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अरविंद केजरीवाल के पास न कंप्यूटर न कागज, फिर कैसे दिया आदेश? ED कर सकती है मामले की जांच

अहम बात यह है कि जिस आदेश को आतिशी ने दिखाया है वह प्रिंटेड है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: March 25, 2024 12:27 IST
अरविंद केजरीवाल के पास न कंप्यूटर न कागज  फिर कैसे दिया आदेश  ed कर सकती है मामले की जांच
अरविंद केजरीवाल ED कस्टडी में हैं।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कस्टडी में हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है और पार्टी का कहना है कि वह जेल से ही सरकार चलाएंगे। रविवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से एक आदेश जारी किया गया। दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने जेल से आदेश दिया है कि राजधानी में निर्बाध जल की आपूर्ति हो और लोगों को कोई दिक्कत ना आए।

केजरीवाल ने कैसे दिया प्रिंटेड ऑर्डर?

अब इसमें अहम बात यह है कि जिस आदेश को आतिशी ने दिखाया है वह प्रिंटेड है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि अरविंद केजरीवाल अगर ईडी की कस्टडी में हैं तो उन्होंने प्रिंटेड आदेश कैसे दिया क्योंकि उन्हें न तो कंप्यूटर दिया गया है, ना ही कोई कागज मुहैया कराया गया है और जो प्रिंटेड आर्डर है उस पर केजरीवाल के साइन भी हैं।

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ईडी ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और उसकी जांच भी शुरू कर सकती है। ईडी के अधिकारियों का मानना है कि ऑर्डर की कॉपी मीडिया में कैसे आई और जब केजरीवाल के पास कोई कागज या कंप्यूटर नहीं है तो यह प्रिंट कैसे हुआ?

सीएम केजरीवाल ने अपने आदेश में लिखा था, "मुझे पता चला है कि दिल्ली के इलाकों में पानी और सीवर की काफी समस्या हो रही है। इसे लेकर मैं चिंतित हूं। मैं जेल में हूं, इस वजह से लोगों को जरा भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए गर्मियां भी आ रही हैं और जहां पानी की कमी है, वहां उचित संख्या में टैंकरों का इंतजाम कीजिए। मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को उचित आदेश दीजिए ताकि जनता को किसी तरह की परेशानी ना हो। जरूरत पड़ने पर उपराज्यपाल महोदय का भी सहयोग लें। वे भी आपकी मदद जरूर करेंगे।"

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इस बीच अभी तो केजरीवाल ईडी की कस्टडी में हैं लेकिन अगर जेल जाते हैं तो सरकार चलाना मुश्किल होगा। अगर केजरीवाल जेल जाते हैं तो उनके लिए भी सामान्य कैदियों की तरह ही नियम होंगे। जैसे कैदी से किसी भी तरह की कोई भी फाइल साइन के लिए नहीं भेजी जा सकती। कैदी से मिलने के लिए भी जेल प्रशासन को नाम देने होते हैं। अनुमति के बाद सिर्फ एक बार में 3 लोग ही मुलाकात कर सकते हैं।

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