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'पाकिस्तान अगर आतंकवाद नहीं रोक पा रहा तो हम मदद को तैयार', राजनाथ का पड़ोसी देश को प्रस्ताव

यह टिप्पणी राजनाथ सिंह के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि सीमा पार कर भागने वाले आतंकियों को मारने के लिए भारत पाकिस्तान में घुसने में संकोच नहीं करेगा।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: April 11, 2024 15:27 IST
 पाकिस्तान अगर आतंकवाद नहीं रोक पा रहा तो हम मदद को तैयार   राजनाथ का पड़ोसी देश को प्रस्ताव
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह। (इमेज- पीटीआई)
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Rajnath Singh on Pakistan Terrorism: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान और चीन को लेकर लगातार हमलावर हैं। एएनआई को दिए गए एक इंटरव्यू में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान में आतंकवाद को खत्म करने के लिए मदद की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान आंतकवाद पर काबू नहीं कर पा रहा है तो हम आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए मदद देने को तैयार हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान से मेरी यही अपेक्षा है कि अगर वह आंतकवाद का सहार लेकर भारत की स्थिति को खराब करने की कोशिश करेगा तो इसका परिणाम उसको भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगता है कि वह आंतकवाद पर काबू नहीं कर सकता है तो फिर पड़ोसी देशों से मदद ले सकता है। आतंकवाद पर काबू पाने के लिए भारत उनकी मदद करने को तैयार है।

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भारत की एक इंच जमीन भी नहीं गई

चीन के रुख पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बात दोहराई कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। भारतीय क्षेत्र पर मोदी सरकार के रुख पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय जमीन का एक इंच भी नहीं गया है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ऐसा कभी नहीं होने देगी। वहीं, पीओके पर जवाब देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पीओके हमारा था, हमारा है और हमारा ही रहेगा। अगर पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देता है और भारत को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।

आपातकाल के दौरान मां से मिलने की इजाजत नहीं मिली- राजनाथ सिंह

1975 में आपातकाल के दौर में इंदिरा गांधी सरकार की तथाकथित मनमानी का विरोध करने वाले दर्जनों नेताओं को जेल भेज दिया गया था। यह वही समय था जब राजनाथ सिंह की मां बीमार थीं और ब्रेन हेमरेज के बाद वाराणसी के अस्पताल में भर्ती थीं। मौत से जंग हारने से पहले वह 27 दिनों तक अस्पताल में रहीं। कांग्रेस सरकार ने सिंह को एक बार भी अपनी मां से मिलने की इजाजत नहीं दी, जब वह अस्पताल में थीं। उनकी मौत के बाद उन्हें आखिरी बार देखने की इजाजत नहीं दी गई। वह अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके क्योंकि प्रशासन ने उन्हें पैरोल देने से इनकार कर दिया था।

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