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अतीक अहमद से लेकर मुख्तार अंसारी तक... 7 साल में 10 गैंगस्टर्स की पुलिस कस्टडी या जेल में हुई मौत, जानें

10 में से 7 लोग सुनवाई के लिए या मेडिकल परीक्षण के लिए अदालत परिसर में ले जाते समय गोलियों से बुरी तरह घायल हो गए और उनकी मौत हो गई।
Written by: मनीष साहू | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: March 30, 2024 09:52 IST
अतीक अहमद से लेकर मुख्तार अंसारी तक    7 साल में 10 गैंगस्टर्स की पुलिस कस्टडी या जेल में हुई मौत  जानें
अतीक अहमद की मौत पुलिस कस्टडी और मुख्तार की मौत जेल में हुई।
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उत्तर प्रदेश में पिछले 7 सालों में 10 कुख्यात गैंगस्टरों की न्यायिक और पुलिस हिरासत में मौत हो चुकी है। इनमें से 7 लोग सुनवाई के लिए या मेडिकल परीक्षण के लिए अदालत परिसर में ले जाते समय गोलियों से बुरी तरह घायल हो गए और उसके बाद उनकी मौत हो गई। बाकी तीन की मौत बीमारियों के कारण हुई। इस सूची में सबसे ताजा नाम गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी का है, जिसकी गुरुवार (28 मार्च) को बांदा जिला जेल के अंदर मृत्यु हो गई।

अतीक अहमद-मुन्ना बजरंगी की हत्या

दूसरा मुख्य नाम गैंगस्टर से नेता अतीक अहमद का था, जिसे उसके छोटे भाई खालिद अजीम उर्फ ​​अशरफ के साथ मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाते समय गोली मार दी गई थी और उसकी मौत हो गई थी।

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पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई खालिद अजीम उर्फ ​​अशरफ की प्रयागराज में सरकारी अस्पताल के गेट के बाहर तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना लाइव टेलीविजन पर तब घटी जब 15 अप्रैल 2023 को उन्हें मेडिकल जांच के लिए पुलिस ले जा रही थी। तीन आरोपियों लवलेश तिवारी, शनि सिंह उर्फ ​​पुरैनी और अरुण कुमार मौर्य को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया और पूछताछ के दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्होंने प्रसिद्धि हासिल करने के लिए अतीक और अशरफ की हत्या कर दी थी। अतीक पर 100 से ज्यादा और अशरफ पर 52 मुकदमे थे।

9 जुलाई 2018 को गैंगस्टर मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल के अंदर कथित तौर पर जेल में बंद एक अन्य गैंगस्टर और हत्या के दोषी सुनील राठी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इससे कुछ घंटे पहले उसे (बजरंगी को) अदालत में पेश किया जाना था। हत्या से कुछ घंटे पहले जौनपुर के मूल निवासी मुन्ना बजरंगी को झांसी जेल से बागपत जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था। ऐसा एक हफ्ते बाद हुआ जब बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने आरोप लगाया था कि उनके पति की जान को खतरा है।

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आरोप है कि हाई सिक्योरिटी बैरक में झगड़े के बाद सुनील राठी ने उसे गोली मार दी। सुनील राठी ने कथित तौर पर पिस्तौल का उपयोग करके उस पर गोली चला दी। बजरंगी के खिलाफ 24 मामले थे और उसने 2012 का विधानसभा चुनाव अपना दल के टिकट पर जौनपुर की मरियाहू सीट से लड़ा था और हार गया था। उसे मुख्तार अंसारी का करीबी माना जाता था। मुन्ना बजरंगी की हत्या के मामले की जांच इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देश के आधार पर सीबीआई कर रही है।

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जेल के अंदर तीन लोगों की हत्या

14 अप्रैल 2021 को चित्रकूट जेल के अंदर तीन गैंगस्टर मुकीम काला, मिराजुद्दीन उर्फ ​​​​मिराज और अंशू दीक्षित की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह आरोप लगाया गया था कि अंशू दीक्षित ने मुकीम और मिराज की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद अंशू दीक्षित की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। तीनों का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।

संजीव माहेश्वरी, छोटा राजन और मुनीर मेहताब की हत्या

पिछले साल 7 जून को गैंगस्टर और हत्या के दोषी संजीव माहेश्वरी की 25 वर्षीय विजय यादव ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब वह (संजीव) अदालत की सुनवाई के लिए जिला जेल से लखनऊ अदालत जा रहा था। पुलिस के अनुसार शामली निवासी संजीव के खिलाफ 24 मामले हैं, जिसमें 2005 में गाजीपुर में भाजपा विधायक कृष्णनंद राय की हत्या भी शामिल है।

पिछले साल ही जून में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के करीबी सहयोगी गैंगस्टर खान मुबारक की इलाज के लिए जिला जेल से ट्रांसफर किए जाने के एक घंटे के भीतर हरदोई जिला अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। मुबारक पर हत्या और डकैती के 44 मामले चल रहे थे।

नवंबर 2022 में 31 वर्षीय गैंगस्टर मुनीर मेहताब की वाराणसी के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। एनआईए अधिकारी की हत्या के आरोप में बिजनौर की एक अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।

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