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'BJP ने मुझे दिया पार्टी में शामिल होने का ऑफर', दिल्ली की मंत्री आतिशी ने किया बड़ा दावा

दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने कहा कि बीजेपी हमारी पार्टी को तोड़ने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले ईडी चार और आप के नेताओं को गिरफ्तार करेंगे।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: April 02, 2024 11:17 IST
 bjp ने मुझे दिया पार्टी में शामिल होने का ऑफर   दिल्ली की मंत्री आतिशी ने किया बड़ा दावा
दिल्ली की मंत्री आतिशी। (इमेज- पीटीआई)
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Delhi Excise Policy Case: दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भारतीय जनता पार्टी के मेरे एक करीबी सहयोगी के माध्यम से मेरे राजनीतिक करियर को बचाने के लिए उनकी पार्टी में शामिल होने के लिए मुझसे संपर्क किया और अगर मैं बीजेपी में शामिल नहीं हुई तो आने वाले एक महीने में मुझे ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

AAP नेता आतिशी ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले आने वाले दो महीनों में, वे 4 और आम आदमी पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करेंगे। जिन नेताओं को गिरफ्तार किया जाएगा उनमें सौरभ भारद्वाज, आतिशी, दुर्गेश पाठक और राघव चड्ढा शामिल हैं।

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आम आदमी पार्टी अभी भी मजबूत

आतिशी ने आगे कहा कि कल ईडी ने एक बयान के आधार पर सौरभ भारद्वाज और मेरा नाम कोर्ट में लिया, जो डेढ़ साल से ईडी और सीबीआई के पास मौजूद है। ये बयान उनकी चार्जशीट में है। ​​ये बयान सीबीआई की चार्जशीट में भी है तो फिर इस बयान को उछालने की वजह क्या थी? इस बयान को उठाने की वजह ये थी कि अब बीजेपी को लगता है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सत्येन्द्र जैन के जेल में होते हुए भी, आम आदमी पार्टी अभी एकजुट और मजबूत है। अब वे आम आदमी पार्टी के नेतृत्व की अगली पंक्ति को जेल में डालने की योजना बना रहे हैं।

सीएम केजरीवाल के इस्तीफा देने वाले सवाल पर आतिशी ने क्या कहा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अपने पद से इस्तीफा देने के सवाल पर आतिशी ने कहा कि हमारे देश में इससे संबंधित दो संवैधानिक और कानूनी प्रावधान हैं। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम कहता है कि यदि आपको दो साल से ज्यादा सजा मिलती है तो आप जनप्रतिनिधि नहीं रह सकते। वहीं, उन्होंने कहा कि केजरीवाल को दोषी नहीं ठहराया गया है। अरविंद केजरीवाल के पास दिल्ली विधानसभा में प्रचंड बहुमत है, इसलिए अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने का कोई कारण नहीं है। अगर अरविंद केजरीवाल आज इस्तीफा देते हैं तो यह विपक्षी सरकारों को गिराने के लिए भारतीय जनता पार्टी के लिए यह एक बहुत ही सरल और सीधा समाधान होगा।

ईडी सोमवार को केजरीवाल की रिमांड खत्म होने के बाद राजउ एवेन्यू कोर्ट लेकर आई थी। सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट को बताया कि केजरीवाल ने पहली बार दिल्ली शराब घोटाला मामले में अपने दो मंत्रियों का नाम लिया है। प्रवर्तन निदेशालय ने राउज एवेन्यू कोर्ट को बताया कि हमने शराब घोटाला मामले में पूछताछ की तो उन्होंने शिक्षा मंत्री आतिशी और स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज का नाम लिया है। ईडी ने कहा कि केजरीवाल ने उनसे कहा कि विजय नायर मुझे नहीं बल्कि आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करते थे।

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आतिशी ने लगाया था आरोप

इससे पहले दिल्ली की मंत्री आतिशी ने 23 मार्च को आरोप लगाया था कि बीजेपी के खाते में पैसों का लेनदेन पाया गया है। पीएम मोदी और प्रवर्तन निदेशालय को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को अरेस्ट करने का चैलेंज दिया था। आतिशी ने कहा कि आज तक किसी भी आप नेता से जुड़े पैसे का कोई सुराग नहीं मिला है। दिल्ली के कथित शराब घोटाले की बीते दो साल से सीबीआई और ईडी जांच कर रही है। इन दो सालों में जो सवाल बार-बार सामने आए कि मनी ट्रेल कहां है? पैसा कहां चला गया? आतिशी ने कहा कि आप के किसी भी नेता, मंत्री या कार्यकर्ता से कोई भी पैसा नहीं मिला है।

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केजरीवाल को किताबें और दवाएं ले जाने की इजाजत

आतिशी ने आगे कहा कि अरविंद केजरीवाल को एक व्यक्ति (शरद चंद्र रेड्डी) की बातों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि शरद चंद्र रेड्डी ने बीजेपी को 4.5 करोड़ रुपये के बांड दान किए, उन्होंने कहा कि दिल्ली के सीएम आवास पर ईडी की छापेमारी के दौरान किसी भी तरह का अवैध धन नहीं मिला था। बता दें कि सीएम केजरीवाल को 21 मार्च को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया था। इस बीच, कोर्ट ने तिहाड़ जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे केजरीवाल को दवाएं और किताबें ले जाने की इजाजत दें।

क्या था शराब घोटाला

17 नवंबर 2021 को केजरीवाल सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया था। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 फीसदी दुकानें सरकारी और 40 फीसदी प्राइवेट थीं। नई नीति के अमल में आने के बाद 100 फीसदी ही निजी हाथों में चली गई। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा। इसके बाद इस नीति पर कई सवाल खडे़ हो गए। नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप लगा। वहीं, बड़े शराब कारोबारियों को लाभ देने का आरोप भी लगा। शराब नीति के सवालों के घेरे में आने के बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। शराब नीति में खामियों के बाद इसे रद्द कर दिया गया। शराब नीति से जुड़ी पूरी खबर यहां क्लिक कर पढ़ें...

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