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'मैं व्हिस्की का प्रशंसक हूं', जब भरे कोर्ट रूम में वकील ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के सामने कही यह बात, फिर जानिए क्या हुआ?

Supreme Court: सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने स्कॉच पीने के अपने शौक के बारे में बताते हुए इसके लिए मुसीबत में फंसने का किस्सा सुनाया।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: April 04, 2024 11:10 IST
 मैं व्हिस्की का प्रशंसक हूं   जब भरे कोर्ट रूम में वकील ने सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के सामने कही यह बात  फिर जानिए क्या हुआ
Supreme Court: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़। (PTI)
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में शराब और इंडस्ट्रियल एल्कोहल को लेकर को सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत की नौ जजों की बेंच इस मामले को सुन रही थी। मामले की सुनवाई के दौरान मंगलवार को आश्चर्यजनक रूप से एक अजीबो-गरीब घटनाक्रम सामने आया। इस दौरान रंग-बिरंगे बालों के साथ कोर्ट में पहुंचे वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी के एक मजाकिया एक्ट का सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ विरोध नहीं कर सके।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने अपनी चर्चा अति-उत्साही होली समारोह और पोते-पोतियों को रंगों के लिए दोष देते हुए की। द्विवेदी ने कहा कि मेरे रंग-बिरंगे सफेद बालों के लिए क्षमा याचना। आसपास बहुत सारे बच्चे और पोते-पोतियां होने का यह नुकसान है। आप खुद को नहीं बचा सकते।

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इस पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने मुस्कराते हुए पूछा- इसका शराब से कोई लेना-देना नहीं?

इस पर द्विवेदी ने हंसते कहा, "ऐसा होता है। होली का मतलब आंशिक रूप से शराब है…और मुझे कबूल करना चाहिए… मैं व्हिस्की का एक प्रशंसक हूं।"

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने स्कॉच पीने के अपने शौक के बारे में बताते हुए इसके लिए मुसीबत में फंसने का किस्सा सुनाया।

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द्विवेदी ने कहा, 'मुझे सिंगल माल्ट व्हिस्की पसंद है। मैं एडिनबर्ग गया, जो सिंगल माल्ट व्हिस्की का मक्का है। मैं कुछ बर्फ के टुकड़े डालना चाहता था और वेटर नाराज हो गया, वह कह रहा था कि मुझे इसे नीट पीना होगा और मैं इसमें कुछ भी नहीं मिला सकता। इसके लिए अलग ग्लास होता है..पहली बार मुझे इसके बारे में पता चला।'

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औद्योगिक शराब उत्पादन पर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों के अतिव्यापीकरण के गंभीर मुद्दे से जूझ रही नौ जजों की संविधान पीठ ने इस हल्के-फुल्के आदान-प्रदान को देखा तो कोर्ट रूम में ठहाके लगने लगे।

सवाल यह है कि क्या "औद्योगिक अल्कोहल" हर किसी के पसंदीदा वीक एंड टिपल "नशीली शराब" जैसा ही दानव है? उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील द्विवेदी ने तर्क दिया कि शराब के सभी प्रकार, औद्योगिक प्रकार से लेकर उत्सव प्रकार (व्हिस्की,वोदका,पूरे समूह)तक, राज्य के नियंत्रण में आते हैं।

एक जज, जो स्पष्ट रूप से शराब की राजस्व पैदा करने वाली शक्ति से अपरिचित नहीं थे। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "राज्यों का तर्क यह है कि चाहे नशीला पेय मनुष्यों को खुशी देता है या नहीं, इसे राज्य के राजस्व में खुशी लानी चाहिए।"

एक अन्य जज ने भी द्विवेदी के साथ हल्की-फुल्के मूड में एक ऐसा सवाल किया, जिसने कोर्ट को हंसी ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आपने समझाया कि कैसे कुछ अल्कोहल का स्वाद सुधारने के लिए उसे पुराना करना आवश्यक होता है, जबकि अन्य को नहीं, कुछ का रंग गोरा होता है जबकि अन्य का रंग गहरा होता है। क्या उस सामग्री के प्रदर्शन से मदद मिलेगी?

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