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जीवन शैली: संवाद की संवेदना के जरिए संबंधों का नया संसार

अगर कुछ बातें रिश्तों को प्रभावित करने लगें, तो विचार करना चाहिए कि क्या किसी बात पर उपजी असहमति का ताप इतना ऊंचा हो जाए कि रिश्ते बिगड़ जाएं!
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 26, 2024 14:39 IST
जीवन शैली  संवाद की संवेदना के जरिए संबंधों का नया संसार
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(सोशल मीडिया)।
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एक मशहूर उक्तिहै- हम दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें, जैसे व्यवहार की अपेक्षा हम अपने लिए करते हैं। मगर होता यह है कि हम अपने प्रति दूसरों के व्यवहार को तो कसौटी पर रखते हैं, मगर अपने व्यवहार के असर पर गौर नहीं कर पाते हैं। इसी संदर्भ में एक स्थिति यह आती है कि कुछ बातों पर हमारी प्रतिक्रिया और उस पर दूसरों की प्रतिक्रिया जब अपने प्रभाव के असर पर आती है तब ऐसा संभव है कि दोनों में कोई पक्ष या फिर दोनों पक्ष सामने वाले की किसी बात से दुखी हो जाएं या बुरा मान जाएं।

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असहमति का ताप

अगर कुछ बातें रिश्तों को प्रभावित करने लगें, तो विचार करना चाहिए कि क्या किसी बात पर उपजी असहमति का ताप इतना ऊंचा हो जाए कि रिश्ते बिगड़ जाएं! होना तो यह चाहिए कि अच्छे रिश्तों को बचाने के लिए वैसी बातों को भी नजरअंदाज कर देना चाहिए, जो कई बार चोट पहुंचा जाती हैं। यों भी, व्यवहार में देखें तो कई बार आपसी टकराव कई बार बहुत ज्यादा तीखे होते हैं, तब भी उसके कुछ समय बाद उसमें जमी बर्फ पिघलने लगती है। वैसे भी मनुष्य सामाजिक प्राणी है और उससे निर्मित उसका मानस जीवन के लिए आखिरकार समाज ही खोजता है।

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नई संवेदनाओं की जगह

किसी मुद्दे पर मतभेद हो, तो दोनों ओर से या तो खुद को जज्ब कर लिया जाए या फिर अगर वह टकराव और कड़वेपन में तब्दील हो जाए तो एक दूसरे को माफ करके फिर किसी अगले मुद्दे पर संवाद के लिए जमीन तैयार की जाए। अगर हम अपनी रोजमर्रा की जीवनशैली पर गौर करें, तो भौतिक सुविधाओं के बीच वक्त गुजारते हुए कब संवेदनाओं के पहलू को गौण कर देते हैं, यह पता भी नहीं चलता। जबकि इंसानी दुनिया का जीवन-तत्त्व अगर कुछ है तो उसकी बुनियाद आखिरकार संवेदनाएं ही हैं। अगर संवेदनाओं का जीवन हमारे व्यवहार में घुलता है, तब हम अपने लिए भी भावनाओं का एक बेहतर संसार बना पाते हैं और अपने आसपास भी संवेदनाओं की सुगंध फैलाते हैं।

संवाद का साधन

हम सब शायद अपने प्रति एक संवेदनशील बर्ताव की अपेक्षा करते हैं, ताकि हमारे मन को थोड़ा चैन-सुकून मिल सके। इसके लिए जरूरी है कि अपने आसपास फैले संसार में संवाद को अपने व्यक्तित्व के विस्तार का जरिया बनाएं और उसके लिए सबसे सुंदर साधन संवाद कायम करते समय संवेदनशील स्वर के साथ किसी से संपर्क स्थापित करें।

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निश्चित तौर पर संवाद में मधुरता कई बार वैसी बातों पर भी अपने प्रतिद्वंद्वी को सहमत कर लेने का जरिया बन जाती है, जिस पर वह सामान्य तौर पर प्रतिपक्ष में होता है। इस तरह के संवाद के साथ संबंधों के जो नए आयाम खड़े होते हैं, वह जीवन में सहजता और खुशी हासिल करने का सबसे उपयोगी माध्यम बनते हैं।

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