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चुनावी बांड की दूसरी बड़ी खरीदार कंपनी पर एफआइआर

रिश्वत मामले में मेघा इंजीनियरिंग के खिलाफ सीबीआइ की कार्रवाई। कंपनी के 174 करोड़ के बिलों को मंजूरी देने में 78 लाख रुपए की रिश्वत देने का है आरोप। कुल 966 करोड़ रुपए के बांड खरीदे थे इस कंपनी ने, भाजपा को सबसे ज्यादा 586 करोड़ रुपए का चंदा दिया।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: April 14, 2024 13:53 IST
चुनावी बांड की दूसरी बड़ी खरीदार कंपनी पर एफआइआर
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ कथित तौर से रिश्वत देने के एक मामले में प्राथमिकी (एफआइआर) दर्ज की है। यह कंपनी चुनावी बांड की दूसरी सबसे बड़ी खरीदार है और इसने 966 करोड़ रुपए का चुनावी चंदा दिया था। इसमें भाजपा को सबसे ज्यादा 586 करोड़ रुपए का चंदा शामिल है।

आरोप है कि जगदलपुर एकीकृत इस्पात संयंत्र से संबंधित कार्यों के लिए मेघा इंजीनियरिंग के 174 करोड़ रुपए के बिलों को मंजूरी देने में करीब 78 लाख रुपए की रिश्वत दी गई थी। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को कहा कि सीबीआइ की प्राथमिकी में एनआइएसपी और एनएमडीसी के आठ पूर्व व मौजूदा अधिकारियों बाकी पेज 8 पर

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और मेकान के दो अधिकारियों को भी इस मामले में नामित किया गया है। सीबीआइ ने 10 अगस्त, 2023 को एकीकृत इस्पात संयंत्र जगदलपुर में इंटेक वेल, पंप हाउस और क्रास-कंट्री पाइपलाइन के कार्यों से संबंधित 315 करोड़ रुपए की परियोजना में कथित रिश्वतखोरी के बारे में प्रारंभिक जांच रपट दर्ज की थी।

सीबीआइ ने एनआइएसपी और एनएमडीसी लिमिटेड के जिन आठ अधिकारियों को प्राथमिकी में नामित किया है, उनमें सेवानिवृत्त कार्यकारी निदेशक प्रशांत दाश, निदेशक (उत्पादन) डीके मोहंती, डीजीएम पीके भुइयां, डीएम नरेश बाबू, वरिष्ठ प्रबंधक सुब्रो बनर्जी, सेवानिवृत्त सीजीएम (वित्त) एल कृष्ण मोहन, जीएम ( वित्त) के राजशेखर, प्रबंधक (वित्त) सोमनाथ घोष शामिल हैं। आरोप है कि इन्होंने 73.85 लाख रुपए की रिश्वत ली थी।

इसी तरह मेकान लिमिटेड के दो अधिकारियों में एजीएम संजीव सहाय और डीजीएम के इलावर्सू को भी नामित किया गया है। आरोप है कि इन दोनों अधिकारियों ने एनएमडीसी लिमिटेड द्वारा एमईआइएल को 73 बिलों के बदले में 5.01 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त किया था।

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इस मामले में अब मेघा इंजीनियरिंग को भी आरोपी बनाया गया है। यह कंपनी उस वक्त चर्चा में आई थी, जब निर्वाचन आयोग ने गत 21 मार्च को चुनावी बांड के आंकड़े जारी किए थे। आंकड़ों के अनुसार, मेघा इंजीनियरिंग चुनावी बांड की दूसरी सबसे बड़ी खरीदार थी और उसने भाजपा को करीब 586 करोड़ रुपए की सबसे अधिक राशि का दान दिया था।

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कंपनी ने बीआरएस को 195 करोड़, डीएमके को 85 करोड़ और वाईएसआरसीपी को 37 करोड़ रुपए का चुनावी चंदा दिया था। इसके अलावा तेदेपा को इस कंपनी से करीब 25 करोड़, जबकि कांग्रेस को 17 करोड़ रुपए चंदे के रूप में मिले थे।

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