scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

गोदरेज परिवार में 127 साल बाद बंटवारा, जानें 'Godrej' ब्रांड बनने के पीछे की कहानी

Godrej Family Splits: ग्रुप की स्थापना 1897 में अर्देशिर गोदरेज और पिरोजशा बुर्जोरजी गोदरेज ने की थी।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: May 01, 2024 10:10 IST
गोदरेज परिवार में 127 साल बाद बंटवारा  जानें  godrej  ब्रांड बनने के पीछे की कहानी
उद्योगपति आदि गोदरेज। (इमेज-एक्सप्रेस आर्काइव)
Advertisement

Godrej Family Splits: कहा जा सकता है कि गोदरेज देश के मशहूर फैमिली बिजनेस में से एक है। रिलायंस, टाटा, वाडिया, इन सबमें गोदरेज का भी अच्छा नाम है। साबुन से लेकर घरेलू उपकरणों और रियल एस्टेट तक, यह कई क्षेत्रों में फैल गया है। हालांकि, अब गोदरेज ग्रुप बंटने वाला है। गोदरेज फैमिली ने 127 साल पुराने ग्रुप को दो भागों में बांटने को लेकर समझौता किया है। इस समझौते के तहत एक हिस्सा 82 साल के आदि गोदरेज और उनके भाई नादिर का है। वहीं, दूसरा चचेरे भाई जमशेद और बहन स्मिता गोदरेज को मिला है।

आदि और नादिर ने गोदरेज इंडस्ट्रीज को अपने पास में रखा है। इसमें पांच लिस्टेड कंपनी हैं। जमशेद और स्मिता को गैर-लिस्टेड कंपनी गोदरेज एंड बॉयस और मुंबई में उससे जुड़ी प्रमुख संपत्ति सहित लैंड बैंक मिला है।

Advertisement

गोदरेज ग्रुप में बंटवारा

अब बात गोदरेज इंडस्ट्रीज समूह में लिस्टेड कंपनियों की करें तो इसमें गोदरेज इंडस्ट्रीज, गोदरेज कंज्यूमर, गोदरेज प्रॉपर्टीज, गोदरेज एग्रोवेट और एस्टेक लाइफसाइंसेज शामिल हैं। इनके चेयरमैन नादिर गोदरेज होंगे और नियंत्रण आदि गोदरेज, नादिर और परिवार करेगा। आदि के 42 साल के बेटे पिरोजशा गोदरेज गोदरेज इंडस्ट्रीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष होंगे। वे अगस्त 2026 में नादिर की जगह ले लेंगे।

दूसरी तरफ गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप में गोदरेज एंड बॉयस और उसके सहयोगी शामिल हैं, जिसकी एयरोस्पेस और विमानन से रक्षा, फर्नीचर और आईटी सॉफ्टवेयर तक कई उद्योगों में मौजूदगी है। इसको जमशेद गोदरेज के द्वारा चलाया जाएगा। उनकी बहन स्मिता की बेटी न्यारिका होल्कर इसकी कार्यकारी निदेशक होंगी। इस ग्रुप के पास ही मुंबई में 3400 एकड़ का लैंड बैंक भी है।

गोदरेज नाम के पीछे की कहानी

ग्रुप की स्थापना 1897 में अर्देशिर गोदरेज और पिरोजशा बुर्जोरजी गोदरेज ने की थी। अर्देशिर एक पारसी थे जिनका जन्म 1868 में बॉम्बे (अब मुंबई के रूप में जाना जाता है) में हुआ था। वह अपने सभी भाई बहनों में सबसे बड़े थे। जब अर्देशिर लगभग तीन साल के थे, तब उनके पिता बुर्जोरजी गुथेराजी ने परिवार का नाम बदलकर गोदरेज रख दिया और इस तरह कंपनी का नाम भी 'गोदरेज' पड़ा गया था। लॉ स्कूल से पढ़ने के बाद, अर्देशिर को 1894 में बॉम्बे सॉलिसिटर की एक फर्म में काम मिला। हालांकि, उन्होंने कुछ समय बाद यह प्रोफेशन छोड़ दिया।

Advertisement

इसके बाद उन्होंने एक केमिस्ट की दुकान पर काम किया। यहां पर ही काम करते-करते उन्होंने मन बना लिया था कि वह अपना खुद का बिजनेस शुरू करेंगे। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने पैसे जुटाकर जगह तलाशनी शुरू कर दी और ताले बनाने के काम में लग गए। उनके ताले काफी लोकप्रिय हुए लेकिन अर्देशिर को और आगे बढ़ना था और वह अपनी मंजिल की ओर बढ़ते रहे। 1897 में कंपनी स्थापित होने के कुछ साल बाद, उन्होंने साबुन बनाना शुरू किया। यह दुनिया में अब तक का पहला एनिमल-फैट-फ्री साबुन है।

Advertisement

गोदरेज ने 1923 में स्टील की अलमारी के साथ-साथ फर्नीचर बनाने का काम भी शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे इसका विस्तार होता गया। शादी और विवाह में गोदरेज के उत्पादों की काफी चर्चाएं होने लगी। साल 1952 में गोदरेज ने सिंथॉल साबुन बनाया। इसकी वजह से वह भारत में दूसरे सबसे बड़े साबुन निर्माता बन गए। 1958 में कंपनी ने रेफ्रिजरेटर लॉन्च किया। 1990 के दशक की बात करें तो उन्होंने गोदरेज प्रॉपर्टीज की स्थापना की। इसके साथ ही कंपनी ने रियल स्टेट के क्षेत्र में भी कदम रखा। इसके एक साल बाद कंपनी ने गोदरेज एग्रोवेट की स्थापना करके कृषि व्यवसाय में कदम रखा। 1997 में गोदरेज ने एक समूह के रूप में अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे किए।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 चुनाव tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो