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भयंकर गर्मी से टूट गया 15 साल का रिकॉर्ड, सबसे ज्यादा परेशान हीटवेव ने किया, जानिए कब तक रहेगा ऐसा

IMD Forecast: मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों से पता चलता है कि कम से कम आठ राज्यों में 2010 के बाद से सबसे ज़्यादा गर्मी वाले दिन दर्ज किए गए हैं।
Written by: ईएनएस | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: June 14, 2024 08:53 IST
भयंकर गर्मी से टूट गया 15 साल का रिकॉर्ड  सबसे ज्यादा परेशान हीटवेव ने किया  जानिए कब तक रहेगा ऐसा
मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों के लिए अलर्ट जारी किए हैं। (फोटो : पीटीआई)
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तल्ख गर्मी का असर अभी भी जारी है, लेकिन इस बार सबसे ज़्यादा परेशान हीटवेव ने किया है, आंकड़ें तो यह कहते हैं कि गर्मी ने पिछले 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस बार शुरुआत से ही गर्म हवाएं चलने लगी थीं। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों से पता चलता है कि कम से कम आठ राज्यों में 2010 के बाद से सबसे ज़्यादा गर्मी वाले दिन दर्ज किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश और केरल में भी इस साल पहली बार हीटवेव दर्ज की गई है।

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क्या कहते हैं IMD के आंकड़े?

मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 1 मार्च से 9 जून के बीच ओडिशा में 27 दिन तक हीटवेव दर्ज की गई। यह देश के किसी भी राज्य में सबसे ज़्यादा थी। राजस्थान में 23 दिन हीटवेव दर्ज की गई, जबकि हरियाणा, दिल्ली और यूपी में कम से कम 20 दिन हीटवेव दर्ज की गई। यहां तक ​​कि जम्मू-कश्मीर में भी छह दिन हीटवेव दर्ज की गई।

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हीटवेव के टूटे रिकॉर्ड!

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन ने इस बार हीटवेव को लेकर कहा, --"गर्मी का मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है, इसलिए हमारे पास पूरा डेटा नहीं है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इस बात में कोई संदेह है कि इस साल हीटवेव अब तक की सबसे ज़्यादा प्रभावी रही है। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि इस साल अल नीनो का मौसम है। हमने पहले भी देखा है कि अल नीनो के बाद वाले साल में इस तरह की हीटवेव आई थी, इसका एक उदाहरण 2010 है।" एम राजीवन ने आगे कहा कि हीटवेव का प्रभाव आने वाले वक़्त में और ज़्यादा बढ़ेगा। इससे हमारे पीने का पानी हमारे खेत-खलियान सब पर प्रभाव पड़ने वाले हैं।

अब बढ़ रहा है हीटवेव का दायरा

आईएमडी के पूर्व निदेशक के जे रमेश ने कहा, "कुछ साल पहले तक हीटवेव ज्यादातर उत्तरी मैदानों और देश के सेंट्रल पार्ट तक ही सीमित थी। तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भी इससे प्रभावित होते थे लेकिन दक्षिणी प्रायद्वीप में बड़े पैमाने पर हीटवेव नहीं देखी जाती थी। लेकिन अब लगभग पूरा देश हीटवेव का अनुभव कर रहा है, यहां तक ​​कि हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य और तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्य भी इसकी मार झेल रही है।"

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