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Maharashtra: 'मुख्यमंत्री पद के लिए नहीं दिया गया था कोई आश्वासन', विनोद तावड़े बोले- BJP को शिवसेना के साथ नहीं करना चाहिए था गठबंधन

महाराष्ट्र में अगला विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद अक्टूबर/नवंबर 2024 में होना है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: shruti srivastava
Updated: June 03, 2023 14:22 IST
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बीजेपी विनोद तावड़े (Source- Indian Express)
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एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने गुरुवार (1 जून) को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाक़ात की। इस बीच बीजेपी के एक नेता ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में लिए गए फैसलों का मूल्यांकन किया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा है कि महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने शुक्रवार को एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, ‘‘महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को शिवसेना के साथ गठबंधन नहीं करना चाहिए था। 2014 के बाद शिवसेना कभी भी गठबंधन में दूसरी भूमिका निभाने की बात पचा नहीं सकी थी।’’ दरअसल, 2019 में अविभाजित शिवसेना और भाजपा ने मिलकर 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल किया था।

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बीजेपी ने कभी नहीं सोचा था कि उद्धव गठबंधन तोड़ देंगे- विनोद तावड़े

तावड़े ने कहा, ‘‘शिवसेना के साथ गठबंधन पर दो तरह के विचार थे। कुछ इसके समर्थन में थे और कुछ का कहना था कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। मेरा भी यही मानना है कि गठबंधन जरूरी नहीं था।’’ विनोद तावड़े ने कहा कि बीजेपी ने कभी नहीं सोचा था कि उद्धव गठबंधन तोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि इस कदम ने शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की छवि को नुकसान पहुंचाया, जो अपने वचन से पीछे नहीं हटने के लिए जाने जाते थे।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव ने उद्धव ठाकरे के उन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि भाजपा मुख्यमंत्री पद साझा करने के अपने वादे को पूरा नहीं कर रही थी। उन्होंने कहा, ‘‘इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है। अगर मुख्यमंत्री पद साझा करने के संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया गया, तो इसे पूरा करने का सवाल ही नहीं उठता है।’’

शिवसेना और बीजेपी गठबंधन को मिला था बहुमत

2019 में अविभाजित शिवसेना और बीजेपी ने मिलकर 288 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत हासिल किया था, लेकिन उद्धव ने बीजेपी पर वादे के मुताबिक मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल बराबर रूप से साझा नहीं करने का आरोप लगाते हुए पार्टी से अपना दशकों पुराना गठबंधन तोड़ लिया था। तब उद्धव ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी (MVA) की सरकार बनाई थी, जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कुछ विधायकों के पिछले साल जून में बगावत करने के कारण गिर गई थी। शिंदे बाद में भाजपा की मदद से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे।

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