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Electoral Bonds: बीजेपी को 2022-23 में चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले 1300 करोड़ रुपये, जानिए कांग्रेस से कितना गुना ज्यादा; क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड?

Electoral Bonds 2022-23: वित्त वर्ष 2021-22 की बात करें तो बीजेपी को कुल 1775 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: February 11, 2024 11:07 IST
electoral bonds  बीजेपी को 2022 23 में चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले 1300 करोड़ रुपये  जानिए कांग्रेस से कितना गुना ज्यादा  क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड
Electoral Bonds: बीजेपी को चुनावी बॉन्ड से मिले 1300 करोड़ रुपये। (एक्सप्रेस फोटो)
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Electoral Bonds 2022-23: भाजपा को 2022-23 में चुनावी बॉन्ड के जरिए लगभग 1300 करोड़ रुपये मिले हैं। यह पैसे इसी अवधि में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को मिली धनराशि से सात गुना ज्यादा है। इलेक्शन कमीशन को सौंपी गई पार्टी की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में बीजेपी को कुल 2120 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिसमें से 61 फीसदी चुनावी बॉन्ड से हासिल हुए।

वित्त वर्ष 2021-22 की बात करें तो बीजेपी को कुल 1775 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ था। वर्ष 2022-23 में पार्टी की कुल आय 2360.8 करोड़ रुपये रही, जो वित्त वर्ष 2021-22 में 1917 करोड़ रुपये थी। दूसरी ओर कांग्रेस को चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 171 करोड़ रुपये की आय हुई, जो वित्त वर्ष 2021-22 में 236 करोड़ रुपये से कम थी।

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बीजेपी और कांग्रेस मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी हैं। राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त पार्टी समाजवादी पार्टी को 2021-22 में चुनावी बॉन्ड के जरिए 3.2 करोड़ रुपये की आय हुई थी। वर्ष 2022-23 में उसे इन बॉन्ड के जरिये कोई धनराशि नहीं मिली थी।

वहीं एक अन्य राज्य स्तर पर मान्यता प्राप्त पार्टी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को 2022-23 में चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 34 करोड़ रुपये मिले, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 10 गुना अधिक राशि है। भाजपा को पिछले वित्त वर्ष में ब्याज के तौर पर 237 करोड़ रुपये की आय हुई जो कि वर्ष 2021-22 के मुकाबले 135 करोड़ रुपये ज्यादा है।

चुनाव और सामान्य प्रचार पर अपने कुल खर्च में से बीजेपी ने हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल के लिए 78.2 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जो 2021-22 में खर्च हुए 117.4 करोड़ रुपये से कम है। पार्टी ने उम्मीदवारों को वित्तीय सहायता के रूप में 76.5 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया, जो 2021-22 में 146.4 करोड़ रुपये से कम है। पार्टी ने इस सहायता को कुल भुगतान मद में दिखाया है।

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इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है?

पहली बार 2017 में केंद्रीय बजट सत्र के दौरान इलेक्टोरल बॉन्ड लाने की घोषणा की गई थी। इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए कंपनी, कारोबारी और आम लोग बिना अपनी पहचान बताए राजनीतिक दलों को चंदा दे सकते हैं। इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम भारतीय नागरिकों या भारत में निगमित निकायों, दोनों को बॉन्ड खरीदने की अनुमति देते हैं।

आमतौर पर 1000 रुपये से एक करोड़ रुपये तक के मूल्यवर्ग में बेचे जाने वाले, इन बॉन्डों को केवाईसी मानदंडों का अनुपालन करने वाले खातों के माध्यम से अधिकृत एसबीआई शाखाओं से खरीदा जा सकता है। बांड प्राप्त करने के 15 दिनों के भीतर राजनीतिक दल उसे अपनी पार्टी के अधिकृत बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं। ध्यान रहे, इलेक्टोरल बॉन्ड पूरे वर्ष में कभी भी नहीं खरीदा जा सकता है। उसे केवल जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में पड़ने वाली 10-दिवसीय विंडो के बीच ही खरीद सकते हैं।

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