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Gulberg Society जहां 2002 में मारे गए गए 69 लोग, वहां बजी शहनाई, 22 सालों बाद लौटा जश्न का माहौल

गुलबर्ग सोसाइटी 22 सालों के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर गुलजार है। यहां शहनाई बज रही है और खुशियां लौट आई हैं। गोधरा दंगे के बाद वारान हुईं गलियां एक बार फिर चहक रही हैं।
Written by: Sohini Ghosh | Edited By: Jyoti Gupta
अहमदाबाद | Updated: March 06, 2024 16:38 IST
gulberg society जहां 2002 में मारे गए गए 69 लोग  वहां बजी शहनाई  22 सालों बाद लौटा जश्न का माहौल
Gulberg Society में 22 साल बाद जश्न का माहौल। (Express Photo)
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साल-2002, जगह- गुलबर्ग सोसाइटी…जहां 22 साल पहले दंगे में 69 लोग मारे गए थे। गुजरात का वह गोधरा कांड, जिसके बारे में सोचकर अभी भी मन सिहर उठता है। जिस जगह पर उस समय सन्नाटे भी चीख रहे थे। गलियां खामोशी से रो रही थीं। जहां ठंडी हवा भी थपेड़े की तरह लग रही थी। सड़कें वीरान सुनसान... मुंडेर पर बैठा कबूतर जैसे किसी की रहा देख रहा हो मगर वहां 22 सालों तक सन्नाटा छाया रहा। सोचिए उस गली ने अपनों के लौटने का कितना इंतजार किया होगा। जहां लोगों का हुजुम था वहां कबसे वहां खामोशी का बसेरा था। इस जगह पर अब 22 सालों के गमगीन माहौल के बाद खुशियां लौटी हैं। आखिर, मिस्बाह का निकाह का जो है। सारे मोहल्ले में रौनक ही रौनक है। आज यहां की गलियां गुलजार हैं।

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दरअसल, 28 फरवरी 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों में इस परिवार ने 19 लोगों को खो दिया। जिनमें 6 बच्चे भी शामिल थे। यहां तक की रफीक की पत्नी और बच्चे की भी दंगों में मौत हो गई थी। इसके बाद उनका मध्य प्रदेश की रहने वाली तस्लीम से निकाह हुआ। गुलबर्ग सोसायटी में दाखिल होते ही उनका घर दिखाई दे देता है। घर के लोग साल भर में एक बार यहां इकट्ठा होते हैं और उस भयानक मंजर को याद करते हैं जब सब कुछ तबाह हो गया था।

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22 साल बाद गुलजार हुईं ये गलियां

अब 22 सालों बाद इन गलियों में गुलाबी और सफेद मेहराब लगे हैं। मेन गेट पर लाल और नीले जूट के कालीन बिछे हैं। रंग-बिरंगी लड़ियां लगाई गई हैं। दिवारों को पेंट किया गया है। चमकीली झालरें मन को मोह रही हैं। वहीं पास के बड़े-बड़े बर्तनों में पकवान बन रहे हैं। हर तरफ मनमोहक खुशबू फैल रही है।

10 साल की मिस्बाह के निकाह ने लौटाईं खुशियां

इस परिवार में 19 साल की बेटी का निकाह है। कुनबे के सभी लोग जो यह मोहल्ला छोड़कर कबका चले गए थे सभी इकट्ठा हुए हैं। इस तरह पुरानी गुलबर्ग सहकारी हाउसिंग सोसायटी में सालों में बाद खुशियां छाईं हुई हैं। एक तरफ हम तुम्हारे हैं सनम का एक विवाह गीत "तुम जब ऐसे शर्मीती हो, दूल्हे का धड़कता है सीना… बज रहा है तो दूसरी और लड़कियां 19 साल की दुल्हन मिस्बाह को चिढ़ा रही हैं। उसने अपनी हल्दी के फंक्शन के लिए पीले रंग का सूट पहन रखा है। वह बहुत प्यारी लग रही है।

समारोह में पहुंचे लोग यही कह रहे हैं कि जो जगह 22 साल पहले वीरान हो गई थी आज वहां मिस्बाह की निहाक के फंक्शन ने जिंदगी लौटा दी है। मिस्बाह का निकाह मध्य प्रदेश के बड़वानी में 22 साल के इंजीनियर शोएब तंवर के साथ हो रहा है। शादी के बाद कपल पुणे में रहने वाले हैं।

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हर तरफ जश्न का माहौल है। महिलाएं एक-दूसरे का श्रृंगार कर रही हैं। चहल-पहल है। संगीत का माहौल है। खुशनुमा माहौल को देखकर कुनबे के लोग भावुक हो रहे हैं।

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यह वही जगह हैं जहां 27 फरवरी 2002 को गोधरा ट्रेन अग्निकांड के एक दिन बाद हुए दंगों के दौरान भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया। गुलबर्ग सोसायटी में पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी सहित 59 लोग मारे गए थे। 2016 में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 24 लोगों को दोषी ठहराया और उनमें से 11 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। दंगे के बाद यहां रहने वाले 17 परिवार कहीं और चले गए। अब परिवार के सभी लोग इस शादी में शरीक होने आए हैं।

मंसूरी परिवार ने गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से आए 600 मेहमानों का स्वागत किया। रफीक शादी की तैयारियों में लगे हुए हैं। कुल मिलाकर वीरान जगह पर एक बार फिर रौनक लौट आई है। इस जश्न ने परिवार के लोगों के दिलों पर मरहम का काम किया है। परिवार के लोग, रिश्तेदार औऱ पड़ोसी सभी मिलकर अब जश्न मना रहे हैं। यहां सबने किसी ने किसी अपने को गोधरा दंगे में खोया है।

शादी में शामिल होने आए 50 साल के फ़िरोज़खान सईदखान पठान ने भी दंगों में अपनी मां सहित अपने परिवार के कई सदस्यों को खो दिया था। वहीं 33 साल की मुबारक मंसूरी अपनी मां और दो भाई-बहनों की हत्या के बाद जयपुर चले गए थे। इस शादी के बहाने एक बार सभी लोग एक साथ आए हैं और खुशी मना रहे हैं। वह गली एक बार फिर हंस रही हैं, जो सन्नाटे में चली गई थी।

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