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'राम मंदिर को धर्म से जोड़ना गलत', जब संसद में ओवैसी पर भड़के अमित शाह

गृहमंत्री अमित शाह और AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बीच राम मंदिर को लेकर एक बार फिर बयानबाजी देखने को मिली है।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: February 10, 2024 17:05 IST
 राम मंदिर को धर्म से जोड़ना गलत   जब संसद में ओवैसी पर भड़के अमित शाह
लोकसभा मे राम मंदिर को लेकर गृहमंत्री अमित शाह और असदुद्दीन ओवैसी के बीच तीखी बयानबाजी हुई। (सोर्स - ANI)
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आज लोकसभा चुनाव से ठीक पहले संसद के बजट सत्र के आखिरी दिन दोनों ही सदनों में पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। जयंत चौधरी को बोलने के राज्यसभा में मिला समय जहां विपक्ष को रास नहीं आया तो वहीं कांग्रेस के इस कदम को सत्ता पक्ष ने उसका अहंकार बताया। इन सबके बीच अयोध्या में बने राम मंदिर के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया। इस मुद्दे पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी और गृहमंत्री अमित शाह के बीच तीखीबयान बाजी देखने को मिली।

दरअसल, संसद में राम मंदिर के लिए आए धन्यवाद प्रस्ताव पर असदद्दीन ओवैसी ने बड़ा बयान देते हुए बाबरी मस्जिद जिंदाबाद कहा। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या मोदी सरकार सिर्फ एक मजहब की ही सरकार है। क्या मोदी सरकार हिंदुत्व की सरकार है? उन्होंने पूछा कि देश का कोई मजहब नही है और आप मुसलमानों को क्या पैगाम दे रहे हैं? ओवैसी ने कहा कि 22 जनवरी का जश्न मनाकर आप मुसलमानों को क्या मैसेज दे रहे हैं कि एक धर्म ने दूसरे धर्म पर विजय प्राप्त की।

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ओवैसी ने कहा कि मैं बाबर, औरंगजेब या जिन्ना का प्रवक्ता नहीं हूं लेकिन 1992, 2019 और 22 जनवरी को मुसलमानों के साथ धोखा किया गया। ओवैसी ने कहा कि उन्हें ताज्जुब होता है कि 16 दिसंबर 1992 को इसी लोकसभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें बाबरी मस्जिद विध्वंस की आलोचना की घई थी। मेरा मानना है कि देश का कोई मजहब नहीं है, और आज यहां धन्यवाद प्रस्ताव आया है। उन्होंने कहा कि वह लोकसभा के इस मुख्तलिफ रवैए पर आश्चर्य में हैं।

अमित शाह ने संसद में दिया जवाब

ओवैसी ने राम मंदिर को लेकर एक बार फिर आलोचनात्मक रवैया दिखाया। इसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने सारी बातों का जवाब भी दिया है। अमित शाह ने कहा कि राम मंदिर को किसी भी धर्म से जोड़ना गलत है, बल्कि ये देश के जनमानस के लिए अहम है। अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी ऐतिहासिक था और राम देश के जनमानस के लिए प्राण हैं। शाह ने कहा कि भारत की कल्पना राम के बिना नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आज वे किसी का जवाब नहीं देंगे बल्कि अपने मन की बात करेंगे। इस दौरान अमित शाह ने पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राम मंदिर बना है तो फिर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं?

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दस हजार साल तक इतिहास रहेगी 22 जनवरी

अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी के बाद अद्भुत अध्यात्मिकता का अनुभव हो रहा है। यह पुनर्जागरण का दिन है। राम के बिना देश की कल्पना नहीं है। राममंदिर की स्थापना सौभाग्य की बात है और इस मामले में हमारी पीढ़ी सौभाग्यशषाली है। 22 जनवरी का दिन दस हजार साल तक इतिहास में गिना जाएगा। 22 जनवरी महान भारत की यात्रा की शुरुआत है। अमित शाह ने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 साल बाद कानून लड़ाई का अंत हुआ था। उन्होंने कहा कि 1528 से 22 जनवरी 2024 तक का इस लड़ाई में भाग लेने वाले सभी योद्धाओं को विनम्रता के साथ स्मरण करता हूं।

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