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पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: सनातन धर्म को लेकर खिंची तलवारें

युवा अंतर-धार्मिक जोड़ों को हिंदू लड़कियों के ‘सम्मान’ की रक्षा के लिए उन पर धावा बोलने वाले नैतिक-धार्मिक ब्रिगेड से सावधान रहना चाहिए।
Written by: Bishwa Jha | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: October 01, 2023 08:34 IST
पी  चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर  सनातन धर्म को लेकर खिंची तलवारें
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर। फोटो-(इंडियन एक्‍सप्रेस )।
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यदि कोई अंग्रेजी शिक्षक अपनी कक्षा को ‘हाइपरबोल’ (अतिशयोक्ति) शब्द समझाना चाहती है और एक उदाहरण देना चाहती है, तो वह सितंबर 2023 के लिए आरबीआइ के बुलेटिन से निम्नलिखित वाक्य का हवाला देने से बेहतर और कुछ नहीं कर सकती।

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‘सितंबर 2023 में, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण केंद्र भारत में स्थानांतरित हो गया क्योंकि सबसे शक्तिशाली देशों, देशों के समूह और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेता नई दिल्ली में एकत्र हुए।’ आरबीआइ के अनुसार, पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण केंद्र रोम (2021) से बाली (2022) से नई दिल्ली (2023) में स्थानांतरित हो गया और 2024 में रियो डी जनेरियो में स्थानांतरित हो जाएगा।

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चूंकि गुरुत्वाकर्षण का केंद्र नई दिल्ली में स्थानांतरित हो गया, इसलिए हमने झटके महसूस किए : मणिपुर की आग तीन मई, 2023 को शुरू हुई और अभी भी जल रही है; कश्मीर में बार-बार आतंकवादी हमले हो रहे हैं; भूस्खलन और बाढ़ से हिमाचल प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में तबाही मच गई है; और एआइएडीएमके ने तमिलनाडु में अपने गठबंधन से भाजपा को बेझिझक बाहर कर दिया है!

जुमला परेड

गुरुत्वाकर्षण के केंद्र में बदलाव के कारण, हम कई और घोषणाओं और घटनाओं की उम्मीद कर सकते हैं। एक घटना 20-21 सितंबर को हुई : संसद में महिला आरक्षण जुमला विधेयक पारित किया गया। वर्ष 2029 के बाद होने वाले चुनावों में इसे लागू किया जा सकता है। इसके अलावा एक देश एक चुनाव और समान नागरिक संहिता जैसे जुमले भी बन रहे हैं। एक देश एक चुनाव योजना (कोविंद समिति बनाम विधि आयोग) और यूसीसी मसविदे (उत्तराखंड बनाम असम बनाम मध्य प्रदेश) के स्वामित्व के लिए तीव्र प्रतिस्पर्धा है।

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इस बीच, आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने ‘धर्मांतरण’ और ‘लव जिहाद’ की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है और आरएसएस के सदस्यों से ‘आक्रामक’ तरीके से इनका मुकाबला करने के लिए कहा है। लिहाजा, आप चर्चों, पुजारियों, मिशनरियों और ईसाई प्रार्थना सभाओं पर हमलों के लिए खुद को तैयार रखें। युवा अंतर-धार्मिक जोड़ों को हिंदू लड़कियों के ‘सम्मान’ की रक्षा के लिए उन पर धावा बोलने वाले नैतिक-धार्मिक ब्रिगेड से सावधान रहना चाहिए। (मुझे आश्चर्य है कि गैर-हिंदू लड़कियों की संगत में पाए जाने वाले हिंदू लड़कों के ‘सम्मान’ की रक्षा कौन करेगा?)
सबूत दें।

मैं धर्मांतरण और लव जिहाद के इन निराधार आरोपों से स्तब्ध हूं। कृपया उन हजारों बच्चों से पूछें जो ईसाई-संचालित स्कूलों और कालेजों में जाते हैं (क्योंकि वे सर्वश्रेष्ठ में से हैं), उनमें से कितने लोगों को ईसाई धर्म में गुप्त रूप से शामिल करने के प्रयासों का सामना करना पड़ा है? कृपया अपने आप से पूछें कि आपके शहर या गांव में पिछले एक साल में कितने अंतर-धार्मिक विवाह हुए हैं? नारायण मूर्ति का एक मशहूर कथन है, ‘मुझे भगवान पर भरोसा है; बाकी सब कुछ के लिए मुझे डेटा दो’। क्या आरएसएस प्रमुख हमें धर्मांतरण और लव जिहाद पर डेटा देंगे?

