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Madhya Pradesh Assembly Election 2023: मध्‍य प्रदेश का वो गांव जहां आजादी से अब तक वोट मांगने नहीं पहुंचा कोई उम्‍मीदवार, इस बार चुनाव आयोग करने जा रहा ये काम

आदिवासियों के लिए आरक्षित अलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र में यह मतदान केंद्र झंडाना के ग्राम पंचायत भवन में बनाया गया है। यह दुर्गम गांव मध्य प्रदेश के पड़ोसी गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध की दीवार से टकराकर लौटने वाले पानी (बैक वाटर) के डूब क्षेत्र में स्थित है।
Written by: एजंसी | Edited By: Bishwa Nath Jha
November 10, 2023 12:29 IST
madhya pradesh assembly election 2023  मध्‍य प्रदेश का वो गांव जहां आजादी से अब तक वोट मांगने नहीं पहुंचा कोई उम्‍मीदवार  इस बार चुनाव आयोग करने जा रहा ये काम
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।(फोटो- इंडियन एक्‍सप्रेस)।
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Madhya Pradesh Assembly Election 2023: मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में एक दुर्गम मतदान केंद्र ऐसा है, जहां पहुंचकर विधानसभा चुनाव कराने के लिए निर्वाचन अधिकारियों को इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ पहले नाव से सफर करना पड़ेगा और उसके बाद पहाड़ी इलाके में मुश्किल पैदल यात्रा भी करनी होगी। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।

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आदिवासियों के लिए आरक्षित अलीराजपुर विधानसभा क्षेत्र में यह मतदान केंद्र झंडाना के ग्राम पंचायत भवन में बनाया गया है। यह दुर्गम गांव मध्य प्रदेश के पड़ोसी गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध की दीवार से टकराकर लौटने वाले पानी (बैक वाटर) के डूब क्षेत्र में स्थित है। बांध के पास के क्षेत्र में बरसों पहले आई बाढ़ के बावजूद आदिवासी समुदाय के करीब एक हजार लोग झंडाना गांव की अपनी मातृभूमि को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि इस दुर्गम इलाके में बेहद मुश्किल हालात से जूझना पड़ रहा है।

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राज्य में 17 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए इस गांव के 763 लोगों को मताधिकार हासिल है। झंडाना गांव अलीराजपुर के जिला मुख्यालय से महज 60 किलोमीटर दूर है, लेकिन विकास और बुनियादी सुविधाओं की दौड़ में कई दशकों से पिछड़ा हुआ है। चुनावी दौर में गांव के इक्का-दुक्का घरों पर ही राजनीतिक दलों के झंडे लगे दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई भी उम्मीदवार उनके गांव में वोट मांगने नहीं आया है।

झंडाना के अधिकांश लोग भीली बोली में बात करते हैं। गांव की निवासी वंदना (23) ने बताया, ‘हमारे गांव में सड़क की समस्या है और बाहरी दुनिया से संपर्क के लिए हमें नाव का सहारा लेना पड़ता है। गांव में जब भी कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है, तो हम उसे नाव से ही पास के अस्पताल ले जाते हैं।’ दसवीं तक पढ़ी महिला ने बताया कि बारिश के बाद बांध के बैकवाटर का स्तर बढ़ने से हर साल जीवन-यापन में मुश्किलें आती हैं और यही वजह है कि गांव के कई लोग रोजगार के लिए पलायन करके गुजरात चले गए हैं। बांध के अथाह बैक वाटर से घिरे होने के बावजूद सबसे बड़ी विडंबना यह है कि गांव में पीने के पानी का संकट है। ग्रामीणों के मुताबिक गर्मियों में हालात विकट हो जाते हैं।

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अलीराजपुर के जिलाधिकारी अभय अरविंद बेडेकर ने बताया कि जल मार्ग के अलावा झंडाना तक पहुंचने के लिए एक ही मार्ग है, लेकिन इस रास्ते के इस्तेमाल करने पर करीब पांच किलोमीटर पैदल चलना होता है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने प्रशासन से 3.5 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क बनाने की मांग की है। बेडेकर ने कहा, ‘ग्रामीण जिस पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं, वह वन भूमि से होकर गुजरती है।

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हमने सड़क बनाने की मंजूरी के लिए वन विभाग को पत्र लिखा है। यह मंजूरी मिलते ही हम झंडाना में पक्की सड़क बनाना शुरू कर देंगे।’ उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को आपात स्थिति में नजदीकी अस्पताल ले जाने के लिए प्रशासन मोटर बोट तैयार रखता है।

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