scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

सदन में मैं अलग बैठा था, तीन द‍िन तक कोई व‍िपक्षी नेता कहने नहीं आया क‍ि चल‍िए, साथ बैठते हैं- चंद्रशेखर आजाद

चंद्रशेखर आजाद का कहना है कि मैंने फैसला किया कि हम न लेफ्ट होंगे, न राइट, हम बहुजन हैं और अपनी मांगों के साथ खड़े रहेंगे। अ
Written by: दीप्‍त‍िमान तिवारी | Edited By: shruti srivastava
नई दिल्ली | Updated: July 09, 2024 08:36 IST
सदन में मैं अलग बैठा था  तीन द‍िन तक कोई व‍िपक्षी नेता कहने नहीं आया क‍ि चल‍िए  साथ बैठते हैं  चंद्रशेखर आजाद
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रशेखर आजाद (Source- PTI)
Advertisement

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की नगीना सीट से जीत हासिल की है। इस आम चुनाव में बसपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद चंद्रशेखर को दलितों के नए उभरते नेता के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में चुनाव में उनकी पार्टी के प्रदर्शन, दलितों के हित और विपक्ष से उनकी बढ़ती दूरी सहित कई मुद्दों पर उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस के कार्यक्रम आइडिया एक्सचेंज में बात की।

Advertisement

कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया कि पिछले हफ्ते पूरे विपक्ष ने संसद में वॉकआउट किया और आप अकेले बैठे रहे तो आप किसके साथ हैं? इस सवाल के जवाब में भीम आर्मी प्रमुख ने कहा, "कांशीराम ने कहा है कि जो लोग आंदोलन करते हैं वे समझौता नहीं कर सकते और जो समझौता करते हैं वो आंदोलन नहीं करते। जब आपने मुझे अकेले बैठे देखा तो मैं एक्स्ट्रा लाइन में बैठा था क्योंकि मैं संसद में नया हूं और मुझे उस जगह के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मैंने सोचा था कि विपक्षी नेता मुझसे अपने साथ बैठने के लिए कहेंगे लेकिन तीन दिन बाद भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा।"

Advertisement

चंद्रशेखर ने आगे कहा, "जिसके बाद मैंने फैसला किया कि हम न लेफ्ट होंगे, न राइट, हम बहुजन हैं और अपनी मांगों के साथ खड़े रहेंगे। अगर कुछ गलत है तो हम उसका विरोध करेंगे और अगर कुछ अच्छा है तो हम उसका विश्लेषण करेंगे और फिर फैसला लेंगे। हमारे साथ करोड़ों लोगों की उम्मीदें हैं। अगर लोग हमारे साथ हैं तो हम किसी के पीछे क्यों खड़े हों?"

'मेरा नाम आजाद है, मुझे आजादी से लड़ने दो'

भीम आर्मी प्रमुख ने कहा, "अगर आप लंबे समय से राजनीति में हैं तो उस जगह से लड़ें जहां आपका दिल कहे, भले ही आपको केवल 20,000 वोट ही क्यों न मिले। कांग्रेस और सपा ने मुझसे अपने सिंबल पर लड़ने को कहा। मैंने कहा मेरा नाम आजाद है, मुझे आजादी से लड़ने दो। वे इससे सहमत नहीं हुए और हमारी बातचीत ख़त्म हो गई।"

पार्टियां नहीं चाहती कि पिछड़े वर्गों के बीच एक स्वतंत्र आवाज उठे- चंद्रशेखर

पार्टियां आपके साथ गठबंधन क्यों नहीं करना चाहतीं? इस सवाल के जवाब में चंद्रशेखर ने कहा, "मुझे लगता है कि वे नहीं चाहते कि पिछड़े वर्गों के बीच से एक स्वतंत्र आवाज उठे। वे सोचते हैं कि जो कोई भी चुनाव में खड़ा होता है उसे उनके द्वारा समर्थन किया जाना चाहिए या उनके अधीन रहना चाहिए ताकि वे उसे कंट्रोल कर सकें और उनसे आगे नहीं बढ़ सकें। विपक्ष का मानना ​​था कि अगर चन्द्रशेखर आजाद चुनाव में खड़े होते हैं तो यह एक नई राजनीति को जन्म देगा।"

