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न्यूजक्लिक के संपादक को बड़ी राहत, रिहाई का आदेश देकर बोला सुप्रीम कोर्ट- अवैध तरीके से की गई गिरफ्तारी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यूजक्लिक के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी और रिमांड अमान्य है क्योंकि रिमांड से पहले उन्हें या वकील को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: May 15, 2024 11:42 IST
न्यूजक्लिक के संपादक को बड़ी राहत  रिहाई का आदेश देकर बोला सुप्रीम कोर्ट  अवैध तरीके से की गई गिरफ्तारी
प्रबीर पुरकायस्थ। (इमेज- फाइल फोटो)
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NewsClick Founder Prabir Purakayastha: न्यूजक्लिक के संपादक प्रवीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी के पीछे के आरोप निराधार हैं। पिछले साल 3 अक्टूबर को प्रबीर को चीन की ओर से प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में यूएपीए धारा के तहत गिरफ्तार किया गया था।

जस्टिस गवई और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि पुरकायस्थ की गिरफ्तारी और उसके बाद की रिमांड अमान्य है। बेंच ने कहा कि रिमांड से पहले उन्हें उनके वकील को गिरफ्तारी का आधार नहीं बताया गया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने मामले में चार्जशीट दायर की है तो सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाने वाली शर्तों पर प्रबीर पुरकायस्थ को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

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प्रबीर पुरकायस्थ के वकील ने क्या बताया

न्यूजक्लिक के संस्थापक और प्रधान संपादक को रिहा करने के शीर्ष अदालत के आदेश पर बात करते हुए वकील अर्शदीप खुराना ने बताया कि उन्हें ट्रायल कोर्ट के सामने जमानत बांड देने का निर्देश दिया गया है। खुराना ने कहा कि यह एक बड़ी राहत मिली है। हम तो शुरू से ही कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ पुलिस के द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह से अवैध थी और गिरफ्तारी का तरीका भी अवैध था। इसको अब सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।

प्रबीर पुरकायस्थ को क्यों किया गया अरेस्ट

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर अमित चक्रवर्ती को देश की संप्रभुता को बाधित करने और देश के खिलाफ असंतोष पैदा करने के लिए चीन से फंड लेने के आरोप में पिछले साल 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था और नवंबर के महीने में हिरासत में भेज दिया गया था। चक्रवर्ती जनवरी में मामले में सरकारी गवाह बन गए और दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें 6 मई को रिहा कर दिया।

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एफआईआर के मुताबिक, न्यूज साइट चलाने के लिए बड़ी मात्रा में फंड चीन से आता था। पुलिस ने दावा करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया में दखलअंदाजी करने के लिए पुरकायस्थ ने पीपुल्स अलायंस फॉर डेमोक्रेसी एंड सेक्युलरिज्म के साथ में मिलकर साजिश रची थी।

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