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Jagdeep Dhankhar: 'राष्ट्र विरोधी नैरेटिव को खत्म करना होगा', उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बोले- यह कोविड वायरस की तरह

Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति ने कहा कि गीता का दर्शन भारतीय सभ्यता और इसकी संस्कृति का आधार है और वर्तमान समय में निष्पक्षता, पारदर्शिता, समानता और सार्वभौमिक भाईचारे के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देने के साथ भारत के शासन की आत्मा है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: December 18, 2023 10:39 IST
jagdeep dhankhar   राष्ट्र विरोधी नैरेटिव को खत्म करना होगा   उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बोले  यह कोविड वायरस की तरह
Vice President Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतों को खत्म करना होगा। (फोटो सोर्स: ANI)
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Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि राष्ट्र विरोधी ताकतों लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी ताकतों को खत्म करना होगा। उन्होंने राष्ट्र विरोधी नैरेटिव को कोविड वायरस करार दिया। धनखड़ रविवार को कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के रूप में आयोजित किया गया था।

जगदीप धनखड़ ने कहा कि या तो एक प्लानिंग के तहत या फिर समझ की कमी के कारण कुछ लोग राष्ट्र विरोधी बातें फैलाने का मजा लेते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। आपको ऐसी चीजों को विरोध करना होगा। यह कोविड वायरस की तरह है जिसे बेअसर करना होगा। इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी भी मौजूद थे।

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'गीता का दर्शन भारतीय संस्कृति का आधार'

उपराष्ट्रपति ने कहा कि गीता का दर्शन भारतीय सभ्यता और इसकी संस्कृति का आधार है और वर्तमान समय में निष्पक्षता, पारदर्शिता, समानता और सार्वभौमिक भाईचारे के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर देने के साथ भारत के शासन की आत्मा है। उन्होंने कहा कि आज भारत विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, "हम एक विश्व शक्ति हैं, हम शांति के लिए खड़े हैं, हम वैश्विक स्थिरता के लिए खड़े हैं। हम अपने भारत को 2047 में शिखर पर ले जाना चाहते हैं जब हम अपनी आजादी के शताब्दी समारोह में होंगे।"

रूस-यूक्रेन और इजराइल-हमास संघर्ष का जिक्र करते हुए धनखड़ ने कहा, 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया ने इतना दर्द कभी नहीं देखा, जितना आज देख रही है।' उन्होंने कहा, ''हम एक ज्वालामुखी पर बैठे हैं। दुनिया के दो 'कॉन्फ़िगरेशन' - एक इजराइल-हमास और दूसरा यूक्रेन-रूस - सर्वविदित हैं।'' उन्होंने कहा कि गीता का दर्शन आज भी उतना प्रासंगिक है जितना पहले कभी नहीं था।

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धनखड़ ने कहा, जब दुनिया के सामने दो बड़े मुद्दे थे, तो पीएम मोदी ने गीता से मार्गदर्शन लेते हुए कहा कि बातचीत और कूटनीति के जरिए युद्ध से बचने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।

महाभारत काल का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि कोई युद्ध न हो। उन्होंने कहा, "लेकिन एक बार जब यह अपरिहार्य हो गया, तब भी भगवान कृष्ण ने अर्जुन को 'ज्ञान' दिया, जिस पर हमें आज विचार करने की जरूरत है।" उन्होंने कहा, भगवान कृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि कभी भी कर्तव्य का मार्ग मत छोड़ो…और "आज पीएम मोदी ऐसा कर रहे हैं"।

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