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Farmers Protest: बॉर्डर बंद करने और इंटरनेट निलंबन के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल, जानिए और किन मुद्दों का किया गया जिक्र

Farmers Protest: याचिकाकर्ता ने हरियाणा अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाइयों पर चिंता व्यक्त की। जिसमें अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जैसे कई जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करना शामिल है।
Written by: न्यूज डेस्क
चंडीगढ़ | Updated: February 13, 2024 08:54 IST
farmers protest  बॉर्डर बंद करने और इंटरनेट निलंबन के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल  जानिए और किन मुद्दों का किया गया जिक्र
Punjab Farmers Protest: किसानों के 'दिल्ली चलो' विरोध मार्च के आह्वान पर सोमवार को अंबाला में अर्धसैनिक बलों के जवानों ने पंजाब-हरियाणा सीमा को सील कर दिया। (ANI)
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Punjab-Haryana High Court: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में पंजाब से दिल्ली तक विरोध मार्च आयोजित करने के किसान यूनियनों की तैयारियों के जवाब में हरियाणा के कई जिलों में इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और बॉर्डर को बंद करने को चुनौती दी गई है। इस मामले को सोमवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया की बेंच के सामने पेश किया गया। जिन्होंने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई आज फिर होगी।

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हाई कोर्ट में यह याचिका पंचकुला के रहने वाले उदय प्रताप सिंह ने दाखिल की है। जो हाई कोर्ट के वकील भी हैं। उन्होंने अपनी याचिका में हरियाणा और पंजाब के बीच विशेष रूप से अंबाला के पास शंभू में अवैध रूप से सीमा सील करने का जिक्र किया है।

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याचिका में यह भी कहा गया है कि 13 फरवरी को किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च, कई किसान संघों द्वारा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए एक कानून बनाने सहित अपनी वैध मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव डालने के लिए आयोजित है। शांतिपूर्ण विरोध करने के उनके लोकतांत्रिक अधिकार की अभिव्यक्ति है।

इसके अतिरिक्त याचिकाकर्ता ने हरियाणा अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाइयों पर चिंता व्यक्त की। जिसमें अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जैसे कई जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और बल्क एसएमएस को निलंबित करना शामिल है। याचिका में कहा गया है कि ये उपाय नागरिकों को सूचना और संचार के अधिकार से वंचित करके स्थिति को और खराब कर देते हैं।

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याचिका में कहा गया है कि ये उपाय कानून के शासन द्वारा शासित लोकतांत्रिक समाज की नींव को कमजोर करने का जोखिम उठाते हैं, जहां मानवाधिकारों और कानूनी सिद्धांतों का सम्मान होना चाहिए। कानून के शासन द्वारा निर्देशित देश में, कानून प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई कानूनी मानकों के अनुरूप होनी चाहिए और मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए। कीलों की परतें, कंक्रीट की दीवारें, विद्युतीकरण और कांटेदार तार की बाड़ जैसी बाधाओं को लागू करना गलत है।

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