माननीय प्रधानमंत्री जी युद्ध के मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि सनातन धर्म पर हमला हो रहा है। भागवत ने आरएसएस के शस्त्रागार से ‘धर्मांतरण’ और ‘लव जिहाद’ लिया है। महिला आरक्षण विधेयक को प्रधानमंत्री की ओर से ‘उपहार’ के रूप में पेश किया जा रहा है (जबकि, वास्तव में, यह एक दिवालिया बैंक का एक पोस्ट-डेटेड चेक है)। भारत को दुनिया का विश्वगुरु बताने के दावे को पुख्ता करने के लिए जी-20 के वीडियो और तस्वीरों को दृश्य और सोशल मीडिया मंचों पर उदारतापूर्वक और अनिवार्य रूप से प्रसारित किया जा रहा है।

एकता और एजंडा

दूसरी ओर, आइएनडीआइए के साझेदार उन मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रहे हैं जिन्हें वे प्रासंगिक मानते हैं और जो लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं। इनमें महंगाई, बेरोजगारी, जातीय और सांप्रदायिक संघर्ष, नफरती भाषण और घृणा अपराध, स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश, राज्यों के अधिकारों पर अतिक्रमण, संघवाद का क्षरण, संविधान पर हमला, न्यायालयों को कमजोर करना, चीनी घुसपैठ, आतंकवादी घटनाएं, आर्थिक विकास धीमा होना, बढ़ती असमानताएं, क्रोनी कैपिटलिज्म, कल्याणकारी उपायों में कमी, राष्ट्रीय ऋण में वृद्धि, खुफिया और जांच एजंसियों का दुरुपयोग, संसदीय संस्थानों को कमजोर करना, और बढ़ता केंद्रवाद व व्यक्तिवाद का पंथ शामिल हैं। भाजपा उम्मीद कर रही है कि धनबल, बाहुबल और कानून के दुरुपयोग के जरिए विपक्ष के हमलों को कुंद किया जा सकेगा।

आइए उन आरोपों पर ध्यान केंद्रित करें कि अर्थव्यवस्था संकट के संकेत दिखा रही है और गलत तरीके से प्रबंधित की जा रही है। बेरोजगारी : अगस्त 2023 में बेरोजगारी दर 8.1 फीसद थी। 2022 में युवा बेरोजगारी (15-24 वर्ष) 23.22 फीसद थी। ‘स्टेट आफ वर्किंग इंडिया 2023’ की रपट के अनुसार, स्नातकों में यह 42 फीसद है। अगस्त 2023 में 1,91,60,000 परिवारों ने मनरेगा के तहत काम की मांग की।

कीमतें और महंगाई : आरबीआइ के बुलेटिन के अनुसार, 23 अगस्त को सीपीआइ महंगाई दर 6.8 फीसद, ईंधन और प्रकाश महंगाई दर 4.3 फीसद और खाद्य महंगाई दर 9.2 फीसद थी। फरवरी 2022 से सीपीआइ महंगाई दर छह फीसद की सहनशीलता सीमा से ऊपर रही है।

घरेलू वित्त : जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियां 15.4 फीसद (2020-21 में) से घटकर 10.9 फीसद (2022-23 में) हो गर्इं। इसी अवधि के दौरान, घरेलू वित्तीय देनदारियां 3.9 फीसद से बढ़कर 5.8 फीसद हो गईं। शुद्ध वित्तीय परिसंपत्तियां 11.5 फीसद से घटकर 5.1 फीसद रह गईं मोदी सरकार शीर्ष तीन जन-केंद्रित मानकों पर बुरी तरह विफल रही है। 1977 के बाद से युद्ध की तैयारियां कभी इतनी तेज नहीं रहीं।

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