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'पी. चिदंबरम के सुझाव में कोई दम नहीं, 30 साल से तैयार कर रहे कांग्रेस का घोषणापत्र', गौरव वल्लभ ने राहुल, जयराम रमेश समेत कांग्रेस हाईकमान पर साधा निशाना

Lok Sabha Elections: बिना नाम लिए चिदंबरम पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा कि अगर उनके विचारों और सुझावों में कोई दम होता तो लोकसभा में पार्टी की सीटें 42 से 52 के बीच नहीं आतीं।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: April 08, 2024 10:05 IST
 पी  चिदंबरम के सुझाव में कोई दम नहीं  30 साल से तैयार कर रहे कांग्रेस का घोषणापत्र   गौरव वल्लभ ने राहुल  जयराम रमेश समेत कांग्रेस हाईकमान पर साधा निशाना
Lok Sabha Elections: कांग्रेस नेता पी चिदंबरम। (एक्सप्रेस फाइल)
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Lok Sabha Elections: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के कुछ दिनों बाद गौरव वल्लभ ने रविवार को अपने पूर्व कांग्रेस सहयोगियों राहुल गांधी और जयराम रमेश पर कटाक्ष किया। वल्लभ ने जहां राहुल गांधी नेता मानने से इनकार कर दिया तो वहीं उन्होंने जयराम रमेश को लेकर कहा कि उन्होंने कभी क्लास मॉनीटर का चुनाव भी नहीं लड़ा है।

गौरव वल्लभ कभी टेलीविजन बहसों में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा हुआ करते थे। साथ ही कांग्रेस के लिए मजबूती से पक्ष रखते थे। वल्लभ ने कहा कि सबसे पुरानी पार्टी न तो अपने जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के मुद्दों को समझती है और न ही मतदाताओं की आकांक्षाओं को समझती है।

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जयराम रमेश को लेकर गौरव वल्लभ ने क्या कहा?

राज्यसभा सांसद और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए वल्लभ ने कहा, “कांग्रेस वर्तमान में उन लोगों द्वारा चलाई जा रही है, जिन्होंने शायद कभी क्लास मॉनीटर बनने के लिए चुनाव नहीं लड़ा। एक नेता (जयराम रमेश) जिन्होंने कभी खुद को क्लास मॉनिटर बनने के लिए भी मैदान में नहीं उतारा, वो पांच बार से राज्यसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्हें कांग्रेस की विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है, वह सिर्फ अपनी राज्यसभा सीट सुरक्षित करना चाहते हैं। उनकी पार्टी के प्रति कोई वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं है।”

'चिंदबरम पिछले 30 साल से तैयार कर रहे कांग्रेस का घोषणापत्र'

बिना नाम लिए चिदंबरम पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता ने कहा कि अगर उनके विचारों और सुझावों में कोई दम होता तो लोकसभा में पार्टी की सीटें 42 से 52 के बीच नहीं आतीं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का घोषणापत्र पिछले 30 वर्षों से एक ही व्यक्ति (चिदंबरम) द्वारा तैयार किया गया है। यदि उनके विचारों में कोई योग्यता या व्यावहारिक प्रासंगिकता होती तो लोकसभा में कांग्रेस की संख्या 42 और 52 (सीटों) के बीच नहीं गिरती। वल्लभ ने कहा कि जब मैं कॉलेज में था, तब वह प्रवक्ता के रूप में टेलीविजन पर पार्टी का बचाव करते थे। आज भी वह कांग्रेस में एक पीए के रूप में हैं।

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उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस जिन कुछ लोगों को 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए टिकट दे रही है, वे उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच अंतर नहीं बता सकते। उन्होंने कहा कि उनसे पूछने की कोशिश कर रहा हूं और देख रहा हूं कि वे कैसे भ्रमित दिख रहे हैं। वल्लभ ने आगे दावा किया कि कांग्रेस वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के 'निजी सहायकों' द्वारा चलाई जा रही है।

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'उद्योगपतियों पर हमला बंद करने को कहा'

वल्लभ ने कहा कि उन्होंने सबसे पुरानी पार्टी पर उद्योगपति गौतम अडानी सहित देश के बड़े लोगों पर आरोप न लगाया जाए। इसको लेकर बात कही थी। वल्लभ ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस आलाकमान से आग्रह किया है कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी की आलोचना करना बंद कर दिया है, जिसने अमेरिका स्थित कंपनी द्वारा किए गए कुछ दावों के खिलाफ जांच शुरू की थी। बाद में अडानी ग्रुप को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई।

कांग्रेस से बीजेपी में आए गौरव वल्लभ ने कहा कि कांग्रेस ने रात-दिन अडानी और अंबानी के खिलाफ बोलने की आदत बना ली है। उन्होंने कहा कि मैंने (कांग्रेस में रहते हुए) एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें मैंने अडानी के खिलाफ कुछ संदर्भ दिए थे। हालांकि, जब सेबी ने अडानी को (हिंडनबर्ग दावों की जांच में) क्लीन चिट दे दी, तो मैंने उनके बारे में कोई भी सार्वजनिक बयान देना बंद कर दिया। मैंने कांग्रेस नेताओं को सलाह भी दी कि सेबी की क्लीन चिट के बाद वे उनकी आलोचना करना बंद कर दें। लेकिन वे उसके बाद भी नहीं माने।

गौरतलब है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता अडानी और अंबानी की कड़ी आलोचना करते रहे हैं और उन पर केंद्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुचित लाभ प्राप्त करने का आरोप लगाते रहे हैं।

'राम मंदिर का निमंत्रण अस्वीकार करने के बाद कांग्रेस का पक्ष रखना बंद कर दिया'

गौरव वल्लभ ने आगे खुलासा किया कि उन्होंने 22 जनवरी को अयोध्या के राम मंदिर में राम लला की 'प्राण प्रतिष्ठा' के निमंत्रण को अस्वीकार करने के बाद टेलीविजन बहस या मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व नहीं करने का फैसला किया था।

भाजपा नेता ने कहा, 'जब से मैंने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दिया है, मैंने मीडिया इंटरव्यू में कहा है कि मैंने अपनी पूर्व पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बार-बार कहा है कि हम 'सनातन धर्म' के विरोध में चुप नहीं रह सकते। जिस दिन कांग्रेस ने अयोध्या में राम लला की 'प्राण प्रतिष्ठा' का निमंत्रण ठुकरा दिया, उसी दिन से मैंने टेलीविजन शो और बहसों में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व न करने का फैसला कर लिया।

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