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Mohan Yadav: BJP ने यादव को क्यों बनाया MP का CM? एक तीर से तीन निशाने साधने का प्रयास, समझिए पूरा 'गेम प्लान'

MP News: मोहन यादव का मुख्यमंत्री बनाया जाना इस ओर इशारा है कि बीजेपी हिन्दी भाषी राज्यों में यादव वोट को साधने के लिए एक बेहतरीन पिच बना रही है।
Written by: लिज़ मैथ्यू | Edited By: Mohammad Qasim
Updated: December 12, 2023 15:03 IST
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फोटो : पीटीआई)
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मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक दल की बैठक में यह फैसला हुआ कि मुख्यमंत्री अब मोहन यादव होंगे। इस पद के लिए उनका नाम लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए फेंकी गई एक सोची-समझी चाल के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ यह लगातार कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे ओबीसी के मुद्दे पर एक करारा जवाब भी कहा जा सकता है, और ऐसी चर्चा भी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि लगभग सभी जातियों में पैंठ जमा चुकी बीजेपी यादवों के बीच जगह बनाने में अभी भी उतनी सफल नहीं हुई थी। यह एक लाइन थी जिसे बीजेपी ने इस ऐलान के साथ अब तोड़ने का प्रयास किया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में यादवों का मजबूत आधार माना जाता है और अब बीजेपी ने एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश की है। यह इस ओर इशारा है कि बीजेपी ने हिन्दी भाषी राज्यों में यादव वोट को साधने के लिए मोहन यादव का नाम आगे करते हुए एक बेहतरीन पिच बनाई है।

बीजेपी यादव वोटरों को क्या संदेश दे रही है?

ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी ने हिंदी भाषी इलाकों में राजनीतिक प्रभाव रखने वाले यादव परिवारों में सेंध लगा दी है। पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने कहा कि इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब मोहन यादव यूपी और बिहार जैसे राज्यों में जहां यादवों की मजबूत उपस्थिति है, प्रचार करेंगे तो कैसा प्रभाव पड़ेगा। वह कहते हैं कि अगर लोकसभा में यादवों का एक वर्ग भाजपा में चला जाता है तो भी इसका प्रभाव बहुत बड़ा होगा क्योंकि भाजपा के पास पहले से ही महत्वपूर्ण बढ़त है। यह भी संकेत है कि बीजेपी ने समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के किले भेदने की भी एक कोशिश की है।

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एक नेता ने कहा कि अगर पार्टी ने यूपी या बिहार में किसी यादव को शीर्ष पद पर बिठाया होता, तो इससे ओबीसी वर्ग की दूसरी जातियों में नाराजगी हो सकती थी। लेकिन मध्य प्रदेश का मामला अलग है। मध्य प्रदेश के माध्यम से किसी और को परेशान किए बिना यादवों को एक संकेत भेजा गया है।

यादवों को साधने का लगातार प्रयास

भाजपा ने यादव वोट को साधने का लगातार प्रयास किया है । बिहार के 2015 विधानसभा चुनावों में 23 यादवों को मैदान में उतारा था। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना में एक रैली में कहा था कि 'यदुवंशियों' को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि पार्टी उनके हितों का ख्याल रखेगी। 2024 के आम चुनावों से पहले पार्टी ने 2021 में भूपेन्द्र यादव को केंद्रीय मंत्री के पद पर बैठाया और 2022 में सुधा यादव को पार्टी के संसदीय बोर्ड में शामिल किया। यह गहरे संकेत हैं जिनसे पार्टी की मंशा ज़ाहिर होती है।

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