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सेना के नि:संतान अधिकारी अब निजी अस्पताल में भी करा सकेंगे इलाज

पूर्व में सैन्य अधिकारियों को राजधानी दिल्ली, मुंबई, पुणे, गोवाहाटी, भोपाल, जलंधर और बंगलुरु में मौजूद चिह्नित कृत्रिम प्रजननीय उपचार की सुविधा प्रदान करने वाले अस्पतालों में ही इलाज की सुविधा लेने की अनुमति थी।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: March 10, 2024 15:24 IST
सेना के नि संतान अधिकारी अब निजी अस्पताल में भी करा सकेंगे इलाज
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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कविता जोशी

भारतीय सेना के नि:संतान अधिकारियों के लिए राहत की एक महत्त्वपूर्ण खबर सामने आई है। इसमें अब उन्हें सेना के सात चिह्नित अस्पतालों के अलावा देश में मौजूद किसी भी निजी अस्पताल से संतान प्राप्ति के लिए कृत्रिम प्रजननीय उपचार (एआरटी) कराने की सुविधा मिलेगी। इतना ही नहीं सेना इसके लिए संबंधित अधिकारी को तीन बार क्रमश: 65 हजार रुपए की धनराशि भी प्रदान करेगी। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि इससे संबंधित एक पत्र पूर्व में जारी कर दिया गया था, लेकिन अब उसका सही मायने में जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन देखने को मिल रहा है।

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अधिकारी ने बताया कि पूर्व में सैन्य अधिकारियों को राजधानी दिल्ली, मुंबई, पुणे, गोवाहाटी, भोपाल, जलंधर और बंगलुरु में मौजूद चिह्नित कृत्रिम प्रजननीय उपचार की सुविधा प्रदान करने वाले अस्पतालों में ही इलाज की सुविधा लेने की अनुमति थी। इसकी वजह से इन जगहों के बाहर और सुदूर इलाकों में तैनात सैन्यकर्मियों के लिए संबंधित इकाई को जरूरत पड़ने पर या तो अधिकारी का तबादला करना पड़ रहा था या उन्हें लंबे अवकाश पर भेजना पड़ रहा था। क्योंकि इस तरह के इलाज में करीब दो से तीन साल का वक्त आसानी से लग जाता है।

इससे सैन्य इकाई का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा था। इन सबके बीच अधिकारी को केवल चिह्नित सैन्य अस्पताल में ही इलाज कराने की सुविधा मिल रही थी। लेकिन अब इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सेना ने कृत्रिम प्रजननीय उपचार के लिए सैन्य अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों को भी शामिल कर लिया है। इससे किसी अधिकारी को तबादला करने या लंबे अवकाश पर भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि विज्ञान की प्रगति के साथ-साथ सरकार द्वारा अब एआरटी से जुड़ी सुविधाएं देश के हर छोटे-बड़े शहर में उपलब्ध करा दी गई हैं। इसके बाद सेना को भी इसका लाभ लेना चाहिए।

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बल के इस निर्णय के पीछे सरकार द्वारा कृत्रिम प्रजननीय उपचार के संबंध में देशभर में प्रदान की जा रही सुविधा एक बड़ा कारण है। सेना की सैन्य इकाइयों में एआरटी उपचार की आवश्यकता वाले अधिकारियों की कुल संख्या के बारे में बता पाना मुश्किल है। लेकिन बल में ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें इस तरह के उपचार की आवश्यकता पड़ती है। उस स्थिति में अब वो अपने तैनाती स्थल या उसके आसपास के इलाके में मौजूद एआरटी सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

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