक्रिय होना ही सबसे बेहतर रास्ता है। लगातार पानी पीना, हल्का खाना लेना सबसे पहली जरूरत है।

Advertisement

नारियल पानी, जीवनरक्षक घोल के साथ-साथ तरल पदार्थों पर जोर देना शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित रखने तक जारी रखना चाहिए। जैसे ही शरीर में पानी पर्याप्त मात्रा में पहुंचता है, वह खुद को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में लग जाता है। यह प्राकृतिक व्यवस्था है। इसलिए अपनी ओर से गर्म हवा के थपेड़ों या लू से बचने के हर प्रयास करना चाहिए।

लेकिन इसकी चपेट में आने के बाद अपने स्तर पर सामना करने के लिए बेल, पपीते का सेवन करने अलावा चीनी, नमक को उचित मात्रा में पानी में मिला कर जीवनरक्षक घोल तैयार किया जा सकता है। मसूर का सूप, मूंग की दाल, दही, दलिया, खिचड़ी, खीरा-ककड़ी आदि को भोजन के तौर पर लिया जा सकता है। बच्चों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। बचाव के इंतजाम और राहत के उपायों के साथ-साथ इस बात को लेकर भी तैयार रहना चाहिए कि जरूरत पड़ते ही चिकित्सक के पास जाया जाए।

(यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है। उपचार या स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए विशेषज्ञ की मदद लें।)

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो