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PM मोदी पर किताब लिखने वाले शख्स को मिला बड़ा तोहफा, केंद्र सरकार ने दिया ये पद

पीएम मोदी पर किताब लिखने वाले किशोर मकवाना को केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) का अध्यक्ष बना दिया है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Jyoti Gupta
नई दिल्ली | Updated: March 10, 2024 09:20 IST
pm मोदी पर किताब लिखने वाले शख्स को मिला बड़ा तोहफा  केंद्र सरकार ने दिया ये पद
पीएम नरेंद्र मोदी पर किताब लिखने वाले किशोर मखवाना। (Express Photo)
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पीएम नरेंद्र मोदी पर किताब लिखने वाले बीजेपी प्रवक्ता किशोर मकवाना को केंद्र सरकार ने बड़ा पद दिया है। सरकार ने मकवाना को अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) का अध्यक्ष बना दिया है। मखवाना, गुजरात भाजपा के संयुक्त प्रवक्ता और प्रधानमंत्री संग्रहालय पुस्तकालय सोसायटी (पीएमएमएलएस) के सदस्य हैं। अब किशोर मकवाना को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है।

दरअसल, एनसीएससी एक संवैधानिक निकाय है जिसे अनुसूचित जाति और एंग्लो-इंडियन समुदायों के शोषण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने, उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक हितों की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है।

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लिखी हैं कई किताबें

अहमदाबाद के 58 साल के दलित लेखक मकवाना ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर पर कई किताबें लिखी हैं। 2015 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक किताब लिखी था। जिसका शीर्षक मोदी: ए कॉमन मैन्स पीएम था। एक "पत्रकार" के रूप में वे 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर ऐतिहासिक बस यात्रा पर उनके साथ गए थे। इतना ही नहीं 1990 में वे भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ यात्रा में भी शामिल हुए थे।

2014 से बीजेपी के सदस्य हैं मकवाना

मकवाना, 2004 से भाजपा के सदस्य हैं। उन्हें 2019 में पीएमएमएलएस में नियुक्त किया गया था, जिसे पहले नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय के रूप में जाना जाता था। अहमदाबाद के ढोलका गांव के रहने वाले मकवाना ने 30 से अधिक किताबें लिखी हैं। उनमें से नौ किताबें डॉ अंबेडकर पर और एक स्वामी विवेकानन्द पर हैं।

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मकवाना ने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर किया है। वे एक गुजराती पत्रिका समाज संवेदना भी प्रकाशित करते हैं और एक वेबसाइट भी चलाते हैं। इस वेबसाइट का उद्देश्य "डॉ. अंबेडकर के दृष्टिकोण को दुनिया भर में फैलाना" है। मकवाना आठ सालों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गुजराती मुखपत्र साधना के संपादक भी रहे हैं ।

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