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बीएसपी में फिर से जान फूंकने के लिए एक्टिव हो रहीं मायावती? ये चार बातें कर रहीं इशारा

लोकसभा इलेक्शन में बहुजन समाज पार्टी शून्य पर ही सिमटकर रह गई। मायावती चुनाव के बाद फिर से एक्टिव हो रही हैं।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: July 11, 2024 00:15 IST
बीएसपी में फिर से जान फूंकने के लिए एक्टिव हो रहीं मायावती  ये चार बातें कर रहीं इशारा
बसपा सुप्रीमो मायावती। (इमेज-पीटीआई)
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Bahujan Samaj Party: लोकसभा इलेक्शन 2024 का रिजल्ट बहुजन समाज पार्टी के लिए काफी ज्यादा खराब साबित हुए। पार्टी चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल पाई है। इतना ही नहीं BSP का वोट शेयर भी पिछली बार के मुकाबले गिर गया। 2019 के आम चुनाव में जहां पार्टी को 3.7 फीसदी वोट शेयर मिला था वह अब वह घटकर महज 2.04 फीसदी ही रह गया था। हालांकि, लोकसभा इलेक्शन के बाद फिर से बसपा सुप्रीमों एक्टिव हो रही हैं।

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मायावती ने फिर से आकाश को नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया

लोकसभा चुनाव में बीएसपी की बुरी तरह हार के बाद मायावती ने फिर से अपने भतीजे आकाश आनंद को ही अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। इसके साथ ही पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद पर भी बहाल कर दिया। इसको मायावती के एक बहुत बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। बसपा का कोर वोट बैंक रहे दलित और पिछड़े तबके उससे काफी हद तक छिटक चुके हैं। उनमें से कई तबके मजबूती के साथ बीजेपी के साथ जुड़ गए हैं तो कई तबके अखिलेश की सपा के साथ जा चुके हैं। आकाश आनंद का सफर भी काफी कठिन होने वाला है।

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हाथरस की घटना पर नारायण साकार हरि की भूमिका पर सवाल उठाए

हाथरस की घटना पर दलित वोट बैंक के कारण सभी राजनीतिक दलों के नेता चुप है। उस घटना पर मायावती ने नारायण साकार हरि की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस सत्संग में 121 लोग मारे गए उस सत्संग का मुख्य आयोजक नारायण साकार हरि था। इसके बावजूद यूपी की एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उसे क्लीन चिट दे दी।

इतना ही नहीं मायावती ने आरोप लगाया कि बाकी के नेता खास वोट बैंक के कारण इस बाबा के खिलाफ चुप हैं और यह एक बहुत बड़ी बात है। किसी भी नेता ने बाबा के खिलाफ कुछ नहीं बोला केवल मायावती ने ही उसके खिलाफ बोला है। बाबा नारायण साकार जाटव समुदाय से आते हैं और ज्यादातर उनके अनुयायी भी इसी समुदाय से आते हैं। यूपी में 20 फीसदी दलितों में जाटव समुदाय के 11 फीसदी लोग है। मायावती भी खुद जाटव समुदाय से आती है। इसके बाद भी वह नारायण साकार हरि के खिलाफ आवाज उठा रही है।

बहुजन समाज पार्टी ने मेंबरशिप शुल्क घटाया

आम चुनाव में खाता तक न खोल पाने वाली बसपा को हाल ही में पता चला कि उसका कोर दलित वोट और पार्टियों में जा रहा है। दलित वोट बैंक को खोता देख बसपा ने इसे रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। पार्टी ने मेंबरशिप फीस 200 रुपये से घटाकर सीधे 50 रुपये कर दी है। यहां पर देखने वाली बात यह भी है कि बाकी पार्टियों के मुकाबले अभी भी यह शुल्क काफी ज्यादा है। भारतीय जनता पार्टी की मेंबरशिप लेने पर केवल 5 रुपये देने होते हैं और आम आदमी पार्टी की मेंबरशिप फीस शून्य है। पार्टी का कोई भी आकर मेंबर बन सकता है। कांग्रेस पार्टी का मेंबरशिप शुल्क भी शून्य ही है। इससे संबंधित खबर यहां क्लिक कर पढ़ें...

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तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष की हत्या के बाद राज्य में गईं मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अलावा किसी दूसरे राज्य में ना के बराबर ही जाती थी। तमिलनाडु में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष के आर्मस्ट्रांग की हत्या के बाद वह राज्य में गईं और वहां पर डीएमके सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था का बहुत ही बुरा हाल है। मायावती के दूसरे राज्य में काफी समय बाद दौरा करने को लेकर भी माना जा रहा है कि मायावती पूरी तरह से सक्रिय होती हुईं नजर आ रही हैं।

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