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सिर्फ स्वाद ही नहीं, अपने साथ कई सांस्कृतिक महत्व समेटे हुए हैं भारतीय मिठाईयां

हम विभिन्न तरह की मिठाईयों को खाकर सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का आनंद ले रहे हैं और इस पाक कला को यूं ही सदियों तक चलते रहना चाहते हैं।
Written by: लाइफस्टाइल डेस्क
नई दिल्ली | Updated: March 16, 2024 14:30 IST
सिर्फ स्वाद ही नहीं  अपने साथ कई सांस्कृतिक महत्व समेटे हुए हैं भारतीय मिठाईयां
कई सांस्कृतिक महत्व समेटे हुए हैं भारतीय मिठाईयां (PC-fREEPIK)
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चाहें शादी हो या कोई त्यौहार या फिर बस यूं ही खाने का मन हो। हम भारतीय मिठाई खाने के लिए बस कोई न कोई बहाना ढूंढते हैं। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसे मिठाई खाना पसंद न हो। मिठाई का नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाता है। देश में सैकड़ों तरह की मिठाई है जिनमें से शायद कुछ का तो नाम ही न पता हो। लेकिन क्या आप ये बात जानते हैं कि मिठाई स्वाद के लिए ही नहीं दुनियाभर में फेमस है। बल्कि इनका सांस्कृतिक महत्व भी है।  विभिन्न रीति-रिवाजों और सभ्यताओं वाला भारत अपने समृद्ध इतिहास के अलावा विविध और लजीज खानपान का धनी देश भी है। इस पाक कला की खूबसूरती में मीठे और नमकीन व्यंजनों का विशेष स्थान है, जो भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग बन चुके हैं। ये व्यंजन केवल स्वाद ही नहीं देते, बल्कि जीवंत भारत की परंपराओं और कहानियों को समेटे हुए गहरे सांस्कृतिक महत्व को भी दर्शाते हैं।

स्नैक्स की विविधता

भारतीय स्नैक्स संस्कृति की खोज पर निकले, तो आप विकल्पों की अद्भुत श्रृंखला से मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। यहां कुरकुरे से लेकर देर तक चबाने तक चबाए जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों तक सभी का स्वाद मिल सकता है। जहां दक्षिण मुरुककु और केले के चिप्स जैसे चावल से बने स्नैक्स के लिए जाना जाता है, वहीं उत्तर मसालेदार चाट और समोसों के लिए प्रसिद्ध है। पूर्व में रसगुल्ला और सौंदेश जैसी मिठाइयों की मिठास लुभाती है, तो पश्चिम का प्रसिद्ध वड़ा पाव और ढोकला वहां की पाक कला कौशल का परिचय देते हैं।

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स्वादों का अनोखा संगम

क्या आप जानते हैं कि भारतीय स्नैक्स को जादुई बनाने वाली सबसे प्रमुख चीज क्या है? दरअसल मसाले इन स्नैक्स की जान हैं। जीरा, धनिया और हल्दी जैसे मसाले कचौरी और पकोड़े जैसे व्यंजनों को तीखापन और चटपटा बनाते हैं। मीठे और नमकीन का लजीज मिश्रण चाट में मिलता है, जिन्हें इमली की चटनी और मसालों के मिश्रण से बनाया जाता है। साथ ही, राई और करी पत्ते जैसी सुगंधित जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल इन स्नैक्स को भारतीय पाक कला की ऊंचाई तक पहुंचा देता है।

मिठाइयां संस्कृति का प्रतीक

भारतीयों के दिल में मिठाइयों का एक खास स्थान है। ये मिठाइयां सिर्फ खाने की चीजें नहीं हैं, बल्कि अक्सर धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहारों का एक अनिवार्य हिस्सा होती हैं। उदाहरण के लिए, प्रचलित लड्डू, जो धार्मिक अनुष्ठानों में आवश्यक प्रसाद है। पीढ़ी दर पीढ़ी शिल्पकारों ने गुलाब जामुन और जलेबी जैसी मिठाइयां बनाने का हुनर संभाला है, जो सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक है।

भारतीय स्नैक्स और मिठाइयों की दुनिया की खोज करना, सिर्फ एक पाक-यात्रा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई में जाने का एक अनूठा अनुभव है। इन विशेष व्यंजनों में स्वादों की विविधता, कलात्मक तैयारी और सांस्कृतिक महत्व शामिल है, जो इन्हें केवल भोजन से कहीं अधिक, भारत की समृद्ध विरासत का उत्सव मनाते हैं। दरअसल, हर समोसे के स्वाद के साथ या रसगुल्ले की मिठास में लिप्त होकर, हम सदियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का आनंद ले रहे होते हैं, और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारत के पाक-कला के जादुई सार को संरक्षित रखा जाए।

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बांसुरी वाला रेस्टोरेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत सिंह से बातचीत पर आधारित

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