Advertisement

नगीना को ही चुनाव लड़ने के सवाल पर चंद्रशेखर ने कहा, "हम यह साबित करना चाहते थे कि कमजोर वर्ग किसी की बपौती नहीं है। ऐसा कहा जाता है कि वे केवल मायावती की पार्टी के साथ हैं, हम इसे गलत साबित करना चाहते थे। उस क्षेत्र का एक समृद्ध इतिहास है इसने देश को बड़े नेता दिए हैं। जब मैं वहां गया तो मैंने गरीबी देखी क्योंकि सभी पार्टियों ने उन्हें धोखा दिया था। वहां बेरोजगारी है, कोई उचित शैक्षणिक संस्थान नहीं है और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। हालांकि, उस क्षेत्र के लोगों में बहुत स्वाभिमान है और वे कड़ी मेहनत करने वाले लोगों को पसंद करते हैं। मायावती, मीरा कुमार और राम विलास पासवान उस क्षेत्र से लड़े थे।"

क्या कम हो गई है मायावती की लोकप्रियता?

क्या मायावती की लोकप्रियता कम हो गई है? इस सवाल के जवाब में भीम आर्मी प्रमुख ने कहा, "किसी भी संगठन की ताकत उसकी विचारधारा होती है। जब विचारधारा बदलती है तो कैडर भी बदलता है। 2006 में कांशीराम के निधन के बाद काफी बदलाव आये। ऐसा नहीं है कि सत्ता में आने पर बसपा ने किसी विशेष धर्म या जाति को नुकसान पहुंचाया हो। उन्होंने अपने लोगों को ऊपर उठाने का मौका दिया लेकिन 2007 में लोगों का बसपा के प्रति जो विश्वास था, उसे ठेस पहुंची है नेतृत्व इसके कारणों को जानेगा। मैं बसपा नेता नहीं हूं।"

आजाद समाज पार्टी नेता ने आगे कहा, "मैं मायावती का सम्मान करता हूं। अनुसूचित जाति की महिला के लिए सत्ता तक पहुंचना मुश्किल है। मैं उस पर टिप्पणी नहीं कर सकता, मुझे ऐसा करने का अधिकार नहीं है। मैंने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मुझे कभी उनका समय नहीं मिला। हालांकि, मैं कभी नहीं चाहूँगा कि भारतीय राजनीति का चमकता सितारा बसपा कभी कमज़ोर हो। मुझे वह नाम और उसका प्रतीक बहुत पसंद है"

हालांकि, उन्होंने हमेशा मुझे अपराधी कहकर और कई आरोप लगाकर मुझे नीचा दिखाने की कोशिश की है। यहां तक ​​कि जब मैं जेल में था और मौत के करीब था तब भी उन्होंने कभी अपना समर्थन नहीं दिखाया।"

'देश में करोड़ों महिलाओं ने कभी प्लेन नहीं देखा'

हवाई जहाज़ और बड़ी कारों में यात्रा करने के लिए आलोचना होने के सवाल पर चंद्रशेखर आजाद ने कहा, "मेरे पास सुविधाएं नहीं हैं अन्यथा मैं हवाई जहाज से आता। मुझे जो सरकारी सुविधाएं मिलती हैं उसमें आपको हवाई जहाज के कूपन मिलते हैं। क्या हवाई जहाज़ में पिछड़ी जाति के लोग नहीं बैठ सकते? मोदी जी 8,000 करोड़ रुपये के हवाई जहाज में यात्रा कर सकते हैं, क्या मैं हेलीकॉप्टर में नहीं जा सकता? अगर यह मेरे वश में होता, तो मैं अपने सभी साथियों को एक हेलीकॉप्टर देता। हमारे देश में करोड़ों महिलाओं ने कभी प्लेन नहीं देखा है। वे गरीबी में पैदा होते हैं और मर जाते हैं। करोड़ों महिलाओं ने एसी ट्रेन में यात्रा नहीं की है।"

मोदी और राहुल से ज्यादा अपना भाषण पसंद आया- चंद्रशेखर

एक नए सांसद के रूप में, आपको किसका भाषण अधिक पसंद आया- प्रधानमंत्री का या विपक्ष के नेता का? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "दोनों ने अपने एजेंडे और पार्टियों पर बात की। मुझे अपना भाषण सबसे अच्छा लगा। बाद में जब मैंने इसे सुना तो पहली बार सांसद होने के नाते मैं कम समय में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर सका। मैंने चुटकुलों से दूर रहने की कोशिश की और मूलभूत मुद्दों पर चर्चा की। यह एकमात्र मंच है जहां भाजपा जवाब देती है और कहीं नहीं।"

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
×
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 खेल tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो