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ये अजीब वायरस भारत में बच्चों को बना रहा है अपना शिकार, खांसने और छींकने से फैलता है रोग, जानिए इस बीमारी के लक्षण और बचाव

सेंटर फॉर डिजीज एंड कंट्रोल के मुताबिक मम्प्स के बॉडी में जो लक्षण सामने आते हैं उसमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और भूख में कमी शामिल है।
Written by: Shahina Noor
नई दिल्ली | March 15, 2024 13:42 IST
ये अजीब वायरस भारत में बच्चों को बना रहा है अपना शिकार  खांसने और छींकने से फैलता है रोग  जानिए इस बीमारी के लक्षण और बचाव
अमेरिका में 1967 में ही इस बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया था। भारत में भी इस बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन मौजूद है। freepik
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कोविड-19 संक्रमण के बाद कई तरह के वायरस ने लोगों को अपनी चपेट में लिया है। केरल में इन दिनों एक वायरस लोगों को बेहद परेशान कर रहा है जिसका नाम मम्प्स है। पिछले दो महीनों में केरल में दो हजार से ज्यादा मम्प्स के मामले सामने आ चुके हैं। 10 मार्च को अकेले 190 मामले दर्ज किए गए हैं। मम्प्स रूबेला वायरस फैमिली का एक संक्रामक रोग है। ये बीमारी एक इंसान से दूसरे इंसान में खांसने,छींकने से और संपर्क में आने से फैलती है। ये बीमारी कण्ठ रोग है जिसमें चेहरे के दोनों तरफ के पैरोटिड ग्लैंड में सूजन आ जाती है और मुंह में सामान्य से ज्यादा लार बनती है।
यह कान के नीचे एक या दोनों तरफ लार ग्रंथियों की सूजन का परिणाम है, जिसे अक्सर पैरोटाइटिस कहा जाता है। इस सूजन की वजह से मरीज का मुंह तक खोलना मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी की वजह से मरीज से खाया पिया तक नहीं जाता है। आइए जानते हैं कि इस बीमारी के लक्षण कौन-कौन से हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

पैरोटाइटिस से कुछ दिन पहले बॉडी में दिखते हैं ये लक्षण

सेंटर फॉर डिजीज एंड कंट्रोल के मुताबिक मम्प्स के बॉडी में जो लक्षण सामने आते हैं उसमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और भूख में कमी शामिल है। ये लक्षण आम तौर पर संक्रमण के 16-18 दिनों के बाद दिखाई देते हैं, यह अवधि संक्रमण के 12-25 दिनों तक हो सकती है। मम्प्स से पीड़ित कुछ लोगों में इस बीमारी के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं जैसे सर्दी-जुकाम। मम्प्स से पीड़ित लोग अक्सर दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं।

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किन लोगों को इस बीमारी का है खतरा

सेंटर फॉर डिजीज एंड कंट्रोल के मुताबिक मम्प्स सालों पुरानी बीमारी है। अमेरिका में 1967 में ही इस बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया था। भारत में भी इस बीमारी से बचाव के लिए वैक्सीन मौजूद है। जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं ली है उन्हें इस बीमारी का खतरा अधिक है। छोटे बच्चे इस बीमारी की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं क्योंकि वो हेल्थ हाइजीन का ध्यान नहीं रखते। वायरस से फैलने वाली ये बीमारी तेजी से फैलती है। ये बीमारी रूबेला वायरस की है तो इस कारण भी बच्चे इससे अधिक संक्रमित होते हैं। इस बीमारी की वजह से ब्रेन में सूजन और मेनिनजाइटिस जैसी गंभीर समस्या हो सकती है, जो जानलेवा है।

कैसे करें बीमारी से बचाव

  • ये एक संक्रामक रोग है जो बच्चों में सबसे अधिक हो रहा है। बच्चों में इस बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
  • मम्प्स की वैक्सीन को एमएमआर वैक्सीन कहते हैं। यह वैक्सीन बच्चों को 12 से 15 महीने की उम्र में जरूर लगवाएं।
  • बच्चे को संक्रमित बच्चे से दूर रखें।
  • बच्चे को हाथ धोकर भोजन करने के लिए कहें। अगर किसी में फ्लू के लक्षण दिख रहे है तो उस व्यक्ति से बच्चों को दूर रखें।
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