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Electoral Bonds Data: BRS से लेकर केजरीवाल की AAP तक… सत्ताधारी क्षेत्रीय दलों को भी मिला छप्पर फाड़ चंदा, चुनावी बॉन्ड में हुआ बड़ा खुलासा

Electoral Bonds: इलेक्टोरल बॉन्ड का डाटा सामने आने के बाद पता चला है कि सबसे ज्यादा चंदा केंद्र की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को मिला है लेकिन क्षेत्रीय दल भी चंदा हासिल करने में कोई बहुत ज्यादा पीछे नहीं हैं।
Written by: लालमनी वर्मा
नई दिल्ली | March 16, 2024 21:56 IST
electoral bonds data  brs से लेकर केजरीवाल की aap तक… सत्ताधारी क्षेत्रीय दलों को भी मिला छप्पर फाड़ चंदा  चुनावी बॉन्ड में हुआ बड़ा खुलासा
Electoral Bonds Data News : चुनाव आयोग ने SBI द्वारा दिया गया सारा डाटा सार्वजनिक कर दिया है। (सोर्स - PTI)
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते चुनावी बॉन्ड देश में अवैध घोषित हो चुके हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कोर्ट के आदेश पर ही चुनावी बॉन्ड का डाटा चुनाव आयोग के साथ शेयर किया था और बाद उसे चुनाव आयोग ने सार्वजनिक कर दिया है। इसके बाद से देश की सियासत में बवाल मचा हुआ है। विपक्षी दल लगातार केंद्र की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं कि बीजेपी को इतना कैसे मिले और उसने यह चंदा ईडी सीबीआई इनकम टैक्स की मदद से इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदे की उगाही की थी।

इलेक्टोरल बॉन्ड जारी होने के बाद सभी का ध्यान बीजेपी को मिले चंदे की ओर है लेकिन इस डाटा पर नजर डालने में यह भी सामने आता है कि अलग-अलग राज्यों में सरकार चला रहे कई क्षेत्रीय दलों को उनके शासनकाल के दौरान भर-भर के चंदा मिला है, जिसमें आम आदमी पार्टी से लेकर बीआरएस, YRSCP और डीएमके जैसे दल शामिल हैं।

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सबसे पहले टीएमसी पर नजर डालें तो महज पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी होने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस को करीब 2019 से उसका चुनावी बांड मोचन, कुल 1,610 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जो कि राष्ट्रीय दल कांग्रेस से भी कहीं ज्यादा है। कांग्रेस को 1420 करोड़ रुपये के करीब का चंदा ही मिला है, जो बताता है कि टीएमसी ने सत्ता में रहते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड से खूब चंदा हासिल किया है।

तेलंगाना में BRS को खूब मिला चंदा

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने पिछले साल अपनी सत्ता खो दी थी लेकिन इसके पहले वह 10 साल तक तेलंगाना में शासन कर चकी है। केसीआर की इस पार्टी ने अप्रैल 2019 और जनवरी 2024 के बीच चुनावी बांड से 1,214 करोड़ रुपये जुटाए हैं। टीएमसी को छोड़कर , बीआरएस 2019 के बाद से क्षेत्रीय दलों के बीच चुनावी बांड के माध्यम से सबसे अधिक दान हासिल करने वाली पार्टी है। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को केवल 37 करोड़ रुपये ही मिले थे।

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ओडिशा में बीजेडी को हुआ फायदा

बात ओडिशा की करें तो वहां पिछले दो दशक से बीजू जनता दल और नवीन पटनायक का एकछत्र राज चल रहा है। सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजेडी) को इस अवधि में 775 करोड़ रुपये का चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिला है, जिसमें से 155 करोड़ रुपये की एक बड़ी रकम जुलाई 2023 में आई थी।

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TDP को कितना मिला चंदा?

तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) आंध्र प्रदेश में सत्ता में थी और उसका तेलंगाना में भी कुछ प्रभाव रहा था। उसने अप्रैल 2019 से जनवरी 2024 तक चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 219 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए थे। कुल मिलाकर पार्टी को अप्रैल 2019 के बीच 100 करोड़ रुपये मिले। अब से कुछ दिनों पहले आंध्र प्रदेश में एक साथ होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी के साथ संभावित गठबंधन की चर्चा के बीच, टीडीपी को अकेले जनवरी 2024 के एक महीने में 118 करोड़ रुपये मिले थे।

DMK को कब कितना मिला चंदा

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने अप्रैल 2019 से चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 639 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसमें 103 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा हिस्सा राज्य के विधानसभा चुनावों के लिए मतदान के एक दिन बाद 7 अप्रैल, 2021 को आया था। 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान उसके नेतृत्व वाले गठबंधन ने AIADMK को भाजपा के समर्थन के बावजूद जीत हासिल की। डीएमके को चुनावी बांड के माध्यम से उस दौरान महज केवल 9 करोड़ रुपये मिले थे।

जेडीएस और जेडीयू को भी इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए मिला चंदा

जनता दल (सेक्यूलर) को 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान केवल 2.5 करोड़ रुपये मिले। कर्नाटक में विधानसभा चुनावों से एक महीने पहले 17 और 18 अप्रैल, 2023 को उसने 41 करोड़ उठाए थे। जेडीयू की बात करें तो उसे 2019 से लेकर अब तक करीब 14 करोड़ का चंदा इलेक्टोरल बॉन्डे जरिए हासिल किया था।

अकाली दल का सिकुड़ना और आप का फायदा

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने पंजाब में 2019 का लोकसभा चुनाव एनडीए पार्टनर के रूप में लड़ा और चुनाव के दौरान 6.7 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खर्च किए थे। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले, जिसमें अकाली दल ने बसपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, उसे जनवरी 2022 में केवल 50 लाख रुपये मिले थे। कुल मिलाकर अकाली दल ने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 7.26 करोड़ रुपये जुटाए थे।

आम आदमी पार्टी (आप) को इलेक्टोरल बॉन्ड से मिले चंदे की बात की जाए तो उसने 2021 में चुनावी बॉन्ड के जरिए केवल 1.85 करोड़ रुपये भुनाए थे, लेकिन पंजाब चुनाव से पहले पार्टी को अकेले जनवरी 2022 में 3.4 करोड़ रुपये मिले। अपनी जीत के बाद, AAP ने 2022 में अक्टूबर नवंबर और दिसंबर के दौरान 44.45 करोड़ रुपये के 126 चुनावी बॉन्ड कैश करवाए थे।

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